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01 May, 2018 Blog

Astromitram : क्यूँ होती है घर में धन हानी / Why we lose money in Home

एस्ट्रोमित्रम में आज आपको बताएंगे कि घर में धन की हानि क्यों होती है| अथक परिश्रम के बावजूद घर में लक्ष्मी का आगमन नहीं होता| इसके कई कारण हैं|

अगर आपके घर में धन की कमी है या आप आर्थिक तंगी या कर्ज आदि से परेशान रहते हैं तो इसका कारण आपके घर या दुकान में मौजूद कोई वास्‍तुदोष हो सकता है। वास्‍तुदोष का असर सबसे ज्‍यादा व्‍यक्‍ति की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है इसलिए अगर आप ऐसी किसी भी परेशानी से बचना चाहते हैं तो अपने घर में वास्‍तु का पूरा ध्‍यान रखें।

 वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की खिड़की, दरवाजे और मुख्य रूप से मेन-गेट पर काला पेंट हो तो परिवार के सदस्यों के व्यवहार में अशिष्टता, गुस्सा, बदजुबानी आदि बढ़ जाते हैं। घर के जिस भी सदस्य की जन्मपत्रिका में वाणी स्थान व संबंधित ग्रह-नक्षत्र शनि, राहु मंगल और केतु आदि से प्रभावित हों, उस पर उक्त प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देता है। मंगल व केतु का प्रभाव हो तो लाल पेंट कुतर्क, अधिक बहस, झगड़ालू और व्यंगात्मक भाषा इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति की तरफ इशारा करता है। ऐसे हालात में सफेद रंग का प्रयोग लाभदायक होता है।

क्या आपके घर में पर्याप्त रोशनी है ? किसी भी कमरे में कम रोशनी, अंधेरे कोने और शाम को मंद रोशनी से बचें क्योंकि उससे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है । खासकर शाम का अंधेरा अमंगल ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है । अगर आपका घर अच्छी तरह से प्रकाशित नहीं है तो आपके परिवार के सदस्यों में निरूत्साह के साक्षी होंगे ।

आर्थिक हानि के लिए घर की दशा और दिशा भी काफी हद तक जिम्मेदार होती है|

घर का मुख्‍य द्वार सिर्फ पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। हालांकि वास्तुशास्त्री मानते हैं कि घर का मुख्‍य द्वार चार में से किसी एक दिशा में हो। वे चार दिशाएं हैं- ईशान, उत्तर, वायव्य और पश्चिम। लेकिन हम यहां सलाह देंगे सिर्फ दो ही दिशाओं में से किसी एक का चयन करें।

पूर्व या उत्तर का द्वार : पूर्व इसलिए कि पूर्व से सूर्य निकलता है और पश्चिम में अस्त होता है। उत्तर इसलिए कि उत्तरी ध्रुव से आने वाली हवाएं अच्छी होती हैं और दक्षिणी ध्रुव से आने वाली हवाएं नहीं। घर को बनाने से पहले हवा, प्रकाश और ध्वनि के आने के रास्तों पर ध्यान देना जरूरी है।

भूमि का ढाल : सूरज हमारी ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है अत: हमारे वास्तु का निर्माण सूरज की परिक्रमा को ध्यान में रखकर होगा तो अत्यंत उपयुक्त रहेगा। सूर्य के बाद चंद्र का असर इस धरती पर होता है तो सूर्य और चंद्र की परिक्रमा के अनुसार ही धरती का मौसम संचालित होता है। अत: पूर्व, उत्तर एवं ईशान की और जमीन का ढाल होना चाहिए।

कैसी हो आपके घर की वास्तु रचना

  1. घर का मुख्‍य द्वार 4 में से किसी 1 दिशा में हो। वे 4 दिशाएं हैं- ईशान, उत्तर, वायव्य और पश्चिम।
  2. घर के सामने आंगन और पीछे भी आंगन हो जिसके बीच में तुलसी का एक पौधा लगा हो।
  3. घर के सामने या निकट तिराहा-चौराहा नहीं होना चाहिए।
  4. वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की घर का दरवाजा दो पल्लों का होना चाहिए अर्थात बीच में से भीतर खुलने वाला हो। दरवाजे की दीवार के दाएं 'शुभ' और बाएं 'लाभ' लिखा हो।
  5. घर के प्रवेश द्वार के ऊपर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाएं।
  6. घर के अंदर आग्नेय कोण में किचन, ईशान में प्रार्थना-ध्यान का कक्ष हो। नैऋत्य कोण में शौचालय, दक्षिण में भारी सामान रखने का स्थान आदि हो।
  7. घर में बहुत सारे देवी-देवताओं के चित्र या मूर्ति न रखें। घर में मंदिर न बनाएं।
  8. घर के सारे कोने और ब्रह्म स्थान खाली रखें
  9. घर की छत में किसी भी प्रकार का उजालदान न रखें।
  10. वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की घर के निकट हो मंदिर के आसपास तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  11. घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक वस्तुओं का संग्रह न करें और अटाला भी इकट्ठा न करें
  12. वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की घर में सीढ़ियां सदैव विषम संख्या यानि ऑड नंबर में होनी चाहिए।
  13. उत्तर, पूर्व तथा उत्तर-पूर्व (ईशान) में खुला स्थान अधिक रखना चाहिए।
  14. घर के ऊपर केसरिया ध्वज लगाकर रखें
  15. घर में किसी भी तरह के नकारात्मक पौधे या वृक्ष न लगाएं

वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की घर में टूटे-फूटे बर्तन एवं कबाड़ को जमा करके रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बहुत से लोग घर की छत पर अथवा सीढ़ी के नीचे कबाड़ जमा करके रखते हैं, जो धन वृद्धि में बाधक होता है।

अगर आपके घर या दुकान में कोई वास्‍तुदोष है और आप बिना किसी टूट-फूट के उस दोष का निवारण करना चाहते हैं तो आपको अपने घर या दुकान में वास्‍तुदोष निवारण यंत्र की स्‍थापना करनी चाहिए। इस यंत्र की स्‍थापना से घर, भवन और दुकान के सभी तरह के वास्‍तुदोष दूर होते हैं।  वास्तुविद पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की आप वास्तुदोष निवारण के लिए सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठित "वास्‍तुदोष निवारण यंत्र" Astromitram से भी प्राप्‍त कर सकते हैं।

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