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25 Oct, 2018 Blog

Janiye Kaise Karein Diwali Par Pooja / जानिए कैसे करें दीपावली पर पूजा और क्यों करें 8 दीपक प्रज्वलित

https://youtu.be/ny5nFr9exhY

जानिए कैसे करें दीपावली पर पूजा, और क्यों करें 8 दीपक प्रज्वलित

अगर आप दीपावली की तैयारी में जुटे हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान दें कि दीपावली में विशेष आठ दीपक जलाएं।यह आठ दीपक आठ प्रकार की लक्ष्मी लेकर आपके घर में हमेशा हमेशा के लिए वास करेंगे।
1. सर्वप्रथम भगवान गणेश का एक कलश रखें और विधि विधान से उस का पूजन करें।108 दूर्वा भगवान गणेश के 108 नामों से उसी कलश में अर्पण करें। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्न विनाशक हैं।
2. इसके बाद माता लक्ष्मी का कलश रखें और उसका विधि विधान से पूजन करें। माता लक्ष्मी के 108 नाम लेकर एक एक सिक्का कमल का फूल या कमलगट्टे के साथ कलश में ही डालें इससे लक्ष्मी का आगमन सदैव आपके घर में बना रहेगा।
3. एक कलश भगवान कुबेर का रखें और उसका विधि विधान से पूजन करें। गुड़ और धनिया से उस कलश को भरें। जहां पर भी यह गुड़ और धनिया जाएगा या जो इसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करेगा सदा सदा के लिए लक्ष्मी उसके पास प्रसन्न होकर रहेगी।
4. इसके बाद गणेश लक्ष्मी और कुबेर की मूर्ति का विधि विधान से पूजन करें। फिर दीपक जलाने की परंपरा जो शुरू से चली आ रही है, उसे करें घी के आठ दीपक पहले जलाएं। यह आठ दीपक आपको आठ प्रकार की लक्ष्मी प्रदान कराने वाले हैं। पहला दीपक जलाकर प्रार्थना करें कि हे धनलक्ष्मी यह दीपक मैंने आपके लिए जलाया है, आप इसे स्वीकार करें और प्रसन्न होकर सदा सदा के लिए हमारे यहां वास करें।इसी प्रकार से 8 दीपक जलाएं और प्रार्थना करें। जैसे दूसरा दीपक धान्यलक्ष्मी, तीसरा दीपक धैर्यलक्ष्मी, चौथा दीपक शौर्यलक्ष्मी, पांचवां दीपक विद्यालक्ष्मी, छठवां दीपक कार्यलक्ष्मी, सातवा दीपक विजयालक्ष्मी, और आठवां दीपक राजलक्ष्मी के लिए प्रज्वलित करें और प्रार्थना करें । इस प्रकार से यदि आप दीपावली की पूजा करते हैं, तो निश्चित ही आठ प्रकार के रोग शोक पाप कष्ट दुःख दरिद्र विघ्न बाधा दूर होंगे।

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25 Oct, 2018 Blog

Sahi Khayein Kismat Chamkayein / सही खायें किस्मत चमकाएं

https://youtu.be/gwdSZJ9Gha8

सही खायें किस्मत चमकाएं

शुभ योग बनाने मे योग ही नही आपका भोजन भी प्रभावशाली होता है।चलिये आहार ज्योतिष के आधार पर जाने कब क्या खाना शुभ है।

1- प्रतिपदा को पेठा  न खाएँ क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।
2. द्वितीया को छोटा बैंगन व कटहल खाना निषेध है।
3. तृतीया को परमल खाना निषेध है क्योंकि यह शत्रुओं की वृद्धि करता है।
4. चतुर्थी के दिन मूली खाना निषेध है, इससे धन का नाश होता है।
5. पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। अत: पंचमी को बेल खाना निषेध है।
6. षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, एवं दातुन करना निषेध है। क्योंकि इसके सेवन से एवं दातुन करने से नीच योनि प्राप्त होती है।
7. सप्तमी के दिन ताड़ का फल खाना निषेध है। इसको इस दिन खाने से रोग होता है।
8. अष्टमी के दिन नारियल खाना निषेध है क्योंकि इसके खाने से बुद्धि का नाश होता है।
9. नवमी के दिन लौकी खाना निषेध है क्योंकि इस दिन लौकी का सेवन गौ मांस के समान है।
10. दशमी को कलंबी खाना निषेध है।
11. एकादशी को सेम फली खाना निषेध है।
12. द्वादशी को (पोई) पु‍तिका खाना निषेध है।
13. तेरस (त्रयोदशी) को बैंगन खाना निषेध है।
14. अमावस्या, पूर्णिमा, सक्रांति, चतुर्दशी और अष्टमी, रविवार श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना निषेध है।
15. रविवार के दिन अदरक भी नहीं खाना चाहिए।
16. कार्तिक मास में बैंगन और माघ मास में मूली का त्याग करना चाहिए।
17. अंजली से या खड़े होकर जल नहीं पीना चाहिए।
18. जो भोजन लड़ाई झगड़ा करके बनाया गया हो, जिस भोजन को किसी ने लाँघा हो तो वह भोजन नहीं करना च‍ाहिए क्योंकि वह राक्षस भोजन होता है।
19. जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए। यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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24 Oct, 2018 Blog

Agar Kundali Me Hai Ye Yog To Jarur Hoga Prem Vivah / अगर कुंडली में हैं ये योग, तो जरुर होगा प्रेम विवाह

https://youtu.be/BNmbq4zjBss

अगर कुंडली में हैं ये योग, तो जरुर होगा प्रेम विवाह

  • जन्म पत्रिका में मंगल अगर राहु या शनि से युति बना रहा हो, तो प्रेम-विवाह की संभावना होती है।
  • जब राहु प्रथम भाव यानी लग्न में हो, लेकिन सातवें भाव पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो, तो व्यक्ति परिवार के विरुद्ध जाकर प्रेम-विवाह की तरफ आकर्षित होता है।
  • जब पंचम भाव में राहु या केतु विराजमान हो, तो व्यक्ति प्रेम-प्रसंग को विवाह तक लेकर जाता है।
  • जब राहु या केतु की दृष्टि शुक्र या सप्तमेश पर पड़ रही हो, तो प्रेम-विवाह की संभावना प्रबल होती है।
  • पंचम भाव के मालिक के साथ उसी भाव में चंद्रमा या मंगल बैठे होंस तो प्रेम-विवाह हो सकता है।
  • सप्तम भाव के स्वामी के साथ मंगल या चन्द्रमा सप्तम भाव में हो, तो भी प्रेम-विवाह का योग बनता है।
  • पंचम व सप्तम भाव के मालिक या सप्तम या नवम भाव के स्वामी एक-दूसरे के साथ विराजमान हों, तो प्रेम-विवाह का योग बनता है।
  • जब सातवें भाव का स्वामी सातवें में हो, तब भी प्रेम-विवाह हो सकता है।
  • शुक्र या चन्द्रमा लग्न से पंचम या नवम हों, तो प्रेम विवाह कराते हैं।
  • लग्न व पंचम के स्वामी या लग्न व नवम के स्वामी या तो एकसाथ बैठे हों, या एक-दूसरे को देख रहे हों, तो यह प्रेम-विवाह का योग बनाते हैं ।
  • सप्तम भाव में यदि शनि या केतु विराजमान हों, तो प्रेम-विवाह की संभावना बढ़ती है।
  • जब सातवें भाव के स्वामी यानी सप्तमेश की दृष्टि द्वादश पर हो या सप्तमेश की युति शुक्र के साथ द्वादश भाव में हो, तो प्रेम-विवाह की उम्मीद बढ़ती है।
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24 Oct, 2018 Blog

Aise Janiye Kaise Hai Apka Swabhav / ऐसे जानिए कैसा है आपका स्वभाव

https://youtu.be/kJx9kguEdII

ऐसे जानिए कैसा है आपका स्वभाव?

ज्योतिषशास्त्र कहता है कि हम भले ही मनुष्य योनि में जन्म लें लेकिन जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता है हम पर उस नक्षत्र की योनि का प्रभाव पड़ता है। नक्षत्र की योनि के प्रभाव से हमारा स्वभाव, व्यवहार और व्यक्तित्व भी प्रभावित होता है।

योनियाँ चौदह प्रकार की होती है और दो नक्षत्रों को एक योनि के अन्तर्गत रखा गया है.
नक्षत्र के आधार पर योनियों का वर्गीकरण

योनि            नक्षत्र
अश्व             अश्विनी, शतभिष
गज              भरणी, रेवती
मेष               पुष्य, कृतिका
सर्प               रोहिणी, मृ्गशिरा
श्वान             मूल, आर्द्रा
मार्जार           आश्लेषा, पुनर्वसु
मूषक             मघा, पूर्वाफाल्गुनी
गौ                  उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराभाद्रपद
महिष             स्वाती, हस्त
व्याघ्र             विशाखा, चित्रा
मृग                ज्येष्ठा, अनुराधा
वानर             पूर्वाषाढ़ा, श्रवण
नकुल             उत्तराषाढ़ा, अभिजीत
सिंह               पूर्वाभाद्रपद, धनिष्ठा

आइये देखते हैं कि किस योनि में व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व कैसा होता है।

अश्व योनि:

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म अश्व योनि में होता है वह व्यक्ति स्वेच्छाचारी अर्थात अपने मन के अनुसार चलने वाला होता है। यह व्यक्ति किसी और का कहा नहीं मानता है, जो भी इनका मन कहता है वे उसी को मानते हैं। इस योनि में जन्म लेने वाले व्यक्ति बहुत ही गुणी होते हैं। ये काफी बहादुर और हिम्मत वाले होते हैं। ये प्रभावशाली और ओजस्वी होते हैं, ये अपने आस-पास के लोगों पर अपना प्रभाव कायम करने में सफल होते हैं। इनका यश दूर दूर तक फैलता है और ये सम्मान प्राप्त करते हैं। इनकी आवाज़ में घरघराहट रहती है।

गज योनि:

जो व्यक्ति गज योनि में जन्म लेते हैं वे बहुत ही बलवान व शक्तिशाली होते हैं। इस योनि के जातक बहुत ही उत्साही होते हैं। ये हर प्रकार का सांसारिक सुख प्राप्त करते हैं। बड़े-बड़े लोगों एवं प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान एवं आदर प्राप्त होता है।

गौ योनि:

ज्योतिषशास्त्र के नियमों के अनुसार जिन लोगों का जन्म गौ योनि में होता है वे सदा उत्साहित और आशावादी रहते हैं। ये किसी बात से निराश नहीं होते हैं और सदैव भविष्य की ओर देखते हैं। ये मेहनती होते हैं और परिश्रम से पीछे नहीं हटते हैं। इस योनि के जातक बातों में निपुण होते हें, अपनी बातों से ये लोगों का दिल जीतना खूब जानते हैं। ये व्यक्ति स्त्रियों को प्रिय होते हैं यानी स्त्रियां इनकी ओर आर्किषत रहती हैं। इस आयु के जातक की आयु कम रहती है।

सर्प योनी:

जवाब: ज्योतिष मतानुसर जो व्यक्ति सर्प योनि में जन्म लेता है वह व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का होता है। इन्हें बहुत अधिक क्रोध और गुस्सा आता है, क्रोध आने पर उसे नियंत्रित कर पाना इनके लिए कठिन होता है। इस योनि के जातक का स्वभाव रूखा होता है, इनमें दया और ममता की कमी होती है। इनका मन अस्थिर और चंचल होता है, ये किसी विषय में अधिक गम्भीरता से नहीं सोच पाते। ये अच्छे -अच्छे खाने और व्यंजन के शौकीन होते हैं। ये किसी के उपकार को नहीं मानते हैं।

श्वान योनि:

श्वान योनि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है। वह व्यक्ति बहुत बहादुर और साहसी होता है। इस योनि के जातक उत्साही और जोश से भरे होते हैं। ये मेहनती और परिश्रमी होते हैं। ये अपने माता-पिता की खूब सेवा करते हैं, उन्हें भगवान की तरह आदर देते हैं। दोस्तों एवं अड़ोस-पड़ोस के लोगों की पूरी पूरी सहायता करने वाला होता है। इनमें एक प्रमुख कमी यह होती है कि ये अपने भाई बंधुओं से छोटी-छोटी बात पर लड़ पड़ते हैं।

मार्जार योनि:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मार्जार यानि में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही बहादुर और हिम्मत वाला होता है। ये निडर होते हैं और किसी भी हाल में डरते नहीं हैं। इनका स्वभाव बहुत अच्छा नहीं रहता है ये लोगों के प्रति दुष्टता का भाव रखते हैं। ये सभी प्रकार के कार्य करने में सक्षम होते हैं तथा मिठाईयों के शौकीन होते हैं।

मेष योनि:

जिनका जन्म मेष योनि में होता है वे युद्ध के मैदान में अपने पराक्रम को दिखाते हैं। ये पराक्रमी और महान योद्धा होते हैं। इनमें उत्साह भरा होता है, ये धन-दौलत से परिपूर्ण ऐश्वर्यशाली, भोगी तथा दूसरों पर उपकार करने वाला होता है। इस योनि का जातक मेहनती होता है।

मूषक योनि:

जिन व्यक्तियों का जन्म मूषक योनि मे होता है वे काफी बुद्धिमान और चतुर होते हैं। ये अपने काम में तत्पर और सजग रहते है। ये जो भी कदम उठाते हैं उसमें काफी सोच विचार कर और समझदारी से आगे बढ़ते हैं। ये आसानी से किसी पर विश्वास नहीं करते, और सदैव सचेत रहते हैं इनके पास काफी धन होता है।

सिंह योनि:

इस योनि में जन्म लेने वाला जातक धर्म का आचरण करने वाला धर्मात्मा होता है। इनमें स्वाभिमान भरा होता है। ये गुणवान होते हें। इनका आचरण व व्यवहार नेक और सरल होता है। ये अपने निश्चय यानी इरादों के पक्के होते हैं। इनमें साहस और हिम्मत कूट-कूट कर भरा होता है। ये अपने कुटुम्ब एवं परिवार वालों का पूरा-पूरा ख्याल रखते हैं।

महिष योनि:

महिष यानी भैंस योनि में जन्म लेने वाले व्यक्ति कुछ मंद बुद्धि के अर्थात कम बुद्धि वाले होते है। मार पीट एवं युद्ध में इन्हें सफलता मिलती है ये काम के प्रति बहुत अधिक उत्साही होते हैं। इन्हें कई संतानों का ख्याल रखना पड़ता है अर्थात इनके कई बच्चे होते हें। इन् वात रोग का सामना करना होताह है।

व्याघ्र योनि :

व्याघ्र योनि में जन्म लेने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के काम में कुशल होता है। ये किसी के अधीन रह कर काम करना पसंद नहीं करते हैं, ये स्वतंत्र रूप से काम करके धन अर्जन करने वाले होते हैं। इस योनि के जातक अपने मुंह मियां मिट्ठू होते हैं यानी अपनी तारीफ अपने मुंह से करने वाले होते हैं। ये अपने आपको बढ़ा चढ़ा कर बताने वाले होते हैं।

मृग योनि:

ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार जो व्यक्ति मृग योनि में जन्म लेते हैं वे कोमल हृदय के व्यक्ति होते हैं। इनका व्यवहार नम्र और प्रेमपूर्ण होता है। ये शान्त मन के व्यक्ति होते हैं। सच्चे विचारों के और सत्य बोलने वाले होते हैं। ये धर्म कर्म मे आस्था रखने वाले होते हैं। ये अपने भाई बंधुओं से प्रेम करते हैं। ये स्वतंत्र विचारों के होते हैं और लड़ाई-झगड़े दूर रहने वाले होते हैं।

वानर योनि:  

जिस व्यक्ति का जन्म वानर योनि में होता है वह चंचल स्वभाव का होता हैचंचल। ये बात बात पर लड़ाई करने हेतु तत्पर हो जाते हैं। ये काफी बहादुर और हिम्मत वाले होते हैं। इनमें काम के प्रति काफी उत्तेजना रहती है। इन्हें मीठा काफी पसंद होता है। ये अधिक से अधिक धन प्राप्त करने की चाहत रखते हैं। इनका घर संतान की किलकारियों से गूंजता रहता है।

नकुल योनि:

जिन व्यक्तियों का जन्म नकुल योनि में होता है वे हर काम में पारंगत होते हैं। ये किसी भी काम को कुशलता पूर्वक करने में सक्षम होते हैं। परोपकार में ये तन, मन, धन से जुटे रहते हैं। ये विद्या के धनी विद्वान होते हैं तथा माता पिता की सेवा एवं भक्ति हृदय से करते हैं।
 

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24 Oct, 2018 Blog

Mantra Yog Kya Hai / मंत्र योग क्या है ?

https://youtu.be/RC6IU3viBa0

मंत्र योग क्या है?

मंत्र योग यानी कि मंत्र के साथ योग शब्द जोड़ना यह एक आश्चर्य भी है । अष्टांग योग में वर्णन है बिना मंत्र से योग नहीं होता और बिना योग से मंत्र सिद्धि नहीं होती।  एक के विचार गत है कि नामरूपात्मक विषय जीव को बंधन युक्त करते हैं और इसी नामरूपात्मक प्रकृति वैभव से जीव अविद्याग्रस्त हुए रहते हैं । अतः अपनी अपनी सूक्ष्म प्रकृति और प्रवृत्ति की गति के अनुसार नाममय शब्दब्रह्म तथा भावमय में रूप के अवलंबन से जो योग साधना की जाती है उसे मंत्र योग कहते हैं।

मंत्र शब्द का भावार्थ है-

मननात् त्रायते यस्मात्तस्मान्मन्त्रः प्रकीत्तितः। 

अर्थात जिस शब्दको मनन करने पर अपना रक्षण होता है उस शब्द को मंत्र भी कहते हैं। इंद्रियों के विषयों की और लक्ष्य हटाकर मन को एकाग्र कर मंत्र साधना करने से मंत्र की सिद्धि होती  है। मन की चंचलता जितनी जल्दी हटेगी उतनी ही जल्दी मंत्र सिद्धि होगा । मंत्र विद्या योग का उच्च कोटि विषय है । योग का भावार्थ है जुड़ना । जीव को परमात्मा के और जोड़ना ही योग कहलाता है । और मन के तार में मंत्र शब्द का घर्षण होने  से एक दिव्य ज्योति प्रकट होती है । वर्णों के समुदाय का नाम मंत्र है इसलिए विद्वानों ने मंत्र शब्द का अर्थ भी विचार को ही लिया है। और राजनीति शास्त्र में भी लिखा गया है जिन विचार को गुप्त रूप में रखकर राज्य का तंत्र चलाया जाता है उन विचारों को मंत्र कहते हैं। और उसे धारण करने वाला व्यक्ति या संचालन करने वाला व्यक्ति मंत्री कहलाता है । साथ लेकर समूह को विचार प्रकट करते हुए चिंतन करने वाले गोष्ठी को मंत्रिमंडल कहते हैं। आजकल जो मंत्री का शब्द नेता को ले लिया जाता है वह सही नहीं है। मंत्री वह है जो मन में गुप्त विचार द्वारा राज्य तंत्र चलाने का जो क्रिया करता है उस क्रिया को धारण करने वाला व्यक्ति ही मंत्री कहलाता है। मन की शुद्धि पर मंत्र शास्त्र की नीव है ।जब तक मनुष्य विषय की लालसा रहती है तब तक बुद्धि निश्चयात्मिका नहीं रहती। मन तल्लीन नहीं रहता है। वह विषय वासना से अशुद्ध रहता है। इसलिए कहा गया कि किसी कार्य की सिद्धि करना हो तो वासना रहित होकर कार्य में तल्लीन हो जाए तब मंत्र की सिद्धि प्राप्त होती है।  इंद्रियों के विषयों की और लक्ष्य हटाकर मन को एकाग्र कर मंत्र साधना करने से मंत्र की सिद्धि होती है ।   मन और मंत्र का संयोग है ना क्रिया को जप कहते हैं ।जब तक मन और मंत्र का सहयोग नहीं रहता तब तक उस मंत्र का जप करने का कोई फल प्राप्त नहीं होता है ठीक इसी प्रकार मंत्र और योग का जब तक संयोग नहीं रहता तब तक मंत्रयोग का कोई भी लाभ प्राप्त नहीं होता है ।मंत्र योग को मन के माध्यम से जीव और परमात्मा का संयोग होना यह साधक के लिए अति उत्तम है । मंत्र साधक के लिए कार्य की ओर ही लक्ष्य रहने से मंत्र का सिद्धि नहीं होती क्योंकि बार-बार उसी कार्य का स्मरण होता है जिससे एकाग्रता भंग हो जाते हैं ।मंत्र सिद्धि संकल्प लेकर नहीं कर सकते निष्कामना के साथ विषय से हटकर तल्लीन हो कर उन शब्दों का बार-बार स्मरण करने से अवश्यमेव शीघ्र सिद्धि प्राप्त होगी। मंत्र भी बहुत प्रकार है कोई नाम मंत्र है कोई बीज मंत्र है कोई अक्षर मंत्र है इसी प्रकार मंत्र अनेक है पर मंत्र का क्रिया मन से होने के कारण मंत्र सिद्धि शीघ्र में प्राप्त होता है मंत्र मकार से मनन त्र कार से रक्षण होने से इसी को मंत्र कहते हैं।

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24 Oct, 2018 Blog

Guru Ka Vrishchik Me Gochar In Rashiyon Ko Hoga Labh / गुरु का वृश्चिक में गोचर इन राशियों को होगा लाभ

https://youtu.be/000gvEIoMyo

गुरु का वृश्चिक में गोचर इन राशियों को होगा लाभ

अपनी परम शुभता के लिए जाने जाना वाला बृहस्पति दिनांक 11 अक्टूबर 2018 की शाम 7 बजकर 16 मिनट पर वृश्चिक राशि (मंगल के घर) में  प्रवेश कर चुके हैं। बृहस्पति के राशि परिवर्तन के समय चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में था, जो कि बृहस्पति का नक्षत्र है। तात्पर्य यह है कि आगम काल से ही गुरु बलवती अवस्था मे होंगे। फलस्वरूप वे जातकगण जिनका बृहस्पति योगकारी है, वे जीवन के सभी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति प्राप्त करेंगे।

मेष -

आपकी राशि से गुरु का गोचर अष्टम है । जो बहुत ही खराब फल देने के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार गुरु रजत पाद से प्रवेश कर रहा है। जिसके कारण आपको प्रारंभिक संघर्ष देगा तथा आर्थिक स्थिति को भी खराब करेगा परंतु रजत पाद से आगमन के कारण उत्तरार्ध समान्य होगा। 
नकारात्मकता को न्यून बनाने हेतु नियमित रूप से 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का 108 बार जप अवश्य करे।

वृष -

आपकी राशि से सप्तम बृहस्पति का गोचर स्वर्ण पाद से हो रहा है, जिसके कारण आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। नौकरी व व्यवसाय की दिशा में चतुर्दिक सफलता प्रदान कराएगा। यह याद रखे कि आप की शनि की ढैय्या चल रही है। अतः शनि की सावधानी अवश्य रखें। विदेश से जुड़े कार्यो को करने में बहुत सावधानी रखें। संभव हो सके तो बचने की कोशिश करें।

मिथुन -

आप की राशि से छठे भाव मे गुरु का गोचर आपके लिए बहुत शुभकर नहीं कहा जायेगा। रोग, शत्रु, से परेशानी के साथ साथ जातक के चलते हुए कार्यो में अचानक अवरोध का सामना करना पड़ सकता है। वे जातक जिन्हें पाचन से संबंधित समस्या है, उन्हें विशेष सावधान रहना चाहिए। यद्यपि राशि से छठे गुरु का गमन ताम्र पाद से हो रहा है जो कि धनदायी माना जाता है। लेकिन यह फल तभी प्राप्त होगा जब आप कार्य को बहुत सावधानी से करेंगे। नियमित रुप से राम रक्षा स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होगा।

कर्क -

बृहस्पति का पंचम भाव का गोचर, मिश्रित फल प्रदान करने वाला कहा जायेगा। यह मन में अंतर्द्वंद्व पैदा कर जातक को भटकाने का प्रयास करता है। फलतः जातक कभी कभी किसी भी कीमत पर सफलता प्राप्त करने की तरफ बढ़ने का प्रयास करता है, परंतु सफल नही होता। संतान पक्ष से थोड़ी चिंता मिल सकती है। अच्छी सफलता हेतु नियमित रूप से विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।

सिंह -

आपकी राशि से गुरु का गोचर चतुर्थ होगा जो कि मिश्रित फल प्रदान करने वाला कहा जायेगा। आपको अपनी वर्तमान स्थिति को बनाये रखने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा। भूमि, भवन से संबंधित कार्य मे बहुत सावधानी रखें, अन्यथा विवाद की स्थिति पैदा होसकती है। माताजी व पत्नी का स्वास्थ्य भी चिंता पैदा कर सकता है। स्थिति को सामान्य बनाने हेतु प्रत्येक बृहस्पतिवार को पीला चावल छू कर दान अवश्य करें।

कन्या -

11 अक्टूबर से लगभग 13 माह तक गुरु आपकी राशि से तृतीय भाव में गोचर करेगा। गुरु का यह गोचर निश्चित रूप से आपके संघर्ष को बढ़ाएगा, परंतु संघर्ष के बाद आप के आशा से अधिक सफलता प्रदान करेगा। ताम्र पद से बृहस्पति का आगमन आपके लिए आर्थिक विकास का मार्ग खोलेगा। भाई व बहन से रिश्तों में थोड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। उन जातकों को जिनका जन्मकालिक तृतीयेश दुर्बल हैं, उन्हें थायरॉइड अथवा गले से संबंधित अन्य रोग दे सकता है। इससे बचाव हेतु नियमित मृत्युंजय मंत्र का जप अवश्य करें।

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24 Oct, 2018 Blog

Is Mantra Se Budhiman Banega Apka Baccha / इस मंत्र से बुद्धिमान बनेगा आपका बच्चा

https://youtu.be/MnyGV-89Fsg

इस मंत्र से बुद्धिमान बनेगा आपका बच्चा

बुद्धिमता हर कोई चाहता है। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद किसी बच्चे की बुद्धिमता दूसरों से कम ही रह जाती है.. ऐसे में एक मंत्र है जो सहायक सिद्ध हो सकता है... इस मंत्र को दिन में तीन बार पूरी श्रद्धा और विशवास के साथ कम से कम 6 महीने लगा तार जपा जाए... तो जपने वाले इंसान की बुद्धि का अत्यंत विकास होता है। 

मन्त्र:-

 || ॐअरपचन धीम स्वाहा ||

विधि:इस मंत्र को दिन में 3 बार जप करना चाहिए इस मंत्र के जप का समय निर्धारित है और इसमें बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।इस मंत्र को तीनों संध्याओं के समय जपा जाना चाहिए। 
ग्राफिक्स
पहली संध्या यानि सूर्योदय से पहले जिस समय थोडा दिन और थोड़ी रात हो। 
दूसरी संध्या यानि दोपहर 12 बजे। 
और तीसरी संध्या यानि सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले।

स्नान करके साफ़ कपड़े डालकर एक लाल रंग के कम्बल पर पूर्व दिशा की और मुख करके बैठ जाएँ।रुद्राक्ष की माला लें और ये मंत्र 108 बार पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ जपें। एक समय में 108 बार जपना है। तीनों संध्याओं के समय नहाने कीज़रूरत नहीं है लेकिन सुबह ज़रूर नहाएं।   

नोट: 

अगर यह मंत्र आप किसी और के लिए जप रहे हैं तो पहले मन में संकल्प लीजिए कि इस मंत्र का पूरा लाभ उस व्यक्ति को मिले...
 

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24 Oct, 2018 Blog

Vivah Me Ho Rahi Ho Deri To Janch Le Ghar Ka Ye Vastu / विवाह में हो रही देरी तो जांच लें घर का ये वास्तु

https://youtu.be/_dm1r-OPFs8

विवाह में हो रही देरी तो जांच लें घर का ये वास्तु

क्यों होती है विवाह में देरी ,क्या घर का वास्तु  भी हो सकता है इसकी वजह ?
बता रही है महावास्तु एक्सपर्ट बबिता चौधरी

विवाह में विलंब के कई प्रमुख कारण हो सकते है उनमें से एक मुख्य कारण वास्तु भी होता है , घर का वास्तु सन्तुलित ना होने की वजह से भी व्यक्ति को विवाह नहीं होने या विलंब विवाह की परेशानी आती है ।।

लड़के/लड़की की शादी  के लिए   कोई भी परेशानी 16 दिशाओं में से कुछ दिशाओं के असन्तुलित हो जाने की वजह से होती है।लड़कों को अलग और लड़कियों को अलग दिशाओं के असंतुलन की वजह से विवाह में परेशानी होती है ।

लड़कों के विवाह विलंब की मुख्य दिशाएं
उत्तर दिशा
उत्तर पूर्व दिशा
दक्षिण दक्षिण पूर्व दिशा
दक्षिण पश्चिम दिशा और
उत्तर पश्चिम दिशा

लड़कियों के लिए मुख्य रूप से जिन दिशाओ के असंतुलन की वजह से ये परेशानी आती है वो है

उत्तर दिशा
पूर्व उत्तर पूर्व
पूर्व
दक्षिण पूर्व
दक्षिण पश्चिम
पश्चिम  और
उत्तर पश्चिम 

व्यक्ति के घर में जब इन दिशाओं में इनके विपरीत दिशाओं का सामान ,रंग ,वास्तु, आ जाएगी या इनमें से किसी भी दिशा के विपरीत दिशा से सम्बंधित कार्य जब होने लगते है तब ये परेशानी जीवन में आती हैं।कई बार जब आप परेशानी के निवारण के लिए ज्योतिषी के पास जाते है तो वो आपकी पत्री देख कर यही तो बोलते है कि अभी तक तो शादी हो जानी चाहिए थी

इसका मतलब ये होता है कि आपको आपके भाग्य का लिखा हुआ भी आपको तब तक नहीं मिलता जब तक आपके निवास स्थान का वास्तु संतुलित नहीं होता है  ।,

उदाहरण के लिए :-

अगर दक्षिण दिशा में जो की अग्नि की दिशा है वहां आपने उत्तर दिशा से सम्बंधित रंग घर में करा दिया या वहां पानी का नल या टैंक लगवा दिया तो आपने  दक्षिण दिशा की अग्नि को कमजोर कर दिया जिसकी वजह से शुभ कार्यो में देरी होने लगती है  ।
एक सुखी जीवन जीने के लिए मनुष्य को अपने भवन का वास्तु संतुलित रखना अनिवार्य है ।
 

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24 Oct, 2018 Blog

Is Upay Se Hogi Lakshmi Maa Ki Kripa / इस उपाय से होगी लक्ष्मी मा की कृपा

https://youtu.be/CP-KsdopN4I

इस उपाय से होगी लक्ष्मी मा की कृपा

दीपावली की पूजा सामान्य जन में सुख -समृद्धि और धन के लिए होती है ।सभी पूजा करके सीधे धन चाहते हैं ,सभी चाहते हैं लक्ष्मी उनके घर आ जाएं और बैठ जाएं ।दुनियाभर के सुख और समृद्धि उन्हें मिल जाए ।इसके लिए दीपावली पर गणेश लक्ष्मी लाकर पूजा करते हैं ।परिणाम कुछ संदिग्ध होता है ,जिसको आने वाले साल कुछ लाभ हुआ वह गणेश ,लक्ष्मी की कृपा मान लिया ,जिसे नहीं हुआ अपने भाग्य को दोष दे लिया कि  जब भाग्य में ही नहीं तो लक्ष्मी गणेश कहां से दे देंगे ।

लक्ष्मी मां मिलने के कारण

कभी कभी लम्बे अनुष्ठान और यहां तक की साधना का भी कोई परिणाम नहीं मिलता ।इसमें एक कारण तो यह है कि कुछ भी कर लो मिलेगा उतना ही जितना भाग्य में होगा ।दूसरा कारण यह की भाग्य का भी पूरा किसी को नहीं मिलता ।सब कोशिश धन के लिए करते हैं जबकि मिलता भाग्य जितना भी नहीं क्योंकि भाग्य ही धन को रोका जाता है ।नकारात्मक शक्तियों द्वारा ,फिर कितने भी उपाय करो धन के लिए नहीं मिलेगा।तीसरा कारण होता है की सभी सीधे लक्ष्मी को ही बुलाते हैं कोई उनके आने का मार्ग नहीं प्रशस्त करने पर ध्यान देता है |इनके आने में ही बाधा होती है और अगर नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति आपके आसपास है तो आ रही लक्ष्मी भी लौट जाती है |

लक्ष्मी पाने के उपाय 

सबसे पहले उपाय नकारात्मक शक्तियों के लिए उपाय करें ताकि भाग्य का पूरा मिले।लक्ष्मी के पीछे भागने का कोई फायदा नहीं वो आएगी तब ना जब ये नकारात्मक शक्तियां आने देंगी और रुकावट नहीं बनेंगी ।उनका मार्ग साफ़ करना जरूरी है जिससे आपके भाग्य में उनकी जितनी मात्रा है वह आ सके ।रास्ता दीजिए वह तो खुद आ जायेगी ,सीधे बुलाइये नहीं उन्हें लाने का प्रयास कीजिए ।पूजने से वह नहीं आएगी प्रयास करने और रास्ता बनाने से वह आएगी ।
बिन नकारात्मक प्रभाव हटाए लक्ष्मी नहीं आ सकती क्योंकि लक्ष्मी एक सात्विक शक्ति हैं जो नकारात्मकता नहीं हटाती ,यह तब आती हैं जब कोई अवरोध न हो।आप नकारात्मकता से घिरे हैं ,मन मलिन है ,स्वास्थ्य सही नहीं है ,शारीरिक असंतुलन है ,विचार सही नहीं अथवा एकाग्र नहीं ,प्रयास कोई भी पूरा नहीं कर पाते ,कोई कार्य ठीक से नहीं होता।घर में कलह है ,न ठीक से निर्णय कर पाते हैं न प्रयास ,हर कार्य में अड़चन आ जाती है ,बनते काम बिगड़ जाते हैं । अब न आपका प्रयास सही होगा और न लक्ष्मी को साफ़ रास्ता ही मिलेगा |
इसलिए उपाय जरूर कीजिये पर अंधेरे को ,नकारात्मकता को ,बाधाओं को हटाने  ,रास्ता साफ कीजिये लक्ष्मी के आने का।
भयानक अंधेरी रात को दीपक से खुद के लिए राह करने का पर्व है दीपावली ।जगमग तो तब होगा जब कर्म करके ,नकारात्मकता हटाके इसे प्रकाशित करेंगे। कोशिश कीजिए अपने अंदर और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का ।लक्ष्मी आपके भाग्यानुसार खुद आ जायेगी ।

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24 Oct, 2018 Blog

Diwali Pujan Ke Subh Lagn Aur Mahurat / दीपावली पूजन के शुभ लग्न और मुहूर्त

https://youtu.be/C1J4U55hm9k

दीपावली पूजन के शुभ  लग्न और मुहूर्त

श्री  गणेश लक्ष्मीन्द्र प्रभु ,रिद्धि-सिद्धि दातार।
आन विराजो काज मह, कर दो मम उद्धार।।

7 नवंबर 2018 कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या बुधवार में श्री महालक्ष्मी जी की पूजन (दीपावली) माननीय रहेगा । इस महापर्व का सूक्ष्म गणित अनुसार इस वर्ष अमावस्या तिथि रात्रि 9:31 तक रहेगी। लक्ष्मी पूजन के लिए अति उत्तम मानी जाएगी । स्वाति नक्षत्र सायं 7:36 तक रहेगा आयुष्मान योग सायं 5:57 तक उसके बाद सौभाग्य योग बनेगा । बुधवार में स्वाति नक्षत्र का संयोग होने से धूम्रयोग बनता है जो इस पूजन के लिए मध्यम रहेगा। स्वाति नक्षत्र चर चल सज्ञक होने के कारण उद्योगधंधे, दुकानदार, व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ है । दीपावली लक्ष्मी जी की उत्पत्ति होने से सभी तरह के कामना पूर्ति अत्यंत शुभ मानी गई है।

दीपावली पूजन दिन में कुछ लग्न मुहूर्त का विचार

दीपावली कि दिन में 7 नवंबर को कुछ लग्न विचार आवश्यक है । कुछ व्यापारी अपने उद्योग धंधे व्यवसाय प्रतिष्ठान आदि में लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न  को श्रेष्ठ मानते हैं धनु लग्न का स्वामी बृहस्पति है बृहस्पति सबकी सफलता में सहायक रहता है । परंतु धनु लग्न दीपावली दिन बुधवार में 9:37 पर शुरू होगी और 9:20 के बाद लाभ तथा अमृत की दो चौघड़िया मुहूर्त भी संयोग शुभ फलदायक रहेंगे। अतः धनु लग्न और लाभ +अमृत की चौघड़िया श्रेष्ठकर है। धनु लग्न में शनि बढ़ोत्तरी में सहायक बनेगा। किसी भी धंधेवाले अपने प्रतिष्ठान में धनु लग्न पर पूजन करा सकते हैं । इसी लग्न को स्वीकार कर लेना व्यापारी के लिए उत्तम है।
मकर लग्न 11:41 में शुरू होगी किंतु मकर लग्न में केतु का संयोग  और काल की चौघड़िया के कारण मुहूर्त श्रेष्ठ नहीं है ।11:40 से 12:20 तक अभिजीत मुहूर्त आता है परंतु बुधवार युक्त अभिजीत मुहूर्त श्रेष्ठ नहीं मानी जाती है ।अतः मकर लग्न में लक्ष्मी पूजन ना किया जाए  तो सही है ।
कुंभ लगना दीपावली के दिन बुधवार में 13:25 से 14:54 बजे तक मध्य में रहेगी दिन में 13:25 से 14:00 47 बजे तक उद्वेग का चौघड़िया मुहूर्त रहेगा जिसके स्वामी रवि श्रेष्ठ फल दायक है ।लग्न अपने स्वामी से दुष्टों होने के कारण बलवान कही जाएगी अतः श्री गणेश लक्ष्मी त्रिदेव परम शक्ति नवग्रह कुबेर रिद्धि सिद्धि सहित बही खाता कलमदान पूजन करने तथा  करानेवालों के लिए लाभप्रद रहेंगे।
मीन लग्न बुधवार में 14:55 से 16:22 तक रहेगी इसी लग्न में श्रेष्ठ मुहूर्त चर का चौघड़िया 16:08 तक रहेगा  ।उपरांत लाभ का चौघड़िया प्रारंभ हो जाएगा ।श्रेष्ठ लग्न मुहूर्त में आप अपने व्यवसाय उद्योग संबंधी पूजा अर्चन करा कर लाभ की भागीदारी बन सकते हैं। लग्न अपने स्वामी से दुष्ट है भाग्य स्थान में सुखेश तथा बुध की स्थिति इस साल मध्य   पर्यंत पर्याप्त उन्नति के भागीदार बनेंगे। मेष  लग्न लक्ष्मी पूजन  के दिन सायं काल 16:21 से 17: 57 मिनट तक रहेगी मेष लग्न सूर्य शुक्र चंद्र से प्रभावित है। और तत्काल लग्नेश भोम का लाभ स्थान में बली हो कर बैठना अत्यंत सुख दायक है। इसी लग्न  में  गोधूलि का संयोग हो रहा है। प्रदोष के उत्तम समय का समागम असफलता के मध्य में सफलतादायक  कहा गया है। धेनु वेला लगन सकल सुमंगल मूल अर्थात प्रदोष बेला के साथ साथ गोधूलि का संयोग अत्यंत शुभ मंगल है। इसी समय में सभी व्यापारी गण अपने प्रतिष्ठान में गणेश लक्ष्मी रिद्धि सिद्धि कुबेर आदि सभी देवताओं का पूजा अर्चन कराएं और बहीखाता कलमदान रोकड़ा पूजन आधुनिक उपकरण तथा मशीनरी से संबंधित पूजन विधि यही समय श्रेष्ठ है। पूजन के बाद अपने कर्मचारियों को भेंट आदि भी देना यह समय अत्यंत लाभप्रद है। यह थी दिन की दीपावली पूजन का मुहूर्त ।

दीपावली पूजन और रात्रि के लग्न विचार

वृष लग्न   दीपावली के दिन 7 नवंबर 2018 को रात्रि मुहूर्त काल में सायं 17:58 बजे प्रदोष के समय शुरू होकर 19:55 बजे तक रहेगी। वृष लग्न पर बुध और बृहस्पति की सप्तम दृष्टि तथा मंगल की चौथी दृष्टि के कारण  भौतिक विकास में सहायक मानी जाती है। रात्रि बेला में उद्वेग, शुभ, अमृत और चर के चौघड़िया मुहूर्त 24:30 तक शुभ फलदायक रहेंगे । प्रदोष के समय में उद्वेग के चौघड़िया की व्याप्ति मनोकामना पूर्ति में सहायक बनेगी। लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल को पूर्व आचार्य ने श्रेष्ठ माना है ।अतः प्रदोष में दीपावली का पूजन करना श्रेष्ठ है । प्रदोष के अधिपति आशुतोष भगवान शंकर जी सभी की समृद्धि प्रदान करेंगे
मिथुन लग्न दीपावली की रात्रि बेला में 19:55 प्रारंभ होकर 22:10 तक समाप्त होगी इस समय शुभ और अमृत के दो चौघड़िया मुहूर्त  व्यतीत होंगे जो कि सभी तरह के व्यापार करने वालों के लिए शुभ फल रहेगा। लग्न पर शनि का सीधा प्रभाव है जो उद्योग संचालन को सहायक कहा जाता है । इसी समय में किसी अच्छे आचार्य द्वारा महालक्ष्मी का पूजन करें
कर्क लग्न दीपावली की रात्रि में 22:10 से 24:27 तक रहेगी निशीथ काल में कर्क लग्न अत्यंत सुखद मानी जाती है । शुभ समय में पूजन करने वाले तथा कराने वालों को लाभप्रद होता है। इस वर्ष 23:44से निशीथ काल आ जाएगा निशीथ काल में विशेष पूजन किया जाता है निशीथ काल में समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी जी के प्रादुर्भाव हुआ था। इसलिए इसी समय को सभी वेद आचार्य ने श्रेष्ठ माने हैं ।इसी समय में महालक्ष्मी पूजन अवश्य ही करना चाहिए श्री सूक्त द्वारा षोडशोपचार पूजन करके लक्ष्मी जी को अनेक द्रव्य का समर्पण करेंगे और मूर्ति तथा यंत्र में लक्ष्मी की श्री बीज मंत्र प्रयोग करके श्री महालक्ष्मी जी की विशेष कृपा फल प्राप्त कर सकते हैं। इसी समय में सभी तंत्र क्रिया भी किए जाते हैं सभी यंत्र का सिद्धि करने का मुहूर्त भी है और श्री प्राप्ति हेतु श्री सूक्त का 108 बार पाठ किया जाता है ।

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