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18 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Apki Kalayi Me Chipa Hai Apke Bhavishya Ka Raaz / आपकी कलाई में छिपा है भविष्य का राज

https://youtu.be/7jGlkb1hMio

आपकी कलाई में छिपा है भविष्य का राज

मणिबंध पर मौजूद रेखाओं को देखकर जातक की आयु ज्ञात की जा सकती है। मूलतः कलाई पर मौजूद तीन ही रेखाएं मणिबंध रेखाएं कहलाती हैं। कुछ लोगों के हाथ में दो मणिबंध रेखाएं होती हैं तो कुछ के हाथ में चार मणिबंध रेखाएं भी होती हैं। ये रेखाएं आयु, स्वास्थ्य, धन, प्रतिष्ठा एवं सम्मान की सूचक होती हैं।

 

  • कई बार विदेश यात्राएं मणिबंध से यदि कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर जाती हो तो उसके सोचे सभी कार्य उसके जीवनकाल में पूर्ण हो जाते हैं।
  • यदि मणिबंध से कोई रेखा निकलकर चंद्र पर्वत की ओर जा रही हो तो वह व्यक्ति कई बार विदेश यात्राएं करता है।
  •  सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यदि कलाई पर चार मणिबंध रेखाएं हों तो उसकी पूर्ण आयु 100 वर्ष होती है। यदि तीन रेखाएं हों तो 75 वर्ष, दो रेखाएं हों तो 50 वर्ष और एक रेखा होने पर उसकी आयु 25 वर्ष मानी जाती है।
  • यदि मणिबंध रेखाएं टूटी हुई या कटी-फटी हो तो उस व्यक्ति के जीवन में लगातार बाधाएं और परेशानियां आती रहती हैं। उसका जीवन संकट और संघर्षों से घिरा रहता है।
  • यदि मणिबंध रेखाएं निर्दोष तथा स्पष्ट हों तो व्यक्ति का प्रबल भाग्योदय होता है।
  • मणिबंध रेखा जंजीरदार हो तो उसके जीवन में बराबर बाधाएं आती रहती हैं। इस रेखा पर स्वस्तिक का चिन्ह सौभाग्य का सूचक है।
  • मणिबंध रेखा पर बिंदु हो तो जीवनभर पेट के रोगों से परेशान रहता है।
  • द्वीप का चिन्ह मणिबंध पर हो तो उसे बार-बार दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
  •   मणिबंध रेखा गहरी, लाल और स्पष्ट हो तो व्यक्ति की सर्वत्र रक्षा होती है। संकटों से बचाव होता है।
  • यदि दो मणिबंध रेखाएं आपस में मिल जाती हों तो दुर्घटना में अंग-भंग होने का योग बनता है।
  • इन रेखाओं का रंग नीलापन लिए हुए हो तो व्यक्ति रोगी होता है। पीली मणिबंध रेखाएं विश्वासघात की सूचक है।

 

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16 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Kab Kare Ratna Dharan / कब धारण करें रत्न

https://youtu.be/JnCZ831d5Co

कब धारण करें रत्न?

प्राचीन काल से ही रत्नों का प्रचलन रहा है | मानिक मोती मूंगा पुखराज पन्ना हीरा और नीलम ये सब मुख्य रत्न हैं | इनके अतिरिक्त और भी रत्न हैं जो भाग्यशाली रत्नों की तरह  पहने जाते हैं | इनमे गोमेद, लहसुनिया, फिरोजा, लाजवर्त आदि का भी प्रचलन है | रत्नों में ७ रत्नों को छोड़कर बाकी को उपरत्न समझा जाता है | मानिक मोती मूंगा पुखराज पन्ना हीरा और नीलम लहसुनिया और गोमेद ये सब ९ ग्रहों के प्रतिनिधित्व के आधार पर पहने जाते हैं |

विभिन्न प्रकार की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार नवरत्न धारण करने के कुछ विशेष सिद्धांत है.. जो इस  प्रकार हैं|

१- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म राशी , जन्म दिन , जन्म मास , जन्म नक्षत्र को ध्यान में रखते हुए ही रत्न धरण किया जाना चाहिए। 

२- लग्नेश , पंचमेश , सप्तमेश , भाग्येश और कर्मेश के क्रम के अनुसार एवम महादशा , प्रत्यंतर दशा के अनुसार ही रत्न धारण करना चाहिए। 

३ - छठवां, आठवां और बारहवां भाव को कुछ विद्वान मारकेश मानते हैं , मारकेश रत्न कभी धारण न करें। 

४- रत्न का वजन पोन रत्ती में नही होना चाहिए। पोनरत्ती धारण करने से व्यक्ति कभी फल फूल नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन हमेशा पोना ही रहता है 

५- जहाँ तक रत्न हमेशा विधि विधान से तथा प्राण प्रतिष्ठा करवा कर , शुभ वार , शुभ समय अथवा सर्वार्थ सिद्धि योग , अमृत सिद्धि योग या किसी भी पुष्प नक्षत्र में ही शुभ फल देता है। 

६- जहां तक संभव हो रत्न सर्वशुद्ध ख़रीदे और धारण करें और दोष पूर्ण रत्न न ख़रीदे जैसे दागदार , चिरादार , अन्य दो रंगे , खड्डा , दाडाक दार , अपारदर्शी रत्न अकाल मृत्यु का घोतक होते हैं|
 

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16 Jun, 2018 Blog

Astromitram : C Se Shuru Hoga Naam,To Ye Hoga Khaas / C से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास

https://youtu.be/61udoR0ZQrA

C से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास

जिन लोगों का नाम C  से शुरु होता है, वो लोग हर दिल अजीज और मिलनसार होते है | ऐसे व्यक्तियों का स्वाभाव सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाला होता हैं| इनके लिए लोगों की भावनाएं काफी मायने रखती है, क्योंकि ये खुद भी काफी भावुक होते है। लेकिन हां भावुक होने के साथ ही C अक्षर से नाम शुरु होने वाले लोग स्पष्ट बोलने वाले होते है।ये लोग कभी भी जानबूझकर किसी का दिल नहीं दुखाते है।ऐसे लोग देखने में आकर्षित होते है । इनकी सेक्स लाईफ काफी अच्छी होती है, ये आसानी से किसी को भी अपने वश में कर लेते है लेकिन अपने पार्टनर के साथ धोखा नहीं करते । C अक्षर के लोग ईमानदार भी होते है। यह लोग अपने करियर में कामयाब होते है । इनकी खास बात यह होती है कि ये लोग अपने काम से लोगों को खुश करना जानते है। जिसका फायदा इन्हें अपनी प्रोफेशनल लाइफ में भी जिंदगी भर मिलता रहता है। लक्ष्मी जी की भी इन पर सदा कृपा बनी रहती है ।

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16 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Rudraksh Se Hoga Rogo Ka Upchar / रूद्राक्ष से होगा रोगों का उपचार

https://youtu.be/bLG7Or485ds

रूद्राक्ष से होगा रोगों का उपचार

रूद्राक्ष सिर्फ एक धार्मिक मनका ही नहीं है| ये एक औषधि भी है| अलग अलग प्रकार के रूद्राक्ष| अलग अलग बीमारियों के उपचार में सहायक हैं|

एकमुखी रूद्राक्ष :-

सूर्यजनित दोषों के निवारण के लिए ज्योतिषी माणिक्य रत्न धारण करने का परामर्श  देते हैं । सूर्य प्रतिकूल-स्थानीय होकर विभिन्न रोगों को जन्म देते हैं । नेत्र सम्बन्धी रोग, सिरदर्द, हृदयरोग, हड्डी के रोग, त्वचा रोग, उदर सम्बन्धी रोग, तेज बुखार, जैसे  सभी रोगो के निवारण के लिए रूद्राक्ष माला के मध्य में एकमुखी रूद्राक्ष को पिरोकर धारण करना चाहिए।

दोमुखी रूद्राक्ष :-

यह रूद्राक्ष हर प्रकार के रिश्तों में एकता बढ़ाता हैं, वशीकरण मानसिक शांति व ध्यान में एकग्रता बढ़ाता हैं । इच्छाशक्ति पर काबू, कुण्डली को जागृत करने में सहायता करता हैं । स्त्री रोग जैसे गर्भाशय संबंधीत रोग शरीर के सभी प्रवाही और रक्त संबंधी बीमारियां, अनिद्रा, दिमाग, बांयी आँख की खराबी, खून की कमी, जलसम्बन्धी रोग, गुर्दा कष्ट, मासिक धर्म रोग, स्मृति-भ्रंश इत्यादि रोग होते हैं। इसके दुष्प्रभाव से दरिद्रता तथा मस्तिष्क विकार भी होते हैं । जिन्हें ये रूद्राक्ष दूर कर सकता है|

तीनमुखी रूद्राक्ष : -

मंगल ग्रह की प्रतिकूलता से उत्पन्न इन सभी रोगों के निदान और निवारण के लिए तीनमुखी रूद्राक्ष आवश्यक रूप से धारण करना चाहिए। वृश्चिक और मेष राशि वालो के लिए तीनमुखी रूद्राक्ष अत्यन्त ही भाग्योदयकारी है।

चारमुखी रूद्राक्ष : -

बुध ग्रह विद्या , गणित , ज्ञान, गाल ब्लाडर , नाड़ी संस्थान आदि का कारक है। इसकी प्रतिकुलता से अपस्मार , नाक, कान तथा गले के रोग, नपुंसकता, हकलाना, सफेद दाग, मानसिक रोग , मन की अस्थिरता, त्वचारोग, कोढ़,  पक्षाघात  पीतज्वर , नासिका रोग , दमा आदि रोग होते हैं। इन सभी के निदान के लिए चारमुखी रूद्राक्ष धारण करना लाभप्रद हैं। 

पाँचमुखी रूद्राक्ष : -

बृहस्पति बुरे प्रभाव में हो मोटापा, उदर गांठ, अत्यधिक शराब सेवन, एनिमिया, पिलीया, चक्कर आना, व मांस पेशियों के हठीले दर्द  का सामना करना पड़ता है| जिनके निदान के लिए पंचमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।  धनु और मीन राशि वाले तथा व्यापारियों को पंचमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। पुखराज से यह कहीं अधिक गुणकारी और सस्ता है|

छः मुखी रूद्राक्ष : -

कोढ़, नपुंसकता और मंद कामेच्छा, पथरी और किडनी सम्बन्धि रोग, मुत्र रोग, शुक्राणु की कमी व गर्भावस्था के रोग आदि में छः मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। वृष और तुला राशि वाले के लिए विशेष लाभकारी है। 

सातमुखी रूद्राक्ष : -

जन्म कुण्डली में यदि नवें घर तथा नवें घर के स्वामी से किसी भी तरह संबद्ध हो जाता हैं तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय कठिनाई से व देरी से होता हैं। शनि और शनि की ढैया और साड़ेसाती से पीड़ित लोगों को शनि ग्रह को शान्त करने के लिए सातमुखी रूद्राक्ष धारण करना लाभदायी हैं।

आठमुखी रूद्राक्ष : -

चर्मरोग , फेफड़े की बीमारी , पैरों का कष्ट, गुप्तरोग, मानसिक अशांति, सर्पदंश एवं तांत्रिक विद्या से होने वाले व मोतियाबिन्द आदि रोगों का कारक राहू ग्रह हैं। आठमुखी रूद्राक्ष धारण करने से उक्त सभी रोगों एवं राहू की पीड़ाओं से मुक्ति मिलती हैं।

नौमुखी रूद्राक्ष : -

केतू के कुपित होने पर फेफड़े का कष्ट , ज्वर , नेत्र पीड़ा, बहरापन, अनिद्रा, संतानप्राप्ति, उदर कष्ट, शरीर में दर्द दुर्घटना एवं अज्ञात कारणों से उत्पन्न रोग परेशान करते हैं। केतू को मोक्ष का कारक भी माना गया हैं। केतू ग्रह की शांति के लिए लहसुनिया रत्न का प्रयोग किया जाता हैं किन्तू नौमुखी रूद्राक्ष लहसुनियां रत्न से कई गुना ज्यादा प्रभावी हैं।

दसमुखी रूद्राक्ष : -

इस रूद्राक्ष का प्रभाव ग्रहातंरों तक जाता हैं और ग्रहातंरों से आता हैं। यह समस्त सुखों को देने वाला शक्तिशाली और चमत्कारी रूद्राक्ष हैं। इसके उपयेग से कफ, फैफड़े सम्बन्धि रोग, चिंता, अशक्ति, हृदय रोग आदि में लाभ होता है।

ग्यारहमुखी रूद्राक्ष : -

स्वास्थ्य को सुद्रण बनाने वाले साधकों के लिए यह भगवान शिव का अनमोल उपहार है।

इसके प्रयोग से स्त्रीरोग, स्नायुरोग, पुराने हठीले रोगों से छुटकारा, शुक्राणु की कमी व संतानप्राप्ति में लाभ होता हैं ।

बारहमुखी रूद्राक्ष : -

बारहमुखी रूद्राक्ष धारणकर्ता को तेजस्वी और यशस्वी बना देता हैं। गुणों में यह माणिक्य से अधिक प्रभावी तथा मूल्य में अधिक सस्ता है। इसके प्रयोग द्वारा सिरदर्द , गंजापन, बुखार, आंखों के रोग, हृदय रोग, दर्द और बुखार, मुत्राशय एवं पित्ताशय की जलन जैसे रोगों में लाभ होता हैं।

तेरहमुखी रूद्राक्ष : -  

हिमालय में स्थित तपस्वी और योगीगण तेरहमुखी रूद्राक्ष की अध्यात्मिक उपलब्धियों से वशीभूत होकर इस रूद्राक्ष को धारण करते हैं। इसके उपयोग से किडनी, नपुंसकता, मुत्राशय के रोग, कोढ़, गर्भावस्था के रोग, शुक्राणु की कमी आदि में आश्चर्यजनक लाभ होता है।

चौदहमुखी रूद्राक्ष :-

इसके प्रयोग से निराशापन, मानसिक रोग, अस्थमा, पक्षाघात, वायु के रोग, बहरापन, कैंसर, चित्तभ्रम, थकान और पैरों के रोगों में लाभ होता है।

गौरी शंकर रूद्राक्ष :-

इसके उपयोग से पारिवारिक एकता, आत्मिक ज्ञान, मन और इंद्रियों पर काबू, कुण्डलिनी जागरण एवं पति-पत्नि की एकता में वृद्धि होती हैं।

गणेश रूद्राक्ष :-

ये रूद्राक्ष त्वचा रोग, हिचकी, गुप्तरोग, मानसिक अशांति, सर्पदंश, कैंसर एवं तांत्रिक विद्या से होने वाले दुष्परिणामों को दूर करता है।

 

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13 Jun, 2018 Blog

Astromitram : B Se Shuru Hoga Naam,To Ye Hoga Khaas / B से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास

https://youtu.be/HjC8Xl7a1Og 

B से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास:-

यदि किसी व्यक्ति के नाम का पहला अक्षर इंग्लिश के बी से शुरू होता है तो वे वैचारिक स्तर पर काफी प्रभावी होते हैं। ये लोग अपने विचारों और सोच से सभी का दिल जीत लेते हैं। इन लोगों से बहस में जीत पाना बहुत मुश्किल होता है। कई बार छोटी-छोटी बातों पर भी ये लोग बहस कर सकते हैं। सामान्यत: इस प्रकार के लोग अंतर्मुखी होते हैं और अपने विचारों में ही डूबे रहते हैं। ये लोग हर किसी पर आसानी से भरोसा भी नहीं करते हैं और इनके दोस्तों की संख्या भी कम ही रहती है। अपने आत्मविश्वास के बल पर इन्हें जीवन में कई महत्वपूर्ण उपब्धियां हासिल होती हैं।

 इस अक्षर वाले लोग संवेदनशील और रोमांटिक होते है, इन पर छोटी-छोटी बातें काफी असर डालती हैं, इन्हें मनाना काफी आसान होता है। बी अक्षर वाले व्यक्ति सेक्स लाइफ पर काफी भरोसा करते हैं इसलिए अक्सर इस नाम के व्यक्ति प्रेम विवाह करते हैं। ये सौंदर्य प्रेमी, प्रकृति से स्नेह रखने वाले होते हैं। इनके लिए पैसा भी काफी महत्वपूर्ण होता है। ये लेन-देन भी बहुत करते हैं। ये आमतौर पर हिम्मती होते हैं। इसलिए अक्सर इस नाम के लोग सेना या दूसरे जोखिम भरे क्षेत्र में अपना करियर बनाते हैं। इन्हें अपनी मेहनत पर भरोसा होता है। और आम तौर पर इस नाम के लोग धनवान भी होते है। इनके बड़बोलेपन के कारण इन्हें घमंडी होने की संज्ञा मिल जाती है। इसलिए इनके दोस्त बहुत ज्यादा नहीं होते हैं लेकिन जो होते हैं वो काफी पक्के और गहरे होते हैं | ये लोग बहुत ही सेंसिटिव होते है ऐसे लोगों पर छोटी-छोटी बातें बहुत असर डालती है|  इन्हें मनाना बहुत आसान होता है| ये अपने जीवन में प्रेम विवाह करते हैं| पर  पैसों को अधिक महत्व देते है| ये लोग बहुत साहसी होते हैं और जोखिम भरे क्षेत्रों में करियर बनाना पसंद करते है|

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12 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Cancer Se Bachne Ke upaay / इशान कोण के वास्तुदोष मिटाएं, कैंसर से बचें

https://youtu.be/69bNT_gfp8U

 इशान कोण के वास्तुदोष मिटाएं, कैंसर से बचें:-

जिन लोगों को कैंसर होते हैं उनके घर में कम से काम दो वास्तु दोष जरूर होते हैं। वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार शरीर के किस हिस्से में कैंसर होगा यह निर्भर करता है घर के दूसरे वास्तुदोष पर जो कि, घर के दक्षिण पश्चिम दिशा या आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य कोण में होते हैं। किसी भी घर में यदि कैंसर का मरीज हो तो योग्य डॉक्टर से उचित इलाज अवश्य करवाते रहें। इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें, परन्तु साथ ही किसी योग्य वास्तु कंसलटेन्ट को बुलाकर मकान को अवश्य दिखलायें ताकि, मकान में जो वास्तु दोष है उन्हें दूर कर उससे होने वाले कुप्रभाव को समाप्त किया जा सके|

कई घरों के वास्तुविश्लेषण के बाद पंडित दयानंद शास्त्री ने ये अध्ययन तैयार किया है| जिसके अनुसार:-

  • ईशान कोण और पश्चिम नैऋत्य में वास्तु दोष होने से आँत का कैंसर होता है|  ईशान कोण का दूषित होना और पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्त्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचे या बढ़ा हुआ होने इसका एक कारण है।
  • ब्रेन कैंसर

वायव्य, उत्तर, ईशान व पूर्व दिशा का ऊंचा होना एवं आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य पश्चिम में भूमिगत पानी का स्रोत होना या नीचा होना या बढ़ा हुआ होना, इसका कारण बनता है।

  • ब्लड कैंसर

 ईशान कोण दूषित होना, नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्त्रोत जैसे टंकी, बोर,कुओं इत्यादि का होना या नीचा होना व अन्य दिशाओं की तुलना में ईशान कोण ऊंचा होने पर होता है।

  • पेट का कैंस

ईशान कोण दूषित होना पश्चिम और, पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्त्रोत होना, यही भाग किसी भी प्रकार ईशान कोण की तुलना में नीचा या बढ़ा हुआ होने पर होता है।

  • किडनी का कैंसर

ईशान कोण का दूषित होना, पश्चिम और नैऋत्य कोण में पानी का स्त्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा होने पर ।

  • गर्भाशय (यूट्रस) का कैंसर

महिलाओं को गर्भाशय का कैंसर तब होता है जबकि घर के दक्षिण या दक्षिण नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होता है। इसके अलावा दक्षिण या दक्षिण नैऋत्य का भाग किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होता है। इसका कारण ईशान कोण दूषित होना भी हो सकता हैं |

  • छाती एवं फैफड़े का कैंसर

 ईशान कोण का दूषित होना या उत्तर एवं उत्तर वायव्य का बंद होना पश्चिम और पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्त्रोत होना, किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होने पर ।

  • सिर, गले व मुंह का कैंसर

आवश्यकता से अधिक ऊँचा और बढ़ा हुआ ईशान कोण होना एवं पश्चिम अधिक नीचा होने पर ।

इन सब दोषों को दूर करने के लिए किसी विद्वान वास्तु विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें|

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12 Jun, 2018 Blog

Astromitram : A se Start Hoga Naam,To Ye Hoga Khaas / A से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास

https://youtu.be/GjFSwu8usgg

A से शुरू होगा नाम, तो व्यक्ति में ये होगा खास:-

ए अक्षर:-

अगर किसी लड़की या लड़के का नाम अंग्रेजी के ए अक्षर से शुरू होता है तो ऐसे व्यक्ति प्यार और रिश्तों को काफी महत्व देते हैं लेकिन बहुत ज्यादा रोमांटिक नहीं होते हैं। ए अक्षर वाले सुंदरता को काफी पसंद करते है और खुद भी बहुत सुन्दर होते हैं। इनकी एक खासियत होती है ये अपनी बात सबसे नहीं कहते हैं। इनके जीवन में हर चीज देर से हासिल होती है| लेकिन जब भी सफलता मिलती है तो वो सफलता की चरम सीमा होती है। जीवन संघर्ष से भरा होता है लेकिन ये मंजिल को पा ही लेते हैं। ये धोखेबाज बिलकुल नहीं होते है और ना ही ये धोखेबाजी को पसंद करते हैं। ये मौके की नजाकत को समझने वाले और हालात के हिसाब से फैसले लेने के कारण ये हर दिल अजीज होते हैं। लेकिन इनमें एक दोष होता है ये क्रोधी स्वभाव के होते हैं।

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12 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Jane Kya Hai Ank Jyotish / जानें क्या है अंक ज्योतिष

https://youtu.be/L11gS6Pq56k

जानें क्या है अंक ज्योतिष

ज्योतिष शास्त्र का एक हिस्सा है ‘अंक ज्योतिष’। संख्या शास्त्र, जिसे अंक ज्योतिष या न्यूमरॉलजी भी कहा जाता है, एक पाश्चात्य विद्या है। अंक ज्योतिष के द्वारा न सिर्फ हम अपने स्वभाव की विशेषता जान सकते हैं, बल्कि अपने भविष्य का अंदाजा भी लगा सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि नाम के अंग्रेजी वर्णमाला के हर अक्षर के पीछे एक अंक होता है, जिससे स्वभाव, प्रकृति, गुण दोष आदि पता चलते है ।

A से Z तक के सभी अल्फाबेट्स के लिए अलग-अलग अंक होते है। हर एक अंक का अलग महत्व है, अलग ग्रह स्वामी है। हमारे नाम का पहला अक्षर जिस अंक से संबंधित होता है, हमारा स्वभाव और भविष्य उसी के अनुसार रहता है।

अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार अंक:-

अंक 1- ए, आई, जे, क्यू, वाय के लिए

अंक 2- बी, के, आर के लिए

अंक 3- सी, जी, एल, एस के लिए

अंक 4- डी, एम, टी के लिए

अंक 5- ई, एच, एन, एक्स के लिए

अंक 6- यू, वी, डब्लयु के लिए

अंक 7- ओ, ज़ेड के लिए

अंक 8- एफ, पी के लिए

अंग्रेजी के जिस लेटर से आपका नाम शुरू हो रहा है वो आपका स्वभाव बताएगा| एस्ट्रोमित्रम की अगली कड़ियों मेें एक एक अल्फाबेट की खासियत बताएंगे और भविष्य पर पड़ने वाला उनका प्रभाव भी|

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11 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Aise Kare Pukhraj Ki Pehchan / ऐसे करें पुखराज की पहचान

https://youtu.be/FMpeZOCVm0Y 

ऐसे करें पुखराज की पहचान

एस्ट्रोमित्रम की पिछली कड़ी में हमने आपको बताया कि पुखराज पहनने का क्या महत्व है|  अब हम आपको बताते हैं कि शुद्ध पुखराज की पहचान कैसे हो|  क्योंकि पुखराज पहनने से पहले उसकी सही पहचान होना भी जरूरी है| 

पुखराज रत्न को गोबर से रगड़ने पर यदि चमक काम अथवा फीकी हो जाय तो रत्न नकली है, परन्तु ऐसा करने पर यदि चमक में और वृद्धि हो जाय, तो पुखराज रत्न असली है।

अधिक ताप पर चटके अथवा टूटे नहीं तो असली है एवं अधिक ताप पर तपाये जाने पर यदि रंग बदलकर एकदम सफेद हो जाय तो असली है।

किसी विषैले जन्तु द्वारा दंशित स्थान पर असली पुखराज रत्न रखने से विष का प्रभाव धीमा हो जाता है।

पुखराज को दूध में एक दिन, एक रात तक छोड़ रखें। बाद में निकालकर देखें। यदि उसकी तेजस्विता पूर्व की भाँती है, तो पुखराज रत्न असली है किन्तु यदि चमक कम अथवा फीकी पड़ने पर पुखराज के नकली होने का आभास प्राप्त होता है।

धूप में यदि पुखराज रत्न को सफेद कपड़े पर रख दिया जाए तो असली पुखराज रत्न से पीली आभा छिटकती है। 

पुखराज को 5 दिनों के लिए दूध में डाल दें। 5 दिन बाद यदि पुखराज का रंग वैसा का वैसा है तो समझ लें रत्न सही है। जबकि नकली रत्न बदरंग हो जाएगा। इसके अतिरिक्त दुरंगा, खड्डेदार, श्वेतबिंदु, काला धब्बायुक्त, खुरदुरा और लाल रंग का पुखराज कभी धारण नहीं करना चाहिए।

दोष युक्त पुखराज को गलती से भी धारण ना करें। प्रभाहीन, धारीदार, लाल छीटें, श्याम बिन्दु, श्वेत बिन्दु, रक्तक बिन्दु, गड्ढेदार, छीटेदार, खड़ी रेखा से युक्त, अपारदर्शी तथा रक्ताभ धब्बों से युक्त पुखराज दोषी होता है। यही नहीं, इस प्रकार का पुखराज धारण करना अनिष्टकारी भी रहता है।

अब ये भी जानिए कि किन रत्नों के साथ पुखराज नहीं पहना जाना चाहिए|

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की पुखराज के साथ पन्ना, नीलम, हीरा, गोमेद व लहसुनियॉ नहीं पहनना चाहिए अन्यथा लाभ की जगह हानि होती है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुम्भ लग्न वाले जातकों को पुखराज नहीं पहना चाहिए। इन लग्नों में बृहस्पति ग्रह अकारक होता है, इसलिए पुखराज पहनने से हानि होती है। 

अगर किसी व्यक्ति के पास पैसों की समस्या है तो वह सुनहला भी धारण कर सकता है, हालांकि ये पुखराज जैसा असर तो नहीं दिखाएगा लेकिन काफी सारी समस्याओं का निदान करता है। पीतल या तांबे की धातू में सुनहला को जड़वाकर पुखराज जैसी विधि से ही पहनने से यह लगभग पुखराज जैसा ही काम करता है।

एस्ट्रोमित्रम की अगली कड़ी में आपको बताएंगे पुखराज के वो फायदे जो आपको सेहत की नेमत देते हैं|

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11 Jun, 2018 Blog

Astromitram : Janiye Kyu Pehanne Moonga / जानिए क्यों पहनें मूंगा

https://youtu.be/2zrsEdipEh0

जानिए क्यों पहनें मूंगा?

मूंगा रत्न का पहला लाभ दुश्मनों और शत्रुओं पर विजय है। चूंकि मंगल ग्रह युद्ध का देवता है, इससे बाधाओं और दुश्मनों पर काबू पाने के लिए आवश्यक हिम्मत मिलती है और व्यक्ति के लिए जीत सुनिश्चित करता है।

इस रत्न को सोने/चॉदी या तॉबे में पहनने से बच्चों को नजर नहीं लगती एंव भूत-प्रेत व बाहरी हवा का भय खत्म हो जाता है। 

मूंगा धारण करने से ईर्ष्या दोष समाप्त होता है, साहस व आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है। 

मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों को मूंगा पहनने से अत्यन्त लाभ होता है। 

उदासी व मानसिक अवसाद पर काबू पाने के लिए मूंगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए।

पुलिस, आर्मी, डाक्टर, प्रापर्टी का काम करने वाले, हथियार निर्माण करने वाले, सर्जन, कम्प्यूटर साप्टवेयर व हार्डवेयर इन्जीनियर आदि लोगों को मूंगा पहनने से विशेष लाभ होता है। 

अगर किसी बच्चे को आलस्य बहुत सता रहा है तो उसे मूंगा पहनाने से उसका आलस्य दूर भाग जाता है। 

यदि किसी व्यक्ति को रक्त से सम्बन्धित कोई दिक्कत है तो उसे मूंगा पहनने से फायदा मिलता है।

मिर्गी तथा पीलिया रोगियों के लिए मूंगा पहनना अत्यन्त हितकारी साबित होता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की यह मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य स्वास्थ्य में भी मदद करता है। अपनी मजबूत प्रकृति के कारण, यह मनोबल को बढ़ावा देने के लिए मन में उदासी दूर करने और इच्छाशक्ति को पुनर्जीवित करने में मदद करता है। 

मूंगा का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह लालच, बुरी नज़र और काला जादू से रक्षा करता है।

जो लोग भारी कर्ज में हैं,  मूंगा धारण कर वे अपने ऋण से छुटकारा पाते हैं|

मूंगा रत्न कि भस्म और पिष्टी का प्रयोग आयुर्वेद में हड्डियों को मजबूत और रक्त कि सफाई के लिए किया जाता रहा है|

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की जिन व्यक्तियों के अंदर फॉस्फोरस तत्व की कमी हो , कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट कि कमी हो मूंगा रत्न उन्हें लाभ देता है , अगर आपके हाथ में ऊपरी और निचला मंगल कटे - फटे , चौड़े या दबे हुए है तब आमतौर पर मूंगा रत्न ठीक रहता है , परन्तु आपको मूंगा रत्न सलाह के बाद ही धारण करना चाहिए । 

 अगर मंगल आपका मुख्या गृह है , सातवे , नौवे या दसवे गृह में है तो मूंगा ज्योतिषी सलाह के बाद ही धारण करें ।

अगर कोई व्यक्ति खांसी की समस्या से पीड़ित तो उससे मूंगा पत्थर पहनना चाहिए है। सभी खांसी संबंधी रोगों से यह पत्थर बचता है।


 

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