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24 May, 2018 Blog

Astromitram : Ganga Dusshera Ki Pooja Vidhi / गंगा दशहरा की पूजा विधि

गंगा दशहरा 2018 : 24 मई (गुरुवार)

प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है| इस वर्ष गंगा दशहरा 24 मई  2018 ,के दिन मनाया जाएगा| स्कंदपुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी पर जाकर स्नान,ध्यान तथा दान करना चाहिए| इससे वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है| यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता तब वह अपने घर पास की किसी नदी पर स्नान करें| ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को संवत्सर का मुख कहा गया है| इसलिए इस इस दिन दान और स्नान का ही अत्यधिक महत्व है| 

वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, बुधवार के दिन, हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी| इस पवित्र नदी में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते है| किसी भी नदी पर जाकर अर्ध्य (पू‍जादिक) एवम् तिलोदक (तीर्थ प्राप्ति निमित्तक तर्पण) अवश्य करें। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, दशमी को गंगावतरण का दिन मन्दिरों एवं सरोवरों में स्नान कर पवित्रता के साथ मनाया जाता है। इस दिन मथुरा में पतंगबाज़ी का विशेष आयोजन होता है।

गंगा दशहरे का महत्व

भगीरथी की तपस्या के बाद जब गंगा माता धरती पर आती हैं उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की  दशमी थी| गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा| इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो गंगा स्तोत्र पढ़ता है, वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है| स्कंद पुराण में दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र दिया हुआ है| गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जन जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए| ऎसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है| गंगा दशहरे का फल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है| इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं| इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है|

गंगा दशहरा व्रत कथा

एक बार महाराज सगर ने व्यापक यज्ञ किया। उस यज्ञ की रक्षा का भार उनके पौत्र अंशुमान ने संभाला। इंद्र ने सगर के यज्ञीय अश्व का अपहरण कर लिया। यह यज्ञ के लिए विघ्न था। परिणामतः अंशुमान ने सगर की साठ हजार प्रजा लेकर अश्व को खोजना शुरू कर दिया। सारा भूमंडल खोज लिया पर अश्व नहीं मिला। फिर अश्व को पाताल लोक में खोजने के लिए पृथ्वी को खोदा गया। खुदाई पर उन्होंने देखा कि साक्षात्‌ भगवान 'महर्षि कपिल' के रूप में तपस्या कर रहे हैं। उन्हीं के पास महाराज सगर का अश्व घास चर रहा है। प्रजा उन्हें देखकर 'चोर-चोर' चिल्लाने लगी।

महर्षि कपिल की समाधि टूट गई। ज्यों ही महर्षि ने अपने आग्नेय नेत्र खोले, त्यों ही सारी प्रजा भस्म हो गई। इन मृत लोगों के उद्धार के लिए ही महाराज दिलीप के पुत्र भगीरथ ने कठोर तप किया था। भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उनसे वर मांगने को कहा तो भगीरथ ने 'गंगा' की मांग की।

इस पर ब्रह्मा ने कहा- 'राजन! तुम गंगा का पृथ्वी पर अवतरण तो चाहते हो? परंतु क्या तुमने पृथ्वी से पूछा है कि वह गंगा के भार तथा वेग को संभाल पाएगी? मेरा विचार है कि गंगा के वेग को संभालने की शक्ति केवल भगवान शंकर में है। इसलिए उचित यह होगा कि गंगा का भार एवं वेग संभालने के लिए भगवान शिव का अनुग्रह प्राप्त कर लिया जाए।' महाराज भगीरथ ने वैसे ही किया। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने गंगा की धारा को अपने कमंडल से छोड़ा। तब भगवान शिव ने गंगा की धारा को अपनी जटाओं में समेटकर जटाएं बांध लीं। इसका परिणाम यह हुआ कि गंगा को जटाओं से बाहर निकलने का पथ नहीं मिल सका।

अब महाराज भगीरथ को और भी अधिक चिंता हुई। उन्होंने एक बार फिर भगवान शिव की आराधना में घोर तप शुरू किया। तब कहीं भगवान शिव ने गंगा की धारा को मुक्त करने का वरदान दिया। इस प्रकार शिवजी की जटाओं से छूट कर गंगाजी हिमालय की घाटियों में कल-कल निनाद करके मैदान की ओर मुड़ी।

इस प्रकार भगीरथ पृथ्वी पर गंगा का वरण करके बड़े भाग्यशाली हुए। उन्होंने जनमानस को अपने पुण्य से उपकृत कर दिया। युगों-युगों तक बहने वाली गंगा की धारा महाराज भगीरथ की कष्टमयी साधना की गाथा कहती है। गंगा प्राणीमात्र को जीवनदान ही नहीं देती, मुक्ति भी देती है। इसी कारण भारत तथा विदेशों तक में गंगा की महिमा गाई जाती है।

गंगा दशहरा की पूजा विधि

इस दिन पवित्र नदी गंगा जी में स्नान किया जाता है| यदि कोई मनुष्य वहाँ तक जाने में असमर्थ है तब अपने घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मैया का ध्यान करते हुए स्नान कर सकता है| गंगा जी का ध्यान करते हुए षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए| गंगा जी का पूजन करते हुए निम्न मंत्र पढ़ना चाहिए :- "ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:"

इस मंत्र के बाद "ऊँ नमो भगवते ऎं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा" मंत्र का पाँच पुष्प अर्पित करते हुए गंगा को धरती पर लाने भगीरथी का नाम मंत्र से पूजन करना चाहिए| इसके साथ ही गंगा के उत्पत्ति स्थल को भी स्मरण करना चाहिए| गंगा जी की पूजा में सभी वस्तुएँ दस प्रकार की होनी चाहिए जैसे दस प्रकार के फूल, दस गंध, दस दीपक, दस प्रकार का नैवेद्य, दस पान के पत्ते, दस प्रकार के फल होने चाहिए| यदि कोई व्यक्ति पूजन के बाद दान करना चाहता है तब वह भी दस प्रकार की वस्तुओं का करता है तो अच्छा होता है लेकिन जौ और तिल का दान सोलह मुठ्ठी का होना चाहिए| दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को देनी चाहिए| जब गंगा नदी में स्नान करें तब दस बार डुबकी लगानी चाहिए| ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है| इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं| इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है|

गंगा दशहरा से जुड़ी हुई धार्मिक मान्यताएं

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को सोमवार तथा हस्त नक्षत्र होने पर यह तिथि घोर पापों को नष्ट करने वाली मानी गई है। हस्त नक्षत्र में बुधवार के दिन गंगावतरण हुआ था, इसलिए यह तिथि अधिक महत्त्वूपर्ण है। गंगाजी की मान्यता हिन्दू ग्रंथों में बहुत है और यह भारतवर्ष की परम पवित्र लोकपावनी नदी मानी जाती है। इस दिन लाखों लोग दूर-दूर से आकर गंगा की पवित्र जलधारा में स्नान करते हैं बहुत से स्थानों में इस दिन शर्बत की प्याऊ लगाई जाती है, जहाँ हज़ारों नर-नारी शीतल शर्बत पीकर ग्रीष्म ऋतु में अपने हृदय को शीतल करते हैं। आज के दिन गंगाजी के विभिन्न तटों और घाटों पर तो बड़े-बड़े मेले लगते ही हैं, अन्य पवित्र नदियों में भी लाखों व्यक्ति स्नान करते हैं। सम्पूर्ण भारत में पवित्र नदियों में स्नान के विशिष्ट पर्व के रूप में मनाया जाता है यह गंगा दशहरा। आज के दिन दान देने का भी विशिष्ट महत्त्व है। यह मौसम भरपूर गर्मी का होता है, अत: छतरी, वस्त्र, जूते-चप्पल आदि दान में दिए जाते हैं।आज के दिन यदि गंगाजी अथवा अन्य किसी पवित्र नदी पर सपरिवार स्नान हेतु जाया जा सके तब तो सर्वश्रेष्ठ है, यदि संभव न हो तब घर पर ही गंगाजली को सम्मुख रखकर गंगाजी की पूजा-अराधना कर ली जाती है। इस दिन जप-तप, दान, व्रत, उपवास और गंगाजी की पूजा करने पर सभी पाप जड़ से कट जाते हैं- ऐसी मान्यता है। अनेक परिवारों में दरवाज़े पर पाँच पत्थर रखकर पाँच पीर पूजे जाते हैं। इसी प्रकार परिवार के प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से सवा सेर चूरमा बनाकर साधुओं, फ़कीरों और ब्राह्मणों में बांटने का भी रिवाज है। ब्राह्मणों को बड़ी मात्रा में अनाज को दान के रूप में आज के दिन दिया जाता है। आज ही के दिन आम खाने और आम दान करने को भी विशिष्ट महत्त्व दिया जाता है।

दशहरा के दिन दशाश्वमेध घाट में दस बार स्नान करके शिवलिंग का दस संख्या के गंध, पुष्प, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि को जागरण करने से अनंत फल प्राप्त होता है| इसी दिन गंगा पूजन का भी विशिष्ट महत्त्व है। इस दिन विधि-विधान से गंगाजी का पूजन करके दस सेर तिल, दस सेर जौ और दस सेर गेहूँ दस ब्राह्मणों को दान दें। परदारा और परद्रव्यादि से दूर रहें तथा ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ करके दशमी तक एकोत्तर-वृद्धि से दशहरा स्तोत्र का पाठ करें। इससे सब प्रकार के पापों का समूल नाश हो जाता है और दुर्लभ सम्पत्ति प्राप्त होती है।

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22 May, 2018 Blog

Astromitram : Kaise kare bhojan Dwara Graho Ko Mazbut / कैसे करें भोजन द्वारा ग्रहों को मजबूत

https://youtu.be/aOMyhJbfuFY

 

 

भोजन से ग्रहों को साधने की इस कड़ी में अब आपको बताते हैं चंद्र ग्रह के उपाय|

चंद्रमा कुपित हो कर बुरे परिणाम देने लगे तो कभी भूलकर भी मांसाहार मत लीजियेगा।

जल पिएं विटामिन c जरूर लें ,चंद्रमा जब भी खराब होगा शरीर में जल की कमी कर देगा और बहुत नुकसान देगा ,यदि ऐसे में चंद्रमा की महादशा भी शुरू हो जाए तो ठंडी वस्तुओं का प्रयोग एकदम बंद कर दे ,और फ्रिज की रखी हुई चीजें जिसमे केला आता है ,चावल आता है ,दही आता है ऐसी वस्तुओ का प्रयोग एकदम बंद कर दें ,या वो चीजे खाना बंद कर दीजिए जिसमें पिपरमिंट होता है या मेंथोल होता है , नहीं तो आप काफी परेशानी में आते हैं ,खासतौर पर एकादशी को चावल छुएं भी नहीं।

यदि जन्म कुंडली में वृष, कर्क, तुला ,धनु , मकर ,कुम्भ का चंद्रमा हो तो रात को दूध पीना सामान्यतः अच्छे परिणाम नहीं देता रात को दूध वही लोग पिये जिनका पाचन तंत्र बहुत मजबूत हो और भोजन करने के 3-3.5 घंटे बाद वो सोते हों ,अन्यथा रात को दूध न पिएं| सर्वोत्तम तो ये है की यदि सूर्यास्त के 1 घंटे के अन्दर आप भोजन कर लेते हैं तो ही रात को दूध पिएं। चंद्रमा या शुक्र ख़राब हो तो कफ अधिक होगा, और रात का दूध आपको नुकसान ही देगा | यदि सप्तम में चंद्रमा हो और विवाह में मांसाहार और शराब का सेवन करते हैं, तो विवाह में जीवन भर परेशानी रहेगी|

यदि आपको चोट लग जाये और घबराहट हो तो एक कप गरम दूध ले कर उसमें एक चुटकी हल्दी डाल के पिएं। इन उपायों से चंद्र के दोष दूर होंगे।

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22 May, 2018 Blog

Astromitram : June Ka Rashifal / जून का राशिफल

https://youtu.be/OsFf42a3S74

 

 

यह राशिफल जुलाई 2018  का फल चन्द्रराशि के आधार पर लिखा गया है। जो इस प्रकार है|

मेष-

मेष राशि के स्वामी मंगल के वक्री होने से पारिवारिक एवं घरेलू उलझने बढ़ेंगी।  अत्यधिक क्रोध एवं उत्तेजना से कोई बना हुआ कार्य बिगड़ सकता है अतः गुस्से पर पूर्ण नियंत्रण रखे।  पूर्व नियोजित  योजनाओं में विघ्न बाधाओं का सामना करना पर सकता है। कार्य के प्रति ऊर्जावान दिखेंगे।  कार्यस्थल पर जोश में होश न खोये। किसी से लड़ाई-झगड़ा न करे ऐसे अवसर आ सकते हैं।  अवांछित स्थान परिवर्तन हो सकता है। यदि आप स्त्री जातक है और गर्भधारण कर चुकी है तो गर्भपात हो सकता है अतः डॉ से सलाह लेते रहें| 

उपाय-- शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना शुभ रहेगा।

वृष -

वृष राशि वालों के चतुर्थ भाव में शुक्र ग्रह का संचार करने  से परिस्थितियों में विशेष रूप से परिवर्तन होंगे । घर में वाहन की खरीद बिक्री हो सकती है। विपरीत परिस्थितियों में विकास संभव है। आय कम और खर्च अधिक  रहेगा । भाई बंधुओं से मतभेद हो सकता है। दाम्पत्य जीवन में नई चेतना का संचार होगा। बंधु बांधव का सहयोग बढ़ेगा ।

 उपाय---श्रावण महत्व का पाठ करें

मिथुन -

द्वितीय भाव में बुध और राहु के विराजमान होने से किसी वस्तु विशेष को प्राप्त करने की चाहत बढ़ेगी। मंगल की दृष्टि होने से आर्थिक क्षेत्र में विकास के अवसर बढ़ेंगे। साझेदारी में कोई काम करने का मौका मिल सकता है जल्दबाजी में कोई भी फैसला नहीं करे यदि आप ऐसा करते हैं तो विभिन्न परेशानियों  का सामना करना पड़ेगा। धन हानि का कहीं न कहीं संयोग बन रहा है अतः अविवेकता पूर्वक लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है । 

उपाय--संकट नाशन गणेश स्रोत का नित्य पाठ करें

कर्क -

इस समय बुध व्यय भाव का स्वामी होकर लग्न में रहेगा परिणाम स्वरूप आर्थिक  समस्या का सामना करना पड़ेगा।  बुध के साथ राहु ग्रह भी बैठा है इस कारण अनियोजित खर्च बढ़ेगा।मन बुद्धि में हमेशा भ्रम की स्थिति बनी रहेगी । छोटी-छोटी बात को लेकर क्रोध बढ़ेगा।  स्वास्थ्य को लेकर कुछ समस्या आ सकती है। मित्र वर्ग से सावधान रहें।  किसी  भी नवीन कार्य में धन का इन्वेस्टमेंट ना करें।  

उपाय- सोमवार का व्रत करें अवश्य ही लाभ होगा।

सिंह -

महीना के प्रारम्भ में लग्न के स्वामी सूर्य के लाभ भाव में होने से लाभ का  दौर चलते रहेगा परन्तु उत्तरार्ध में व्यय भाव में होने से खर्च अधिक बढ़ जाएगा। यदि शादी के योग्य हो गए है तो यह बहुत अच्छा समय है परिणय सूत्र में बंध सकते हैं।  मंगल वक्री होने से सिंह राशि  के जातक में क्रोध बढ़ेगा।सिरदर्द तथा रक्त विकार हो सकता है।  परिवार में कलह एवं चोट आदि का भय बना रहेगा।  

उपाय- दुर्गा सप्तसती का पाठ करें

कन्या -

इस मास लग्नेश बुध के लाभ स्थान में राहु के साथ होने से कार्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण लोगों के साथ संपर्क बढ़ेंगे।  नवीन कार्य की योजना बनेगी परंतु क्रियान्वयन में अभी विलंब रहेगा। प्रॉपर्टी में कोइत  इन्वेस्टमेंट हो सकता है।  महीना के उत्तरार्ध से आर्थिक उलझन आएँगी।  खर्च अधिक के साथ साथ घरेलू परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।  

पाय--शिव की स्तुति करें

तुला -

लग्नेश शुक्र का लाभ स्थान में संचार करना लाभ का संकेत दे रहा है  अतः लाभ के लिए किये गए प्रयास सार्थक  होंगे।  दिनांक 5 जुलाई से से किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के सहयोग से कार्य क्षेत्र में सफलता मिलेगी। किसी कार्य के लिए पूर्व में किये गए प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे। 

उपाय--हनुमान चालीसा का पाठ करे.. विशेष लाभ होगा।

वृश्चिक - 

जुलाई महीना में पूर्वार्ध में सूर्य शनि समसप्तक योग तथा मंगल वक्री होने से पारिवारिक एवं आर्थिक उलझनों के कारण मन परेशान रहेगा। नियोजित योजनाओं में विघ्न बाधाएं आ सकती है। परिवार में मतभेद हो सकता है तथा कठिन परिस्थितियों के बावजूद आय के साधन बनते रहेंगे। 

उपाय--प्रतिदिन बजरंग बाण का पाठ करें।

धनु -

इस माह लग्नेश गुरु वक्री होकर लाभ स्थान से कर्म स्थान में होकर कार्य क्षेत्र में सफलता प्रदान करेगा।  संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है साथ ही नौकरी नहीं कर रहे है तो नौकरी मिल भी सकती है।  मंगल की अष्टमस्थ राहु पर नीच दृष्टि रहने से शरीर में कष्ट हो सकता है। दिनांक 16 के बाद अष्टम में सूर्य राहु योग होने से शारीरिक कष्ट क्रोध एवं मानसिक अशांति बनी रहेगी।  

उपाय--बृहस्पतिवार के दिन विष्णु भगवान् की पूजा करे तथा केले के पेड़ में जल दे।

मकर -

इस महीना किसी नवीन कार्य योजना पर विचार विमर्श होगा।  परिवार में तनाव एवं वैचारिक मतभेद होंगे। धार्मिक कार्यों में प्रवृत्ति बनेगी इसी कारण मानसिक समस्या दूर होगी। आर्थिक उलझन के कारण मन चिंतित रहेगा। दुरस्त दूरस्थ यात्राएं होंगी।  महीना के उत्तरार्ध में सूर्य शनि योग समसप्तक होने से स्वास्थ्य में परेशानी यथा सिर दर्द, आंखों में कष्ट हो सकता है।  आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है।

उपाय -- शनि स्तोत्र का पाठ करें।

कुंभ - 

आपको व्यवसाय में संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। कुछ प्रतिष्ठित लोगों से मेलजोल बनाकर रखें यह मेलजोल से आपके रुके हुए कार्यो की सिद्धि हो सकती है। संतान को लेकर चिंता बनी रहेगी।  दिनांक 16 के बाद परिवार में शुभ एवं धार्मिक कार्यों पर खर्च का योग बन रहा है। 

उपाय-- शनि स्तोत्र का पाठ करें।

मीन - 

इस माह परिश्रम और पुरुषार्थ करने पर धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।  किसी निकट सहयोगी की सहायता से बिगड़े हुए कार्यों में सुधार हो सकता है । साझेदारी के कार्यों में उचित लाभ का योग नहीं बन रहा है।  संतान को लेकर परेशान हो सकते है।  आपके मन में हमेशा लाभ- ही- लाभ दिखाई देगा यह स्थिति आपके लिए ठीक नहीं है।  दिवा स्वप्न जागृत हो उठेगा।  

उपाय--व्यापार वृद्धि एवं घर में शांति हेतु सुन्दर काण्ड का पाठ करें।

 

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21 May, 2018 Blog

Astromitram : Sharir Ke Is Anng Ke Fhadakne Se Hogi Dhan Varsha / शरीर के इस अंग के फड़कने से होगी धन वर्षा

https://youtu.be/k326T1KGWVc

 

 

अंगों के स्फुरण के संबंध में एक विचारणीय बिंदू सामने आता है कि आज के इस इंटरनैट युग में क्या अपनी इन पुरानी बातों को महत्व देंगे। यह तो अपनी-अपनी सोच पर निर्भर करता है किंतु यदि छोटी-छोटी बातों और पुरानी मान्यताओं तथा परम्पराओं की गहराई में जाकर उनका अध्ययन करके समझा जाए तो कहीं न कहीं वैज्ञानिक तथ्य भी प्राप्त हो जाएंगे।              

अंग स्फुरणों के फल प्राप्ति के संबंध में कभी-कभी तो फल शीघ्र ही प्राप्त हो जाते हैं किंतु कभी-कभी देर से प्राप्त होते हैं लेकिन यह सत्य है कि प्रत्येक स्फुरण एक सौर मास के अंतर्गत अपने फल को अवश्य ही प्राप्त कर लेता है। 

  • सिर का बायां भाग फड़के तो मनुष्य यात्रा करेगा। दायां भाग फड़के तो धन की प्राप्ति होती है।  
  •  दोनों नेत्र साथ फड़कें तो मित्र या बिछुड़े से मिलन व बाईं आंख नाक की ओर से फड़के तो पुत्री प्राप्ति या शुभ कार्य होंगे। 
  •  मूंछ का दायां भाग फड़के तो विजय होती है तथा बायां भाग फड़कने पर झगड़ा होता है। 
  •  कंठ के फड़कने पर आभूषणों की प्राप्ति हो सकती है।   
  •  ऊपरी पीठ फड़कने पर धन मिलता है। 
  •  पेट का ऊपरी भाग फड़के तो हानिकारक व नीचे का भाग फड़कने पर अच्छा सूचक माना जाता है। 
  •  दायां घुटना फड़के तो स्वर्ण की प्राप्ति होती है।         
  •  यदि किसी व्यक्ति के कंधे अथवा कंठ में स्फुरण हो तो व्यक्ति के भोग विलास के साधनों में वृद्धि होगी। ऐसे धन प्राप्ति की आशा भी होती है जिसके पाने की कोई आशा ही न हो। 
  • वक्ष स्फुरण यदि हो तो विजय प्राप्त होती है। शत्रु नाश होता है, मुकद्दमों में भी विजय श्री मिलती है। बार-बार जिस कार्य में असफलता मिली हो, उसमें भी सफलता प्राप्त होती है।           
  • कटि स्फुरण से आमोद-प्रमोद में वृद्धि होती है। 
  • हृदय स्फुरण से मनोवांछित सिद्धि प्राप्त होती है।  
  • गुदा स्फुरण से वाहन सुख की प्राप्ति होती है।     
  • आंत अथवा आमाशय स्फुरण से रोग मुक्ति की सूचना मिलती है। 
  • पीठ का लगातार स्फुरण आगामी समय में किसी संकट की सूचना देता है।      
  • भुजाओं के फड़कने से मधुर भोजन व धन प्राप्ति की सूचना मिलती है। कहा भी गया है कि यदि किसी कंगाल की भुजा 15 दिनों तक फड़के तो वह करोड़पति हो जाता है।         
  • पैरों की तली से यदि स्फुरण हो तो अनायास ही मान प्रतिष्ठा मिलती है। 
  •  नासिका, लिंग, अधर, कपोल तथा जंघा में किसी भी भाग के स्फुरित होने पर प्रीतिसुख (प्रेम) प्राप्त होता है अर्थात प्रिय मिलन या किसी ऐसे नजदीकी व्यक्ति से मुलाकात होगी जिसके मिलन से सुख प्राप्त होगा। 

  यदि अंग फड़के का फल  शुभ न हो तब अपने इष्ट का ध्यान ,गुरु मंत्र का जाप अवश्य ही करें ताकि उसके अशुभ फलों से आप बच सकें।

 

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21 May, 2018 Blog

Astromitram : Kitchen Ka Vastu Sahi Nahi To Bigadega Swasth / किचिन का वास्तु सही नहीं तो बिगड़ेगा स्वस्थ्य

https://youtu.be/h1xxnvOK-zk

 

 

किचन घर का एक अहम हिस्सा है|जो पूरे घर की सेहत का आधार भी है| खासतौर से उस गृहणी के लिए जिसका अधिकांश समय रसोई में ही बीतता है|

महिलाओं केस्वास्थ्य के लिए किचन का वास्तु सही  होना चाहिए

महिलाओं का अधिकतम समय किचन में ही बीतता है। वास्तुशास्त्रियों के मुताबिक यदि वास्तु सही न हो तो उसका विपरीत प्रभाव महिला पर, घर पर भी पड़ता है। किचन बनवाते समय इन बातों पर गौर करें।

  • किचन की ऊंचाई 10 से 11 फीट होनी चाहिए और गर्म हवा निकलने के लिए वेंटीलेटर होना चाहिए। यदि 4-5 फीट में किचन की ऊँचाई हो तो महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कभी भी किचन से लगा हुआ कोई जल स्त्रोत नहीं होना चाहिए। किचन के बाजू में बोर, कुआँ, बाथरूम बनवाना अवाइड करें, सिर्फ वाशिंग स्पेस दे सकते हैं।
  • किचन में सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा आए। इस बात का हमेशा ध्यान रखें। किचन की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि इससे सकारात्मक व पॉजिटिव एनर्जी आती है।
  • किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व कोना जिसे अग्निकोण (आग्नेय) कहते है, में ही बनवाना चाहिए। यदि इस कोण में किचन बनाना संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम कोण जिसे वायव्य कोण भी कहते हैं पर बनवा सकते हैं।
  • किचन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्लेटफार्म हमेशा पूर्व में होना चाहिए और ईशान कोण में सिंक व अग्नि कोण चूल्हा लगाना चाहिए।
  • किचन के दक्षिण में कभी भी कोई दरवाजा या खिड़की नहीं होने चाहिए। खिड़की पूर्व की ओर में ही रखें।
  •  रंग का चयन करते समय भी विशेष ध्यान रखें। महिलाओं की कुंडली के आधार पर रंग का चयन करना चाहिए।       

किचन के इस वास्तु को ध्यान में रख कर आप पूरे घर की सेहत को संवार सकते हैं|

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21 May, 2018 Blog

Astromitram : Temple in Your Home makes you Rich / घर का मंदिर करेगा धन वर्षा यदि ये करें तो

https://youtu.be/oS64dpHZCPM

 

घर में मंदिर का स्थान नियत करने के लिए वास्तु के नियमों का ध्यान रखना अच्छा रहता है|

घर को बनवाते समय उसमें वास्तु का ध्यान रखना बेहद जरुरी है| वास्तु के अनुसार घर में मंदिर कहाँ स्थित होना चाहिए ये आज हम आपको बताते हैं|

हमारे घरों में मंदिर का होना अनिवार्य है| ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ मंदिर न हो| घर में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. घर बनाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि मंदिर कहां बनाया जाये| वास्तु  के अनुसार मंदिर घर के किस कोने में स्थापित करें, आईये जानें-

घर में मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व मतलब ईशान कोण की तरफ होना चाहिए| आपका घर चाहें किसी भी दिशा में हो पर पूजाघर के लिए सबसे बढ़िया स्थान ईशान कोण ही है| इस दिशा में मंदिर होने से ज्ञान बढ़ता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है|

पूजा करते समय किस दिशा में बैठें?

पूजा करते हुए हमेशा मुख पूर्व की तरफ़ होना चाहिए ऐसा करने से घर में धन आता है और समृद्धि का वास होता है वहीँ अगर आप अभी पढ़ाई कर रहे हैं तो उत्तर दिशा की तरफ़ मुख करके अध्ययन करें|

मंदिर का रंग

वास्तु के अनुसार मंदिर की हल्के पीले रंग की दीवारें होना शुभ होता है|

बैडरूम में मंदिर न बनायें

वास्तु के अनुसार जहाँ आप सोते हैं या जो आपका बैडरूम है उसमे कभी भी मंदिर नहीं बनाना चाहिये. अगर आपके बैडरूम में मंदिर हैं तो रात को मंदिर पर पर्दा डाल दें|

वास्तु के अनुसार क्या न हो मंदिर के आसपास

मंदिर के आस-पास बाथरूम या शौचालय न होना चाहिये, इससे घर में खुशियां और समृद्धि नही आती|

मंदिर के आसपास कभी-भी कूड़ेदान न रखें

 झाड़ू या पोंछा भी मंदिर के पास न रखें| मंदिर के लिए झाड़ू- पोंछा अलग ही रखें| जिन देवताओं के हाथ में दो से ज्यादा अस्त्र हों, ऐसी तस्वीरे और मूर्तियां भी मंदिर में न रखें| वास्तु के अनुसार इसे भी अशुभ माना जाता है|

सीढ़ियों के नीचे कभी भी मंदिर न बनाएं

 इसके अलावा घर में बनाये मंदिर के ऊपर गुंबद न बनाये | वास्तु के अनुसार इसे भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है| तो आप भी  मंदिर के बारे में वास्तु के अनुसार इन बातों का ख़्याल रखें और घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार में वृद्धि करें।

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21 May, 2018 Blog

Astromitram : Cat in your Home Lucky / आपके घर मे बिल्ली होगी शुभ

https://youtu.be/9y0PyCud-FU

 

आजकल घरों में बिल्लियों को पालतू जानवर के रूप में पाला जाता है, लेकिन यह कितना अशुभ है या शुभ इसके बारे में कई धारणाएँ हैं।

बिल्ली का घर में बार-बार आना अशुभ माना गया है। यदि बिल्ली घर में आती है तो जरूर कुछ अशुभ होने वाला है क्योंकि इसें नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।

पॉज़िटिव एनर्जी का नाश करती हैं बिल्ली

बताया गया है कि जहां-जहां बिल्ली जाती वहां सकारात्मक ऊर्जा की हानि होती है। इसलिए तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले बिल्ली को काली शक्ति के प्रतीक के रूप में मानते हैं। यदि किसी घर में बिल्ली बार-बार आती है तो उस घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है।

समस्या लाती हैं बिल्लियाँ

जहां तक हो सके बिल्ली को घर में बार-बार न आने दें यदि फिर भी ऎसा होता है तो उससे निकल नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने के लिए  भगवान की पूजा अथवा कोई हवन का अनुष्ठान करवाएं। माना जाता है की बिल्ली घर में एक के बाद एक नई समस्या लाती है जिस कारण घर का मुखिया तनाव में रहता है।

सावधान हो जाएं

अगर आपके घर में अचानक ही बिल्लियों का आना बढ़ गया है तो इसे सामान्य बात मानकर अनदेखी नहीं करें. यह भविष्य में होने वाली घटना का संकेत हो सकता है. इसलिए सावधान हो जाएं|

क्यों है बिल्ली अशुभ

बल्ली के घर में बार-बार आने से बिल्ली के दूध पी जाने का खतरा ही नहीं रहता बल्कि घर में नकारात्मक उर्जा बढ़ने लगती है. नादर पुराण में बताया गया है कि बिल्लियों की पैरों की धूल जहां भी उड़ती है वहां सकारात्मक उर्जा की हानि होती है यानी शुभ का नाश होता है| तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले बिल्ली को काली शक्ति का प्रतीक मानते हैं और बिल्लियों की पूजा करते हैं. बिल्लियों का पितरों से भी संबंध माना गया है. इसलिए भी बल्लियों का घर में आना अशुभ माना जाता है. बिल्लियों के बारे में मान्यता है कि भोजन करते समय बिल्ली आकर देखे तो कष्ट होता है और बड़ी हानि होती है.

कब भाग जाती है पालतू बिल्ली

कुछ लोगों के यहां कोई अशुभ घटना होने पर बिल्लियों का आना बढ़ने की बजाय. इनकी पालतू बल्ली भी घर से भाग जाती है. इसका कारण यह है कि बिल्लियों की छठी इन्द्री अधिक सक्रिय होती है जिससे उन्हें पूर्वाभास हो जाता है और घर छोड़कर भाग जाती है|

कहीं चाट न ले ब‌िल्ली

बिल्ली का पैर चाटना निकट भविष्य में बीमार होने का संकेत होता है। ब‌िल्ली ऊपर से कूद कर चली जाए तो तकलीफ सहनी पड़ती है।

बिल्ली का रास्ता काटना

मान्यता अनुसार काली बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता है जबकि बिल्ली बाईं ओर रास्ता काटते हुए दाईं ओर जाए। अन्य स्थ‌ित‌ियों में बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ नहीं माना जाता है। जब बिल्ली रास्ता काटकर दूसरी ओर चली जाती है तो अपने पीछे वह उसकी नेगेटिव ऊर्जा छोड़ जाती है, जो काफी देर तक उस मार्ग पर बनी रहती है। खासकर काली बिल्ली के बारे में यह माना जाता है।

बिल्ली का रोना

बिल्ली के रोने की आवाज बहुत ही डरावनी होती है। निश्‍चित ही इसको सुनने से हमारे मन में भय और आशंका का जन्म होता है। माना जाता है कि बिल्ली अगर घर में आकर रोने लगे तो घर के किसी सदस्य की मौत होने की सूचना है या कोई अनहोनी घटना हो सकती है।

बिल्ली का आपस में झगड़ना

बिल्लियों का आपस में लड़ना धनहानि और गृहकलह का संकेत है। यदि किसी के घर में बिल्लियां आपस में लड़ रही हैं तो माना जाता है कि शीघ्र ही घर में कलह उत्पन्न होने वाली है। गृहकलह से ही धनहानि होती है।

बिल्ली से जुड़े कुछ और विश्वास

लोक मान्यता है कि  दीपावली की रात घर में ब‌िल्ली का आना शुभ शगुन होता है। बिल्ली घर में बच्चे को जन्‍म देती है तो इसे भी अच्छा माना जाता है।

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18 May, 2018 Blog

Astromitram : 28 July 2018 Chandra Grahan Ka Mahatv / 28 जुलाई 2018 चंद्रग्रहण का महत्व

https://www.youtube.com/watch?v=s3NbOfMX3hE

 

भारत में 27-28 जुलाई, 2018 की रात को पूर्ण चंद्रग्रहण देख सकेंगे। 27-28 जुलाई को रात 22:44 बजे से पूर्ण चंद्र ग्रहण शुरू होगा, जो मध्यरात्रि के बाद अगले दिन प्रात: 04:58 बजे तक देखा जा सकेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 6 घंटे 14 मिनट तक बना रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया, भारत में इस चंद्र ग्रहण को इसकी पूर्णता में देखा जा सकेगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि आपकी कुंडली में ग्रहण दोष  है तो “ग्रहण दोष शांति पूजा” के लिए यह दिन सर्वोत्तम है. “पितृ दोष शांति ” और  “वैदिक चन्द्र शांति पूजा ” के लिए भी यह दिन उपयुक्त माना जाता है. इस दिन किये गये कार्यों का प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है इसलिए मन्त्र सिद्धि और किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए ग्रहण का  दिन अत्यंत ही उपयुक्त माना गया है | इस दिन  चावल , आटा , दाल , वस्त्र , फल दान सर्वोत्तम होता है|

चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें-

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके नए वस्त्र पहनने चाहिए। ग्रहण के वक्त पहने कपड़ों को दान कर देना चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है। चंद्र ग्रहण के बाद पितरों को दान करना भी शुभ होता है। ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है। ग्रहण काल में तुलसी के पौधे को छूना शुभ नहीं माना जाता।

ग्रहण काल में करने वाले कार्य और निषिद्ध कार्य---

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  ग्रहण के सूतक तथा ग्रहण के समय में स्नान, दान, जप-पाठ, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मंत्र-सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कामों का सम्पादन करना कल्याणकारी होता है।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, पापड़ सेंकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज करना चाहिए और धार्मिक ग्रंथ का पाठ करना चाहिए। इस समय गर्भवती महिलाओं को मन को प्रसन्न रखना चाहिए क्योंकि ऎसा करने से होने वाली संतान स्वस्थ तथा सद्गुणी होगी।

हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी आदि तीर्थों पर ग्रहण समय में स्नान का विशेष माहात्म्य माना गया है।

ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन और ग्रहण मोक्ष के समय श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और सर्वमुक्त होने पर स्नान करें – यही क्रम है।

ग्रहण अथवा सूतक से पहले ही दूध, दही, अचार, चटनी, मुरब्बे आदि में कृशातृण रख देना चाहिए, ये श्रेयस्कर होता है क्योंकि ऎसा करने से ये दूषित नहीं होते। जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा डालना आवश्यक नहीं है। रोग शान्ति के लिए ग्रहण काल में “श्रीमहामृत्युंजय मंत्र” का जाप करना शुभ होता है।

ग्रहण पर विशेष प्रयोग – चाँदी अथवा कांसे की कटोरी में घी भरकर उसमें चाँदी का सिक्का मंत्रपूर्वक डालकर अपना मुँह देखकर छायापात्र मंत्र पढ़ना चाहिए और ग्रहण की समाप्ति पर वस्त्र, फल और दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान करने से रोग से निवृति होती है।

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18 May, 2018 Blog

Astromitram : Janm Kundali Me Karak Akarak Aur Maarak Grah / जन्मकुंडली में कारक अकारक और मारक ग्रह

https://www.youtube.com/watch?v=0MsxwSgdqts

ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है और उसे क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गई है। बुध, चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति क्रमशः उत्तरोत्तर शुभकारी हैं, जबकि सूर्य, मंगल, शनि और राहु अधिकाधिक अशुभ फलदायी हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार कुंडली के द्वादश भावों में षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव अशुभ (त्रिक) भाव हैं, जिनमें अष्टम भाव सबसे अशुभ है। षष्ठ से षष्ठ - एकादश भाव, तथा अष्टम से अष्टम तृतीय भाव, कुछ कम अशुभ माने गये हैं। अष्टम से द्वादश सप्तम भाव और तृतीय से द्वादश - द्वितीय भाव को मारक भाव और भावेशों को मारकेश कहा गया है। केंद्र के स्वामी निष्फल होते हैं परंतु त्रिकोणेश सदैव शुभ होते हैं। नैसर्गिक शुभ ग्रह केंद्र के साथ ही 3, 6 या 11 भाव का स्वामी होकर अशुभ फलदायी होते हैं। ऐसी स्थिति में अशुभ ग्रह सामान्य फल देते हैं। अधिकांश शुभ बलवान ग्रहों की 1, 2, 4, 5, 7, 9 और 10 भाव में स्थिति जातक को भाग्यशाली बनाते हैं। 2 और 12 भाव में स्थित ग्रह अपनी दूसरी राशि का फल देते हैं। शुभ ग्रह वक्री होकर अधिक शुभ और अशुभ ग्रह अधिक बुरा फल देते हैं राहु व केतु यदि किसी भाव में अकेले हों तो उस भावेश का फल देते हैं। परंतु वह केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित होकर त्रिकोण या केंद्र के स्वामी से युति करें तो योगकारक जैसा शुभ फल देते हैं। लग्न कुंडली में उच्च ग्रह शुभ फल देते हैं, और नवांश कुंडली में भी उसी राशि में होने पर ‘वर्गोत्तम’ होकर उत्तम फल देते हैं। बली ग्रह शुभ भाव में स्थित होकर अधिक शुभ फल देते हैं। पक्षबलहीन चंद्रमा मंगल की राशियों, विशेषकर वृश्चिक राशि में (नीच होकर) अधिक पापी हो जाता है। चंद्रमा के पक्षबली होने पर उसकी अशुभता में कमी आती है। स्थानबल हीन ग्रह और पक्षबल हीन चंद्रमा अच्छा फल नहीं देते।

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18 May, 2018 Blog

Astromitram : Kaan Se Jaane Vyaktitv / कान से जानें व्यक्तित्व

https://www.youtube.com/edit?video_id=IzMUkoUHpLw&video_referrer=watch

क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके कान की बनावट आपके अपने व्यक्तित्व का राज बता सकती है| ज्योतिष शास्त्र की ही एक शाखा है सामुद्रिक शास्त्र जो व्यक्ति के शरीर के विभिन्न अंगों को देखकर उसके गुण और अवगुणों के विषय में काफी कुछ बताता है।मानव शरीर में पांच ज्ञानेन्द्रियाँ है जिनमें एक कान भी है आइये कानों के आकार-प्रकार के आधार पर अपने व्यक्तित्व तथा भविष्य को जानते हैं।

समुद्रशास्त्र में लोगों के नाक, कान, आंखे आदि देखकर भी उनके व्यक्तित्व व स्वभाव के  बारे में जाना जा सकता है। मनुष्य के शरीर की प्रकृति, बनावट के आधार पर ज्योतिष उनके चरित्र के बारे में जानते है। वैसे ही समुद्रशास्त्र में कण की आकृति को देखकर भी लोगों के व्यक्तित्व के बारे में जाना जाता है। हमारे कान की बनावट भी हमारे व्यक्तित्व के बारे में काफी कुछ बताते है। सामुद्रिक शास्त्र में कान से जुड़े कई रोचक चीजें है जो आपको शायद ही पता होगी। आइए जानते है कानों से जुड़ी कुछ रोचक बातें|

छोटे कान (Small Ear)

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार ऐसा व्यक्ति धन के मामले में कमजोर होता है।ऐसा व्यक्ति धनहीन, कृपण एवं प्रभावहीन होता है। संदेह और डर की भावना में जीवन व्यतीत करता है।जिस व्यक्ति के कान छोटे होते है वे विश्वास से काबिल होते है। ऐसे लोग हालांकि कंजूस किस्म के होते है जो ज्यादा पैसा खर्च करने में विश्वास नहीं रखते। ऐसे लोगों पर विश्वास किया जा सकता है इसलिए भी लोग इन लोगों को ज्यादा पसंद करते है। ऐसे लोग समाज में मान-सम्मान पाते हैं |ये खर्च भी बहुत कम करना चाहते है या यू कहे की कंजूस होते हैं। इसी कारण ऐसा व्यक्तित धन संचय करने वाला होता है। समाज या परिवार में इनका कोई विशेष प्रभाव नहीं होता है। 

अधिक छोटे कान (Very Small Ear)

यदि किसी व्यक्ति के  कान बहुत ही छोटे हैं तो ऐसे लोग आस्तिक होते है। ये भगवान के ऊपर विश्वास करते हैं। इन्हे अपना काम निकालना बहुत अच्छे तरीके से आता है। ये बहुत ही चंचल स्वभाव के होते है। ऐसे लोग लालच और धोखा देने में भी संकोच नहीं करते है।ऐसे लोग काफी खुशमिजाज होते है। ये लोग भगवान में अधिक विश्वास रखते है। ऐसे लोग जीवन को मौज-मस्ती से जीना पसंद करते हैं। 

लम्बे कान (Long Ear)

यदि किसी व्यक्ति का कान  लम्बा  है तो बहुत ही अच्छा माना गया है। ऐसा व्यक्ति परिश्रमी विचारशील, कर्मठ, तथा व्यावहारिक होता है। ऐसा व्यक्ति बहुत ही समय के पाबंद होते है ये कोई भी काम यथाशीघ्र तथा सही तरीके से करना चाहते है। अधिक लम्बे कान बल-बुद्धि-विद्या का प्रतीक है। ऐसा व्यक्ति धनवान भी होता है।  किसी भी विषय वस्तु पर बड़े ही गहराई के साथ विचार करता है। अधिक लंबे कान बुद्धि, वाक्-चातुर्य तथा व्यवहारकुशलता का प्रतीक हैं। ऐसे लोग मेहनती, कर्मठ होते है। ये लोग पूरी लगन से काम करते है अंत तक काम को पूरा करने में विश्वास रखते हैं।

चौड़े कान (Wide Ear)

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यदि किसी के Ear – कान की चौड़ाई सामान्य से अधिक हो, तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन-यात्रा में सभी प्रकार की सुख-सुविधा का उपभोग करता है। ऐसे लोग अवसर का पूरा फायदा उठाते है। अपने जीवन में सफलता हासिल करते हुए देखे गए हैं।चौड़े कान वाले लोग सुख-समृद्धि पाते है। ऐसे लोग हर अवसर का पूरा फायदा उठाते है। हर काम को लगन से करते है। इतना ही नहीं इन लोगों की आयु भी बहुत लम्बी होती है।

मोटे कान (Thik Ear)

जिन पुरुषों के कान बहुत ही मोटे होते हैं उनमें साहस और नेतृत्व की क्षमता बहुत होती है। ऐसा व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ सकता है या यू कहे की ऐसे व्यक्ति नेता होता हैं या अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़कर काम करने वाले होते।

गजकर्ण कान ( Elephant Type Ear)

जिन पुरुषों के कान हाथी के कान के समान बड़े और लंबे होते हैं वह दीर्घायु होते है साथ ही समाज में उनकी गिनती प्रतिष्ठित और संपन्न वर्ग में होती है। ऐसा जातक अपने परिश्रम के बल पर बहुत आगे बढ़ता है। यदि नौकरी करता है तो एक न एक दिन अधिकारी अवश्य बनता है और यदि व्यापारी है तो अनेक लोगो को नौकरी देने का सामर्थ्य रखने वाला होता है।

बंदर जैसे कान (Monkey Type Ear)

ऐसा व्यक्ति असभ्य की श्रेणी में आता है। वह बहुत ही कामी होता है। ऐसे व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकारयुक्त होते हैं। दुखमय गृहस्थ जीवन भोगते हैं। जीवन में स्थिरता नहीं होती तथा धनहीन होते हैं।  इनका पारिवारिक जीवन संघर्ष और दुःख से व्यतीत होता है। जीवन में स्थिरता शायद ही आ पाती है। धन के मामले में भी कमजोर ही होते है।

कानों पर बाल (Hair on Ear)

कान पर बड़े-बड़े बाल होना धन का प्रतीक माना गया है। ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली कहलाता है। ऐसे व्यक्ति चतुर, दंभी, स्वार्थी तथा व्यवहारकुशल होते हैं। धन संचय करने में सत्य-असत्य की परवाह नहीं करते।ऐसे लोग की आयु लम्बी होती है और अपने ही परिश्रम के बल पर अपार धन संपत्तिे अर्जिुत करते हैं। ऐसे व्यक्ति  चालाक, स्वार्थी, अहंकारी, तथा व्यवहारकुशल होते हैं। धन संचय करना इनका मुख्य उद्देश्य हो जाता है और इसके लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं।

यदि आपका कान कनपट्टी से जुड़ा है तो ऐसा व्यक्ति विद्या तथा बुद्धि के बल पर धन अर्जित करता है।ऐसा व्यक्ति बुद्धि एवं कौशल से धन प्राप्त करता है। प्रत्येक कार्य साधने की युक्ति रखता है।

नीचे से गोलाई वाले कान अपार धन, मान सम्मान, यश, वैभव, भोगवृत्ति तथा ऐश्वर्य एवं सुख-सुविधा का उपभोग करने वाला जातक होता है।

उभरी मोटी पपड़ी वाले कान ईश्वर भक्ति एवं यश की वृद्धि का प्रतीक है।

कान उभरे हुए हों और उसकी नोक सुडौल तथा बड़ी हो तो यह आपके सौभाग्य का सूचक है।

छोटे कान बुद्धिमत्ता का परिचायक हैं। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान होता है।

चपटा कान वाला व्यक्ति भोग विलास से युक्त होता है।

सामुद्रिक शास्त्र के आधार पर ये एक आंकलन आपके सामने पेश किया गया है लेकिन किसी भी बाधा के लिए इसका संदर्भ लेने से पहले विशेषज्ञों से जरूर सलाह लें |

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