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21 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Kundali Ke Sat Yog Jo Barbad Kar Sakte He Jeevan / कुंडली के सात योग,जो बर्बाद कर सकते हैं जीवन

https://youtu.be/4YiF0BKKoZo

कुंडली के सात योग,जो बर्बाद कर सकते हैं जीवन

जन्मकुंडली में शुभ और अशुभ दोनों तरह के योग होते हैं। यदि शुभ योगों की संख्या अधिक है तो साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी धनी,सुखी और पराक्रमी बनता है, लेकिन यदि अशुभ योग अधिक प्रबल हैं तो व्यक्ति लाख प्रयासों के बाद भी हमेशा संकटग्रस्त ही रहता है। कुंडली में शुभ ग्रहों पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि या शुभ ग्रहों से अधिक प्रबल अशुभ ग्रहों के होने से दुर्योगों का निर्माण होता है.आइये आज हम कुंडली के सात अशुभ योग-दोष के बारे में जानें और उनका प्रभाव कम करने के उपाय जानें

 

  • केमदु्रम योग-

इस योग का निर्माण चंद्र के कारण होता है। कुंडली में जब चंद्र द्वितीय या द्वादश भाव में हो और चंद्र के आगे और पीछे के भावों में कोई अपयश ग्रह न हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है। जिस कुंडली में यह योग होता है वह जीवनभर धन की कमी से जूझता रहता है।उसके जीवन में पल-प्रतिपल संकट आते रहते हैं, लेकिन व्यक्ति हौसले से उनका सामना करता रहता है।इस योग का प्रभाव कम करने के लिए गणेश और महालक्ष्मी की साधना करें। शुक्रवार को लाल गुलाब के पुष्प से महालक्ष्मी का पूजन करें।मिश्री का भोग लगाएं।चंद्र से संबंधित वस्तुएं दूध-दही का दान करें।

 

  • ग्रहण योग-

कुंडली के किसी भी भाव में चंद्र के साथ राहु या केतु बैठे हों तो ग्रहण योग बनता है। यदि इन ग्रह स्थिति में सूर्य भी जुड़ जाए तो व्यक्ति की मानसिक स्थिति अत्यंत खराब रहती है। उसका मस्तिष्क स्थिर नहीं रहता। कार्य में बार-बार बदलाव होता है। बार-बार नौकरी और शहर बदलना पड़ता है।कई बार देखा गया है कि ऐसे व्यक्ति को पागलपन के दौरे तक पड़ सकते हैं। ग्रहण योग का प्रभाव कम करने के लिए सूर्य और चंद्र की आराधना लाभ देती है। आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें।सूर्य को जल चढ़ाएं। शुक्ल पक्ष के चंद्रमा के नियमित दर्शन करें।

 

  • चांडाल योग-

कुंडली के किसी भी भाव में बृहस्पति के साथ राहु का उपस्थित होना चांडाल योग का निर्माण करता है। इसे गुरु चांडाल योग भी कहते हैं। इस योग का सर्वाधिक प्रभाव शिक्षा और धन पर होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में चांडाल योग होता है वह शिक्षा के क्षेत्र में असफल होता है और कर्ज में डूबा रहता है।चांडाल योग का प्रभाव प्रकृति और पर्यावरण पर भी पड़ता है।चांडाल योग की निवृत्ति के लिए गुरुवार को पीली दालों का दान किसी जरूरतमंद को करें। पीली मिठाई का भोग गणेशजी को लगाएं। स्वयं संभव हो तो गुरुवार का व्रत करें। एक समय भोजन करें और भोजन में पहली वस्तु बेसन की उपयोग करें।

 

  • कुज योग-

मंगल जब लग्न,चतुर्थ,सप्तम,अष्टम या द्वादश भाव में हो तो कुज योग बनता है। इसे मांगलिक दोष भी कहते हैं। जिस स्त्री या पुरुष की कुंडली में कुज दोष हो उनका वैवाहिक जीवन कष्टप्रद रहता है। इसीलिए विवाह से पूर्व भावी वर-वधु की कुंडली मिलाना आवश्यक है। यदि दोनों की कुंडली में मांगलिक दोष है तो ही विवाह किया जाना चाहिए।मंगलदोष की समाप्ति के लिए पीपल और वटवृक्ष में नियमित जल अर्पित करें। लाल तिकोना मूंगा तांबे में धारण करें। मंगल का जाप करवाएं या मंगलदोष निवारण पूजन करवाएं।

 

  • षड्यंत्र योग-

यदि लग्नेश आठवें घर में बैठा हो और उसके साथ कोई शुभ ग्रह न हो तो षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। यह योग अत्यंत खराब माना जाता है। जिस स्त्री-पुरुष की कुंडली में यह योग हो वह अपने किसी करीबी के षड्यंत्र का शिकार होता है। धोखे से उसका धन-संपत्ति छीनी जा सकती है। विपरीत लिंगी व्यक्ति इन्हें किसी मुसीबत में फंसा सकते हैं।इस दोष की निवृत्ति के लिए शिव परिवार का पूजन करें.सोमवार को शिवलिंग पर सफेद आंकड़े का पुष्प और सात बिल्व पत्र चढ़ाएं। शिवजी को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

 

  • भाव नाश योग-

जन्मकुंडली जब किसी भाव का स्वामी त्रिक स्थान यानी छठे,आठवें और 12वें भाव में बैठा हो तो उस भाव के सारे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।उदाहरण के लिए यदि धन स्थान की राशि मेष है और इसका स्वामी मंगल छठे,आठवें या 12वें भाव में हो तो धन स्थान के प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।जिस ग्रह को लेकर भावनाशक योग बन रहा है उससे संबंधित वार को हनुमानजी की पूजा करें।उस ग्रह से संबधित रत्न धारण करके भाव का प्रभाव बढ़ाया जा सकता है।

 

  • अल्पायु योग-

कुंडली में चंद्र पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थानों में बैठा हो या लग्नेश पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और वह शक्तिहीन हो तो अल्पायु योग का निर्माण होता है। जिस कुंडली में यह योग होता है उस व्यक्ति के जीवन पर हमेशा संकट मंडराता रहता है।उसकी आयु कम होती है।कुंडली में बने अल्पायु योग की निवृत्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज जपें। बुरे कार्यों से दूर रहें। दान-पुण्य करते रहें।

 

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21 Aug, 2018 Blog

Astromitram :Tulsi Ka Ye Rambaan Nushka Bhar Dega Apki Tijori / तुलसी का ये रामबाण नुस्खा भर देगा आपकी तिजोरी

https://youtu.be/bW-p8LeOfPs

तुलसी का ये रामबाण नुस्खा भर देगा आपकी तिजोरी

कष्‍टों से मुक्‍ति पाने के लिए शनिवार के दिन कर सकते हैं तुलसी के पत्तो का विशेष उपाय

पैसों का संकट होगा दूर

शास्त्रीनयनभाई जोशी ज्योतिषाचार्य के अनुसार यदि आपको पैसों का संकट है तो शनिवार के दिन तुलसी के पत्‍तों का सही प्रयोग आपके कष्‍ट को दूर कर सकता है। इससे पैसों से सम्बन्धित परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसके अलावा घर के लोगों के बीच हो रहे झगड़े, मन मुटाव और क्लेश भी दूर हो जाते हैं।

जाने तुलसी का ये उपाय

तुलसी के प्रयोग का ये एक रामबाण उपाय माना जाता है, और इसको करना भी बेहद आसान है। इस उपाय को करने से इसका असर तुरंत दिखता है, व इससे पैसों से सम्बन्धित परेशानियां दूर हो जाती है। सबसे पहले यदि आप शनिवार को गेंहू पिसवाने जायें तो जाते समय थोड़े से गेहूं में 100 ग्राम काले चने, 11 तुलसी के पत्ते और उसमे दो दाने केसर के मिला लें। अब इस सामग्री को बाकी गेहूं में मिला कर पिसवा ले। इस उपाय को करने के बाद ही आपको तुरंत इसका असर दिखने लगेगा।

अन्‍य लाभकारी उपाय

इसके साथ ही ये उपाय भी अत्‍यंत लाभदायक माने जाते हैं, जैसे शनिवार को काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से भी धन में वृद्धि होती है।  साथ ही शनिवार को पीपल के पेड़ में देसी घी का दीपक जलाने से भी मनोकामनायें पूरी होती हैं। इसके अतिरिक्‍त कहते हैं कि तुलसी के पौधे पर प्रतिदिन सुबह शाम दीपक जलाने से भी व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।                         

 

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Rakshabandhan Ka Shubh Muhurt / रक्षाबंधन का शुभ मुहुर्त

https://youtu.be/3pK62OG0HlQ

रक्षाबंधन का शुभ मुहुर्त

इस बार रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, राखी बांधने के लिए यह है सबसे अच्छा मुहूर्त।

बहने अपने प्रेम और स्नेह का प्रतीक ये रक्षा सूत्र यदि कुछ नियमों का पालन करते हुए भाईयों की कलाई पर बांधे तो अवश्य ही पूरे साल बुरी नजर से भाई की रक्षा होगी और परिवार में सुख-समृद्धि आएगी ।

 

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और समर्पण का प्रतीक है। हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। इस बार 26 अगस्त 2018  रविवार के दिन है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की लंबी आयु और बेहतर सेहत के लिए उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र जिसे राखी कहा जाता है बांधती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहनों को रक्षा का संकल्प लेते हैं।

 

हर साल रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए भद्रा का खास ध्यान रखा जाता है क्योंकि भद्रा में राखी बांधने पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नही रहेगा जिसके चलते सुबह से लेकर शाम तक राखी बांधने के लिए काफी समय मिलेगा। लेकिन रक्षाबंधन के दिन कुछ समय जैसे अशुभ चौघडि़या, राहुकाल और यम घंटा पर ध्यान देना होगा।

 

कब से कब तक है मुहुर्त --

 

ज्योतिष गणना के अनुसार  25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी जो 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इस बार रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा और पंचक प्रारम्भ हो जाएगा लेकिन इसका असर राखी बांधने में कोई नहीं रहेगा। पंचक में शुभ कार्य किया जा सकता है।

 

राखी बांधने का शुभ मुहुर्त

26 अगस्त को सुबह 7.43 से दोपहर 12.28 बजे तक

दोपहर 2.03 से 3.38 बजे तक

 

राखी बांधने का ये समय अशुभ रहेगा

राहुकाल- सुबह 5.13 से 6.48 बजेतक ।

यम घंटा -दोपहर 3.38 से 5.13 बजे तक ।

काल चौघड़िया दोपहर -12.28 से 2.03 बजे तक ।

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Is Mantra Ke Sath Bandhe Rakhi Safal Hoga Rakshabandhan / इस मंत्र के साथ बांधें राखी, सफल होगा रक्षाबंधन

 https://youtu.be/sSRk9hS_0_Y

इस मंत्र के साथ बांधें राखी, सफल होगा रक्षाबंधन

हिंदू धर्म में कोई भी पूजा मंत्र के बिना पूरी नहीं होती। हर पूजा के लिए विशेष मंत्र होता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि भाई-बहन के खास त्योहार रक्षाबंधन के लिए भी विशेष मंत्र है। जिसका उच्चारण राखी बांधते समय जरूर करना चाहिए।

 

मंत्र :-

येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।

तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल ॥

 

इसका अर्थ है - जिस प्रकार राजा बलि रक्षा सूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया, उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधती हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न होना और दृढ़ बना रहना ।

● ऐसे करें रक्षाबंधन की तैयारी

इस दिन बहनें सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान की पूजा करें। इसके बाद भाई को राखी बांधने के लिए अच्छे से थाली सजाएं। जिसमें कुंकुम (रोली), चावल, राखी और मिठाई रखें। भाई को अच्छे आसान पर बैठाकर भाई को तिलक लगाकर चावल चढावे राखी बांधें। भाई को राखी बांधने तक बहनें कुछ भी खाती-पीती नहीं हैं। भाइयों की शादी के बाद बहनें अपने भाई की पत्नी को भी राखी बांधती हैं।

26 अगस्त को है रक्षा बंधन

राखी, सावन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। 2018 में राखी 26 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी।

राखी बांधने का मुहूर्त

रक्षाबंधन 2018 राखी बांधने का मुहूर्त = 05:59 से 17:25 तक

मुहूर्त की अवधि = 11 घंटे 26 मिनट।

रक्षाबंधन में अपराह्न मुहूर्त = 13:39 से 16:12 तक।

मुहूर्त की अवधि = 02 घंटे 33 मिनट।

रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी।

सावन पूर्णिमा तिथि प्रारंभ = 25 अगस्त 2018, शनिवार 15:16 बजे

सावन पूर्णिमा तिथि समाप्त = 26 अगस्त 2018, रविवार 17:25 बजे।

 

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram :Aise Chune Bhai Ke Liye Rakhi Badal Jayegi Kismar / ऐसे चुने भाई के लिए राखी, बदल जाएगी किस्मत

https://youtu.be/clZxLFhJwiI

ऐसे चुने भाई के लिए राखी, बदल जाएगी किस्मत

ऐसे तो रक्षासूत्र के सभी रंग अच्छे होते हैं, परंतु यदि राशि के अनुसार रंग की राखी बांधी जाए तो वह विशेष लाभदायी होता है। तो आइए, जानते हैं कौन सी राशि वाले भाई को कौन से रंग की राखी बांधें ।

● यदि आपके भाई की राशि मेष है, तो उन्हें लाल रंग की राखी बांधें, यह सकारात्मक ऊर्जा देगी ।

● यदि आपके भाई की राशि वृषभ है, तो उन्हें सफेद रंग की राखी बांधें, यह मानसिक शांति देगी ।

● यदि आपके भाई की राशि मिथुन है, तो उन्हें हरे रंग की राखी बांधें, यह उनकी वैचारिक शक्ति बढ़ाएगी ।

● यदि आपके भाई की राशि कर्क   है, तो उन्हें चमकीले सफेद रंग की राखी बांधें, यह भावनात्मक रिश्ते मजबूत बनाएगी ।

● यदि आपके भाई की राशि सिंह है, तो उन्हें सुनहरे पीले रंग या गुलाबी रंग की राखी बांधें, यह नेतृत्व प्रदान करेगी ।

● यदि आपके भाई की राशि कन्या है, तो उन्हें हरे रंग की राखी बांधें, यह शुभ परिणाम लाएगी ।

 

● यदि आपके भाई की राशि तुला है, तो उन्हें सफेद रंग की राखी बांधें, यह न्याय करने की शक्ति प्रदान करेगी ।

● यदि आपके भाई की राशि वृश्चिक है, तो उन्हें चांदी की राखी बांधें, यह शांति व रोग से मुक्ति प्रदान करती है ।

● यदि आपके भाई की राशि धनु है, तो उन्हें पीले रंग की राखी बांधें, यह उन्हें मानसिक शांति प्रदान करेगी ।

● यदि आपके भाई की राशि मकर है, तो उन्हें नीले रंग की राखी बांधें, यह उन्हें कार्यों में सफलता प्रदान करेगी ।

● यदि आपके भाई की राशि कुंभ है, तो उन्हें नीले रंग की राखी बांधें, यह मनोबल बढ़ाती है ।

● यदि आपके भाई की राशि मीन है, तो उन्हें सुनहरे पीले रंग की राखी बांधें, यह मानसिक शांति प्रदान करती है।

● यदि भाइयों को अपनी बहन न हो, तो वह मित्र की बहन या ब्राह्मण से राखी बंधाएं और यदि कोई बहन को भाई न हो तो वह श्रीकृष्ण भगवान को या गणेश जी को राखी बांधें।

किसी भी यंत्र को नीला  रंग की और तिजोरी या पैसे के गल्ले को पीले रंग की राखी बांधे।

 

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Rakhi Bandhne Ka Shubh Samay / राखी बाधने का शुभ समय

https://youtu.be/y1MaVG9EEBI

इस वक्त बांधे भाई को राखी, शुभ होगा पूरा साल

रक्षा बंधन सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. ज्योतिष के मुताबिक इस बार का रक्षाबंधन राखी बांधने के लिए शुभ है. शुभ मुहूर्त का समय 11 घंटे 26 मिनट का होगा. इस शुभ मुहूर्त में बहन अपने भाई को राखी बांध सकती है.  इस मुहूर्त में किसी प्रकार की कोई अड़चने नहीं होंगी. पिछले साल के शुभ समय के अनुसार इस साल राखी बांधने के लिए काफी समय होगा. सावन महीने की पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त, शनिवार की शाम 3 बजकर 16 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगी.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त अगस्त 26 की सुबह से सुबह 5:59 मिनट से शाम 17:12 मिनट तक होगा, राखी की शुभ अवधि:11 घंटे 26 मिनट तक होगा. रक्षाबंधन में दोपहर का शुभ मुहूर्त01 बजकर 39 मिनट से चार बज कर 12 मिनट तक होगा. और दोपहर की अवधि: 02 घंटे 33 मिनट तक होगी.

रक्षा बंधन में ऐसे तैयार करें पूजा की थाली

रक्षा बंधन के दिन बहन सुबह उठकर सबसे पहले स्नान कर और नए वस्त्र पहन कर राखी की थाली तैयार करें. थाली में राखी, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, और मिठाई रखें।

रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास में उस दिन मनाया जाता है जिस दिन पूर्णिमा अपराह्न काल में पड़ रही हो। हालांकि आगे दिए इन नियमों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है–

 

  •   यदि पूर्णिमा के दौरान अपराह्न काल में भद्रा हो तो रक्षाबन्धन नहीं मनाना चाहिए। ऐसे में यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती तीन मुहूर्तों में हो, तो पर्व के सारे विधि-विधान अगले दिन के अपराह्न काल में करने चाहिए।

 

  •  लेकिन यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती 3 मुहूर्तों में न हो तो रक्षा बंधन को पहले ही दिन भद्रा के बाद प्रदोष काल के उत्तरार्ध में मना सकते हैं।

 

यद्यपि कुछ क्षेत्रों में अपराह्न काल को अधिक महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है, इसलिए वहां आम तौर पर मध्याह्न काल से पहले राखी का त्यौहार मनाने का चलन है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार भद्रा होने पर रक्षाबंधन मनाने का पूरी तरह निषेध है, चाहे कोई भी स्थिति क्यों न हो।

 

परंतु रक्षाबंधन पर्व मनाने में ग्रहण या संक्रांति का विचार नहीं किया जाता इस संबंध में शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है-

'इदं रक्षाबंधनं नियतकालत्वात् भद्रावर्ज्यगर्हणदिनेपि कार्यम् होलिकावत्।

ग्रहणसंक्रांत्यादौ रक्षानिषेधाभावात्।'

 

रक्षाबंधन की पूजा-विधि:-

 

रक्षा-सूत्र या राखी बांधते हुए ये मंत्र पढ़ा जाता है, जिसे पढ़कर पुरोहित भी यजमानों को रक्षा-सूत्र बांध सकते हैं:-

 

ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

 

इस मंत्र के पीछे भी एक महत्वपूर्ण कथा है, जिसे प्रायः रक्षाबंधन की पूजा के समय पढ़ा जाता है। एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ऐसी कथा को सुनने की इच्छा प्रकट की, जिससे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती हो। इसके उत्तर में श्री कृष्ण ने उन्हें यह कथा सुनायी–

प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच लगातार 12 वर्षों तक संग्राम हुआ। ऐसा मालूम हो रहा था कि युद्ध में असुरों की विजय होने को है। दानवों के राजा ने तीनों लोकों पर कब्जा कर स्वयं को त्रिलोक का स्वामी घोषित कर लिया था। दैत्यों के सताए देवराज इन्द्र गुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे और रक्षा के लिए प्रार्थना की। श्रावण पूर्णिमा को प्रातःकाल रक्षा-विधान पूर्ण किया गया।

इस विधान में गुरु बृहस्पति ने ऊपर उल्लिखित मंत्र का पाठ किया; साथ ही इन्द्र और उनकी पत्नी ने भी पीछे-पीछे इस मंत्र को दोहराया। इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने सभी ब्राह्मणों से रक्षा-सूत्र में शक्ति का संचार कराया और इन्द्र के दाहिने हाथ की कलाई पर उसे बांध दिया। इस सूत्र से प्राप्त बल के माध्यम से इन्द्र ने असुरों को हरा दिया और खोया हुआ शासन पुनः प्राप्त किया।

कुछ लोग इस पर्व के दिन  उपवास करते हैं और शास्त्रीय विधि-विधान से राखी बांधते हैं। साथ ही वे पितृ-तर्पण और ऋषि-पूजन या ऋषि तर्पण भी करते हैं।

कुछ क्षेत्रों में लोग इस दिन श्रवण पूजन भी करते हैं। वहां यह त्यौहार मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की याद में मनाया जाता है, जो भूल से राजा दशरथ के हाथों मारे गए थे।

रक्षाबंधन से जुड़ी कथाएं:-

कुछ पौराणिक घटनाएं बताते हैं, जो इस त्यौहार के साथ जुड़ी हुई हैं–

• मान्यताओं के अनुसार इस दिन द्रौपदी ने भगवान कृष्ण के हाथ पर चोट लगने के बाद अपनी साड़ी से कुछ कपड़ा फाड़कर बांधा था। द्रौपदी की इस उदारता के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें वचन दिया था कि वे द्रौपदी की हमेशा रक्षा करेंगे। इसीलिए दुःशासन द्वारा चीरहरण की कोशिश के समय भगवान कृष्ण ने आकर द्रौपदी की रक्षा की थी।

• एक अन्य ऐतिहासिक जनश्रुति के अनुसार मदद हासिल करने के लिए चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमांयू को राखी भेजी थी। हुमांयू ने राखी का सम्मान किया और अपनी बहन की रक्षा गुजरात के सम्राट से की थी।

• ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी ने सम्राट बाली की कलाई पर राखी बांधी थी।

 

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Mangal Ka Rashi Parivartan , Janiye Aapki Rashi Par Prabhav / मंगल का राशि परिवर्तन, जानिए आपकी राशि पर प्रभाव

https://youtu.be/k-iPNjzf48Y

मंगल का राशि परिवर्तन, जानिए आपकी राशि पर प्रभाव

मंगल ग्रह अभी तक धनु राशि में बैठे हुए थे। अब 2 मई को मंगल का गोचर मकर राशि में हो रहा है।  मकर राशि में मंगल उच्च के माने जाते हैं। साथ ही मंगल वक्री शनि का साथ छोड़कर आगे बढ़े हैं। मकर राशि में मंगल केतु के साथ होंगे।  मंगल काफी ज्यादा मजबूत होंगे और बहुत सारे विशेष परिणाम देंगे। राजनैतिक और सामाजिक मामलों पर इसके बड़े असर पड़ेंगे। राशियों पर मंगल के गोचर का क्या असर होगा । ये भी जान लीजिए।


 मेष

मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल हैं, जो कि आपकी राशि से भाग्य स्थान में गोचर वक्री शनि को छोड़कर कर्मभाव में उच्च के हो रहे हैं। कार्यक्षेत्र के लिए यह समय बहुत ही शुभ रहेगा। पदोन्नति के योग हैं जो जातक नई नौकरी की तलाश में हैं या फिर कोई नया कारोबार शुरु करना चाहते हैं, या किसी परियोजना में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए समय लाभकारी योग बना रहा है। इस समय आपकी सेहत भी अच्छी बनी रहेगी । लेकिन मातृ पक्ष के लिए यह समय थोड़ा कष्ट देने वाला रह सकता है।

वृषभ


वृषभ- मंगल आपकी राशि से भाग्य स्थान में प्रवेश कर रहे हैं। इस समय आपको भाग्य का पूरा सहयोग मिलने के आसार हैं। भाग्य स्थान में उच्च मंगल आपके लिए मांगलिक कार्य के योग भी बना रहे हैं। जमीन-जायदाद में निवेश करने में रूचि भी दिखा सकते हैं। हालांकि इस समय भाई बहनों से आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है। लेकिन अपने कार्यों की व्यस्तता के चलते हो सकता है आप इन छोटी मोटी बातों की तरफ ध्यान ही न दें जो कि एक तरह से अच्छा ही है। जीवनसाथी से भी सहयोग की उम्मीद रख सकते हैं।


 मिथुन

 आपकी राशि से मंगल आठवें भाव में आ रहे हैं। यह समय आपके करियर के लिए बहुत ही शुभ योग बना रहा है। इस समय आप अपने टैलेंट से अपनी प्रतिभा से नाम कमा सकते हैं। अगर बीते दिनों आपने किसी  व्यापार आदि में पैसा लगाया है, तो इस समय आपको उसका लाभ मिल सकता है। हालांकि इस समय में अंहकार की भावना भी इस समय आ सकती है इससे बचने का प्रयास करें।

 

कर्क


आपकी राशि से मंगल सप्तम भाव में आ रहे हैं। रोमांटिक जीवन में आपके लिए मंगल परेशानी लेकर आ सकते हैं। लाइफ पार्टनर के साथ बहसबाजी हो सकती है, जिससे आपके रिश्ते हो सकता है मधुर ना रहें। अविवाहित जातकों की रोमांटिक लाइफ के लिए समय अच्छा रहने के आसार हैं। करियर के मामले में भी समय अनुकूल कहा जा सकता है। अगर कहीं से धन प्राप्ति की उम्मीद है, तो संभव है आपके पैसे निकल आएं।


सिंह

सिंह राशि वालों के लिए मंगल छठे घर में दाखिल होंगे। इस समय आपको अपनी सेहत में काफी सुधार महसूस हो सकता है। अगर पिछले कुछ दिनों से शारीरिक तौर पर अस्वस्थ चल रहे हैं तो यह समय सेहत के लिए लाभकारी है। प्रतिद्वंदियों पर भी इस समय आप हावि रहेंगें। साक्षात्कार आदि में शामिल होने वाले प्रतिभागियों के लिए काफी सकारात्मक समय रहने के आसार हैं। भाग्य का साथ भी आपको मिल सकता है। प्रोपर्टी के व्यवसाय से जुड़े जातकों के लिए भी समय विशेष रूप से सौभाग्यशाली रह सकता है।


. कन्या

 कन्या राशि वालों के लिए मंगल पंचम भाव में आ रहे हैं। शिक्षा, संतान, मित्रों व प्रेम संबंध के मामले में समय आपके लिए अनुकूल परिणाम लेकर आने वाला रह सकता है। कामकाजी जीवन में आपको नाम व प्रसिद्धि मिल सकती है। पदोन्नति की उम्मीद भी कर सकते हैं। लाभ प्राप्ति के भी नये अवसर आपको मिल सकते हैं। जो जातक किसी परियोजना में धन निवेश करने के इच्छुक हैं उनके लिए भी यह समय शुभ कहा जा सकता है।


तुला

 आपकी राशि से मंगल का परिवर्तन चतुर्थ स्थान में हो रहा है जो कि आपके सुख भाव को दर्शाता है। सुख भाव में मंगल आपके लिए भूमि, मकान, वाहन आदि की खरीददारी के योग बना रहे हैं। छोटी मोटी यात्रा भी आपको करनी पड़ सकती है। कामकाजी जीवन में आपको थोड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है। हालांकि व्यवसायी जातकों के लिए लाभ प्राप्ति का समय कहा जा सकता है। पर्सनल लाइफ खासकर दांपत्य जीवन में आपको थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। माता की देखभाल अवश्य करें उनके लिए भी मंगल कष्टप्रद रह सकते हैं


 वृश्चिक

आपकी राशि के स्वामी मंगल आपकी राशि से पराक्रम भाव में उच्च के होकर गोचर करेंगे। प्रोफेशनली यह समय आपके लिए बहुत ही सकारात्मक रहने के आसार हैं। कार्यस्थल पर माहौल अनुकूल बने रहने के आसार हैं। आपके पराक्रम में वृद्धि हो सकती है जिससे संभव है कार्यस्थल पर आपका प्रदर्शन भी बेहतर रहे। कार्यक्षेत्र में कोई नई जिम्मेदारी भी आपको इस समय मिल सकती है। आप अपने प्रतिद्वंदियों पर हावि रह सकते हैं साथ ही स्वास्थ्य में भी सुधार महसूस कर सकते हैं। भाई बहनों का सहयोग मिलने की उम्मीद भी इस समय कर सकते हैं। हालांकि भाग्य मध्यम रहने के आसार हैं।


 धनु

 आपकी राशि से मंगल का परिवर्तन दूसरे भाव में हो रहा है जो कि मंगल की उच्च राशि भी है। धन के मामले में यह समय अच्छा रहने के आसार हैं। भाग्य का साथ भी आपको मिलेगा लेकिन पंचम भाव में सूर्य के होने व मंगल की दृष्टि पड़ने कहीं न कहीं संबंध व संतान को लेकर आपके सामने कोई परेशानी खड़ी हो सकती है। इस समय यात्रा के योग भी आपके लिए बन रहे हैं लेकिन यात्रा के दौरान सावधान रहें।


 मकर

मंगल का परिवर्तन आपकी ही राशि को हो रहा है। उच्च के मंगल आपके लिए मांगलिक कार्यों में शामिल होने के योग बना रहे हैं। जो जातक लंबे समय से घर या गाड़ी खरीदने के लिए प्रयासरत हैं उन्हें सफलता मिल सकती है। इस समय आप किसी लंबी यात्रा के लिए भी निकल सकते हैं। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित हो सकते हैं। माता से भी आपके संबंध हो सकता है अनुकूल न रहें। दांपत्य जीवन में भी यह समय परेशानी वाला रह सकता है।


कुंभ

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल का परिवर्तन 12वें भाव में हो रहा है। इस समय आप जमीन जायदाद संबंधी मामलों में धन खर्च कर सकते हैं। निवेश करने के मामलों में सावधानी बरतें। एक गलत निर्णय धन हानि का कारण बन सकता है जिसकी की संभावनाएं भी नज़र आ रही हैं। आपके पराक्रम में इस समय वृद्धि रहने के आसार हैं। हालांकि घरेलु जीवन में यह समय परेशानियों वाला रह सकता है हो सकता है परिजनों के साथ आपके संबंध मधुर न रहें। शत्रु व रोग का भय भी आपको सता सकता है।


 मीन

मीन राशि वालों के लिए मंगल लाभ घर में उच्च के हो रहे हैं। कार्यक्षेत्र व व्यवसाय में मंगल आपके लिए वृद्धि के योग बना रहे हैं। संचित धन में भी आप इस समय वृद्धि देख सकते हैं। व्यावसायिक प्रतिद्वंदियों पर भी आप हावी रह सकते हैं। हालांकि प्रेम संबंधों व संतान के साथ यह समय हो सकता है अनुकूल ना रहें।

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18 Aug, 2018 Blog

Astromitram : Saap Bhagane Ke Liye Kare In Mantro Ka Jaap / सांप भगाने के लिए करें इन मंत्रों का जाप /

https://youtu.be/-ggPt9dULKM

 सांप भगाने के लिए करें इन मंत्रों का जाप

मंत्र –  हुं क्षूं ठः ठः।

प्रयोग :- किसी शुभ मुहूर्त पर इस मंत्र के 11,000 जप कर सिद्ध कर लें। उसके बाद जब कभी भी सर्प दिखाई पड़े तो उसकी ओर इस मंत्र को जपते हुए फूंक मारें या भभूत फेंकें। इसके प्रभाव से सर्प की गति अवरुद्ध हो जाती है। वह या तो आगे नहीं बढ़ेगा या तो लौट जायेगा, या दूसरी दिशा में घूम जायेगा।

 

मंत्र – ओइम् ह्रीं ह्रीं गरुड़ाज्ञा ठः ठः।

प्रयोग :- किसी शुभ मुहूर्त पर इस मंत्र के 11,000 जप कर सिद्ध कर लें। इसके बाद जब कभी भी सर्प दिखाई पड़े, तो यह मंत्र पढ़ते हुए जमीन पर एक लंबी रेखा खींच देने से सांप उस रेखा को पार नहीं कर सकता। यह रेखा लक्ष्मण रेखा की तरह सर्प के लिए अलंध्य हो जाती है।

 

मंत्र – ओइम् ल ल ल ल ला ला कुरु स्वाहा।

प्रयोग :- इस मंत्र के 7,000 जप करके सिद्ध कर लें। इसके बाद जब कभी भी सर्प दिखाई दे, तो एक मिट्टी का खाली घड़ा वहां रखकर, यह मंत्र पढ़ते हुए उस पर भभूत या फूंक डालने से सांप उसी घड़े में प्रविष्ट हो जाता है। बाद में ढक्कन से ढककर सर्प को पकड़ा जा सकता है। या आप उसे कहीं और ले जाकर छोड़ सकते है ।

 

मंत्र – ओइम् प्लः सर्प कुलाय स्वाहा अशेष कुल सर्प कुलाय स्वाहा।

प्रयोग :- इस मंत्र के दस हजार जाप करके सिद्ध कर लें। इसके बाद जब भी किसी सांप को देखें या आपको उससे डर लगे, तो मिट्टी पर सात बार यह मंत्र पढ़ते हुए फूंक मारकर सर्प की ओर फेंक दें, इसके प्रभाव से सर्प आगे न बढ़कर किसी दूसरी दिशा की ओर घूम जाएगा।

 

मंत्र – मुनिराजं आस्तीकं नमः।

प्रयोग :- होली, दीवाली या फिर ग्रहण के अवसर पर इस मंत्र की 7 माला जपकर सिद्ध कर लें। इसके बाद कभी भी सर्प की शंका हो या दिखाई दे जाए, तो इस मंत्र का उच्चारण प्रारम्भ कर देना चाहिए। 21 या 51 बार जपते जपते सर्प वहां से चला जायेगा।

पुष्प नक्षत्र में गिलाथ यानि की गुरुच लाकर उसके छोटे टुकड़े करके एक माला बना लें। इस माला को धारण कर लें। मार्ग, चाहे कितना ही भयानक व अंधेरे से घिरा क्यों न हो, सर्पभय से रक्षा होती है।

 

मंत्र – फकीर चले परदेस कुत्ते के मन में भावे

बाघ बाघूं, बाधिनी बांधूं, बाधिनी के सातों बच्चा बांधूं

सांप बांधू, चोर बांधू, दांत बांधूं, दाढ़ बांधूं

देऊं, दुहाई लोना चमारिन की।

 

प्रयोग :- किसी भी मंगलवार को, 108 बार जपकर यह मंत्र सिद्ध कर लें। उसके बाद जब कभी सर्प या सिंह दिखाई दे, तो 7 बार यह मंत्र पढ़कर उसकी ओर फूंक मारने से वह आक्रमण नहीं करता। इस मंत्र के प्रभाव से वह मार्ग बदलकर दूसरी ओर चला जायेगा।

 

मंत्र – खः खः।

प्रयोग :- इस मंत्र को 7,000 बार जपकर सिद्ध कर लें। इसके बाद, जब कभी सांप के काटने की सूचना मिले, तो 108 बार इस मंत्र की फूंक मारकर अभिमन्त्रित किया हुआ जल, उस व्यक्ति को पिला दें। यह अभिमन्त्रित जल सांप के काटे व्यक्ति को पिलाने से विष उतर जाएगा। लेकिन ध्यान रखें कि वह जल जमीन पर न रखा जाए और ना ही उसे लेकर चलते हुए रास्ते में कही भी अपवित्र स्थिति जैसे शौचालय में लें जाए और ना ही लेकर जाने वाला व्यक्ति कही पेशाब करने रूके। यह भी ध्यान रखें कि उस जल को कोई अन्य व्यक्ति ना देखे और ना ही छुए।

 

मंत्र – बजरी बजरी बजर किवाड़

बजरी कीलूं आसपास, मरे सांप होय खाक

मेरा कीला पत्थर कीले, पत्थर फूटै न मेरा कीला छूटै,

मेरा भक्ति, गुरु की शक्ति, फरो मंत्र, ईश्वरोवाचा।

प्रयोग :- यह सर्प स्तम्भन का मंत्र है। इस मंत्र के 108 जप कर सिद्ध कर लें। यदि कहीं मार्ग में या घर के आंगन में सर्प घेर ले या सर्प आक्रमण कर रहा हो, तो इस मंत्र को पढ़ते हुए मिट्टी के छोटे-छोटे ढेले या कंकड़ फूंककर सर्प को मारने से वह स्तम्भित हो जाता है और फिर किसी ओर सरक नहीं सकता।

 

मंत्र – कीलन भई कुकीलन वाचा भयाकुवाच।

जाहु सर्प घर आपने चुग फिर चारो मास।

प्रयोग :- स्तम्भित सर्प को यह मंत्र पढ़कर कंकड़ मारने से वह स्तम्भन मुक्त होकर एक ओर निकल जाता है।

 

मंत्र – धर पटक धसनि धसनि सार

ऊपरे धसनि विष नीचे जाय

काहे विष तू इतना रिसाय

क्रोध तो तोर होय पानी

हमरे थप्पड़ तोर नहीं ठिकाना

आज्ञा देवी मनसा माई

आज्ञा विष हरि राई दुहाई।।

प्रयोग :- इस मंत्र का प्रयोग उस समय किया जाता है, जब कोई व्यक्ति सर्प दंश की सूचना लाता है। जैसे ही कोई आकर यह बताए कि किसी को सांप ने काटा है, तो साधक तुरंत सूचना लाने वाले व्यक्ति को यह मंत्र पढ़ते हुए एक थप्पड़ मार दे। इस प्रयोग के प्रभाव से पीड़ित व्यक्ति पर विष आगे नहीं बढ़ेगा। फिर आप आराम से सर्प दंश से का इलाज करवा सकेंगे।

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17 Aug, 2018 Blog

Astromitram :P M Narendra Modi Ji Ki Kunadali / पीएम मोदी जी की कुंडली /

https://youtu.be/qGJHccq4W7U

पीएम मोदी की कुंडली

श्री नरेंद्र मोदी जी की जन्मकुंडली वृश्चिक लग्न और वृश्चिक ही राशि की है लग्न में चन्द्रमाँ मंगल स्थित हैं, बृहस्पति चतुर्थ भाव में, शुक्र, शनि दशम भाव में राहु पंचम में तथा सूर्य बुध और केतु एकादश भाव में स्थित हैं।

श्री नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में लग्नेश मंगल लग्न में ही स्थित है जिसे ज्योतिषीय दृष्टि में बहुत ही शुभ माना जाता है लग्नेश लग्न में ही स्थित होने से कुंडली को बहुत विशेष बल मिल जाता है श्री मोदी जी की कुंडली में लग्नेश लग्न में होने से लग्न और लग्नेश दोनों ही बहुत मजबूत स्थिति में हैं साथ ही दूसरी दृष्टि से मंगल का स्वराशि में लग्न में होना रूचक योग बनाकर मंगल को नैसर्गिक रूप से भी बहुत बली बना रहा है, लग्न और लग्नेश का बलवान होना तो व्यक्ति को उच्च आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति देता ही है साथ ही मंगल हिम्मत, शक्ति, पराक्रम, दृढनिश्चयता और उत्साह प्रदान करता है। श्री मोदी जी की कुंडली में लग्न लग्नेश और मंगल दोनों ही बहुत बलवान हैं पर यहाँ इसमें एक और विशेष बात है के मजबूत मंगल भी विशेष रूप से कुंडली के लग्न भाव में स्थित है और लग्न(प्रथम भाव) ही व्यक्ति के स्वभाव को निश्चित करता है। अतः बलवान मंगल पूर्ण रूप से मोदी जी की लग्न अर्थात स्वभाव को प्रभावित कर रहा है जिससे पराक्रम, निडरता, निर्भयता और उत्साह हमेशा मोदी जी के स्वभाव में बना रहता है स्वराशि में स्थित बलवान मंगल व्यक्ति को बहुत मेहनती और अपने कार्य को पूरे समर्पण से करने वाला तो बनाता ही है साथ ही दृढ निश्चयी भी बनाता है।

रूचक योग वाला व्यक्ति जिस बात को ठान लेता है उसे पूरा करके ही दम लेता है और बली मंगल ही व्यक्ति को किलिंग स्पिरिट देता है जिससे व्यक्ति अपने कार्यों की सफलता में अपनी पूरी ऊर्जा लगा देता है लग्न में स्वराशि के बली मंगल के कारण ही ये सभी विशेषताएं हमें श्री मोदी जी के व्यक्तित्व में भी स्पष्ट दिखाई देती हैं। श्री मोदी जी की कुंडली में स्वराशि का मंगल ही उन्हें पराक्रम के साथ साथ बहुत अच्छी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति भी देता है लग्न में रूचक योग होने से व्यक्ति हमेशा अपने विरोधियों पर हावी रहता है लग्न में रूचक योग होने पर ऐसा व्यक्ति स्वतंत्र और निर्भय स्वभाव का अपनी बात को पूर्ण आत्मविश्वास से कहने वाला होता है  और लग्न का बली मंगल ही श्री मोदी जी को पूर्ण कर्मठ और स्वाभिमानी व्यक्ति भी बनाता है।

श्री नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में लग्न में चन्द्रमाँ नीच राशि में स्थित है वैसे तो वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल केंद्र में और विशेष रूप से चन्द्रमाँ के साथ होने से यहाँ चन्द्रमाँ का पूर्ण रूप से नीच भंग हो रहा है पर फिर भी नीच राशि का चन्द्रमाँ श्री मोदी जी को एक भावुक प्रवृत्ति भी देता है। उनके वक्तव्यों में कई बार उन्हें भावुक होते हुए  भी हम सभी ने देखा होगा यह नीच राशि के चन्द्रमाँ के ही कारण है पर लग्न में रोचक योग बनने से ऐसा व्यक्ति कर्म प्रधान होता है और अपने कर्म और लक्ष्यों पर भावुकता हो हावी नहीं होने देता।

श्री मोदी जी की कुंडली में बुद्धि तर्क शक्ति और वाणी का कारक ग्रह बुध एकादश भाव में उच्च राशि में स्थित है जो उन्हें किसी भी बात के गहन अध्ययन और विश्लेषण की श्रेष्ठ क्षमता और दूरदर्शिता प्रदान करता है। श्री मोदी जी की वाणी और वक्तव्य बहुत ऊर्जान्वित और प्रभावपूर्ण होते हैं इसके लिए  उनकी कुंडली के बलवान मंगल और उच्चस्थ बुध दोनों की ही महत्वपूर्ण भूमिका है। उच्चस्थ बुध उन्हें प्रखर वाणी और तर्कसंगत व्यक्तित्व की क्षमता देता है तो बलवान मंगल उन्हें अपनी बात को पूर्ण आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ प्रस्तुत करने की शक्ति देता है। श्री मोदी जी की कुंडली में बृहस्पति का केंद्र में होना और मंगल का स्वराशि में होना ही उन्हें कुशल प्रबंधन की क्षमता प्रदान करता है।

बुध को व्यवहारिकता और आपसी तालमेल का कारक भी माना गया है श्री मोदी जी की कुंडली में बुध उच्च राशि में होने से ही वे बहुत व्यवहार कुशल और अपने मैत्रीपूर्ण व्यवहार से सबका मन मोह लेने का विशेष गुण भी रखते हैं इसके अलावा श्री मोदी जी की कुंडली में बृहस्पति का केंद्र में होना तथ वक्री होकर बृहस्पति का नवम भाव को उच्च दृष्टि से देखना उनके व्यक्तित्व में उदारता का श्रेष्ठ गुण भी देता है।

वक्री बृहस्पति की नवम भाव पर उच्च दृष्टि पड़ने से यहाँ नवम भाव बहुत बली हो गया है जिससे मोदी जी एक समान दृष्टि से सभी को सम्मान और आदर देते हैं समाज के लिए सेवा भाव भी उनके व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देता है। मोदी जी की कुंडली में ग्रहस्थिति और उनके स्वभाव को लेकर एक बात बहुत महत्वपूर्ण है लग्न में स्थित स्वराशि का मंगल उन्हें निर्भयता, दृढ़ता और ओजमयी वाणी और स्वाभिमानी व्यक्तित्व तो देता है पर उनकी कुंडली में लग्न में मंगल के साथ चन्द्रमाँ होना और विशेष रूप से बृहस्पति का केंद्र और नवमभाव दोनों को प्रभावित करना उनके स्वभाव में अहम् को तनिक भी नहीं आने देता।  बलवान मंगल उन्हें अपने कार्यों और लक्ष्यों के लिए तो दृढ बनाता है पर उनकी कुंडली में बृहस्पति की विशेष स्थिति के कारण प्रत्येक व्यक्ति के साथ उनका व्यव्हार बहुत विनम्रता पूर्ण होता है।

श्री नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में लग्न और लग्नेश मंगल बली स्थिति में होना ही उन्हें उच्च प्रतिष्ठा, यश और विश्व विख्यात प्रसिद्धि प्रदान करते हैं लग्न भाव व्यक्ति के यश प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा को नियंत्रित करता है। जिन लोगों की कुंडली में लग्नेश लग्न में ही बलवान होकर स्थित होता है वे अपने जीवन में बहुत जाने माने और प्रसिद्ध व्यक्ति बनते हैं मोदी जी की कुंडली में यह ग्रह योग और उनके जीवन में इसकी वास्तविकता स्पष्ट दिखाई देते हैं।

अब विशेष रूप से श्री नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में उनकी उपलब्धियों और राजनैतिक सफलता के ग्रहयोगों को देखते हैं। श्री मोदी जी की कुंडली में दशम भाव (कर्म का भाव) में सरकार और सत्ता कारक ग्रह सूर्य की राशि का उपस्थित होना उनके जीवन को इस क्षेत्र से तो जोड़ ही देता है उनकी कुंडली में राजनीती और सत्ता का कारक सूर्य लाभ स्थान में है पर श्री मोदी जी की कुंडली में एक बहुत ही विशेष योग बना हुआ है जो राजनैतिक क्षेत्र में सफलता और जनसमर्थन को देता है।

मोदी जी की कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी शनि दशम भाव में स्थित होकर चतुर्थ भाव को पूर्ण दृष्टि देख रहा है जिससे यहाँ कुंडली का चौथा भाव बहुत बलवान हो गया है। ऐसे में व्यक्ति को बहुत बड़ी मात्रा में जनसमर्थन और जनता का सहयोग प्राप्त होता है इसके अलावा जनता का नैसर्गिक कारक शनि भी केंद्र में बृहस्पति से दृष्ट है जिससे श्री मोदी जी को जनता का बहुत अच्छा समर्थन प्राप्त होता है मोदी जी की कुंडली में दशमेश सूर्य लाभ स्थान में होना शुभ है पर विशेष रूप से कर्म कारक शनि का बृहस्पति से दृष्टि सम्बन्ध स्थापित करना एक विशेष फलदायी योग है ज्योतिष में शनि और बृहस्पति का साथ होना या इनमे दृष्टि सम्बन्ध बनना बहुत शुभ माना गया है ऐसा व्यक्ति अपने क्षेत्र में कुछ विशेष करके दिखाता है और विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त करता है, साथ ही बृहस्पति की शुभ दृष्टि से शनि और दशम भाव दोनों को बहुत बल मिल रहा है जो स्पष्ट रूप से जीवन में अपने कर्म क्षेत्र की उच्च सफलता और श्रेष्ठ पदों की प्राप्ति को दर्शाता है।

अब श्री मोदी जी की कुंडली के कुछ और विशेष सफलतादायक योगों को देखते हैं मोदी जी की कुंडली में भाग्येश चन्द्रमाँ नीच राशि में होने से उनके जीवन का प्रारंभिक समय अस्थिरता और उतार चढ़ाव में व्यतीत हुआ पर उसी नीच राशि के चन्द्रमाँ ने बाद में नीचभंग राजयोग का रूप भी दिखाया मंगल केंद्र में और चन्द्रमाँ के साथ होने से यहाँ चन्द्रमाँ से नीचभंग राजयोग बन रहा है जो संघर्ष के बाद बड़ी सफलता देता है, लग्नेश का लग्न में स्थित होना स्वयं में एक राजयोग माना गया है जो मोदी जी की कुंडली की सबसे बड़ी विशिष्टता भी है इसके अलावा यहाँ भाग्येश और लग्नेश का लग्न में एक साथ होना केंद्र त्रिकोण के सम्बन्ध से भी राज योग बना रहा है, मोदी जी की कुंडली में दशमेश सूर्य और लाभेश बुध का लाभ स्थान में बना योग भी समृद्धि और उच्च पद की प्राप्ति कराता है, कुंडली में स्वराशि का मंगल लग्न में होने से बना रूचक योग तो कुंडली को विशेष बल दे ही रहा है साथ ही यहाँ वक्री बृहस्पति की भाग्य स्थान पर पड़ने वाली उच्च दृष्टि जीवन में बड़ी सफलता देती है।

तो ये श्री मोदी जी की कुंडली के कुछ ऐसे विशेष ग्रहयोग हैं जो उनमे विशेष प्रतिभाएं तो देते ही हैं साथ ही जीवन में बड़ी सफलता भी प्रदान करते हैं बली मंगल उन्हें प्रतिनिधित्व और कुशल नेतृत्व की क्षमता देता है तो उच्चस्थ बुध ओजमयी वाणी प्रदान करता है बृहस्पति और शनि का दृष्टि सम्बन्ध कर्म क्षेत्र में कुछ विशिष्ठ उपलब्धियां दिलाता है तो बलवान चतुर्थ भाव विशेष जनसमर्थन को दर्शाता है। मोदी जी की कुंडली की एक विशेषता यह भी है के लग्न में ही चन्द्रमाँ स्थित होने से मोदी जी की लग्न और चंद्र कुंडली एक ही है जिससे कुंडली में बने योग और अधिक प्रबल हो जाते हैं क्योंकि लग्न कुंडली और चंद्र कुंडली दोनों में ही एक समान ग्रह योग बनते हैं जो अपना पूरा प्रबल प्रभाव दिखाते हैं अधिकांशतः स्थितियों में लग्न और चंद्र कुंडली भिन्न होने से लग्न में बली मंगल होने पर भी चंद्र कुंडली में अलग ग्रहयोगों के कारण व्यक्ति के स्वभाव में बलवान मंगल के पूरे गुण नहीं आ पाते परंतु नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में लग्न और चंद्र कुंडली समान होने से उनके व्यक्तित्व में बली मंगल के पूर्ण ऊर्जावान गुण विद्यमान हैं साथ ही इससे उनकी कुंडली में बने अन्य अच्छे ग्रह योग भी और प्रबल प्रभाव दिखा रहे हैं।

 

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17 Aug, 2018 Blog

Asstromitram :Janiye Mausam Ke Anusar Harad Ke Fayde / जानिए मौसम के अनुसार हरड़ के फायदे और नुकसान

https://youtu.be/nyoNJLsJflM

जानिए मौसम के अनुसार हरड़ के फायदे और नुकसान  

हरड़ सिर्फ औषधि नहीं, बल्कि एक टॉनिक भी है। हरड़ के रासायनिक गुणों का लाभ उठाने के लिए साल भर की 6 ऋतुओं की हर ऋतु में हरड़ का अनुपात बदल कर सेवन करने की विधि आयुर्वेद शास्त्रों में बताई गई है।
गर्मियों में आप जितन मात्रा में हरड़ लें उतनी ही समान मात्रा में पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करें।
वर्षा ऋतु में सेंधा नमक मिलाकर हरड़ का सेवन फायदेमंद है।
सर्दियों में हरड़ जितनी ही समान मात्रा में मिश्री या शक्कर मिलाकर सेवन करें  |

सीजन के अनुसार हरड़ के उपयोग के साथ ही जान लीजिए हरड़ के कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते है। वो भी जान लीजिए।

  • तेज प्यास या बार-बार पानी पीने की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को हरड़ सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है | और इसके सेवन से व्यक्ति को और भी ज्यादा प्यास लगती है।
  • खूनी दस्त रोग में हरड़ का सेवन नहीं करना चाहिए। नुकसान करता है।
  •  रक्त प्रदर से पीड़ित महिलाओं और नकसीर या शरीर के किसी भी भाग से खून बहने की दशा में हरड़ सेवन से बचना चाहिए।
  •  तासीर गर्म होने के कारण हरड़ का सेवन गर्मी में ज्यादा नहीं करना चाहिए। यदि सेवन करना जरुरी हो, तो समान मात्रा में पुराने गुड़ में मिलाकर करें।
  •  तासीर गर्म होने के कारण गर्भवती स्त्रियों को इसके ज्यादा सेवन से बचना चाहिए
  •  जिन्हें शरीर में बहुत ज्यादा रूखापन रहने की शिकायत होती है, उनको हरड़ सेवन नहीं करना चाहिए।
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