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02 Nov, 2018 Blog

Roop Chaudas Ko Ye Kaam Karna Bilkul Na Bhule / रूप चौदस को ये काम करना बिल्कुल ना भूलें

https://youtu.be/gfHPLfpPR5E

रूप चौदस को ये काम करना बिल्कुल ना भूलें

कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी को मनाये जाने वाले पर्व रूप चौदस को नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली, नरक निवारण चतुर्दशी या काली चौदस के
रुप में भी जाना जाता है। दिवाली के पांच दिनों के त्यौहार में यह धन तेरस के बाद अता है।
रूप चौदस के बाद दिवाली – लक्ष्मी पूजन के अलावा अगले दिन अन्न कूट, गोवर्धन पूजा और अंत में भाई दूज मनाया जाता है। इसे छोटी दीपावली के
तौर पर भी जाना जाता है।
इस दिन स्वच्छ होने के बाद यमराज का तर्पण कर तीन अंजलि जल अर्पित किया जाता है और शाम के वक्त दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि तेरस,
चौदस और अमावस्या के दिन दीपक जलाने से यम के प्रकोप से मुक्ति मिलती है तथा लक्ष्मी जी का साथ बना रहता है।


रूप चौदस का महत्व
      

रूप चौदस सौन्दर्य को निखारने का दिन है। भगवान की भक्ति व पूजा के साथ खुद के शरीर की देखभाल भी जरुरी होती है। ऐसे में रूप चौदस का यह
दिन स्वास्थ्य के साथ सुंदरता और रूप की आवश्यकता का सन्देश देता है।
जिस प्रकार महिलाओं के लिए सुहाग पड़वा का स्नान माना जाता है, उसी प्रकार रूप चौदस पुरुषों के लिए शुद्घि स्नान माना गया है। वर्षभर ज्ञात, अज्ञात
दोषों के निवारणार्थ इस दिन स्नान करने का शास्त्रों में काफी महत्व बताया गया है।

माना जाता है कि सूर्योदय के पहले चंद्र दर्शन के समय में उबटन, सुगंधित तेल से स्नान करना चाहिए। सूर्योदय के बाद स्नन करने वाले को नर्क समान
यातना भोगनी पड़ती है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि ऋतु परिवर्तन के कारण त्वचा में आने वाले परिवर्तन से बचने के लिए भी विशेष तरीके से
स्नान किया जाता है।

रूप चौदस पर विशेष उबटन के जरिए और गर्मी और वर्षा ऋतु के दौरान बनी परत को हटाने के लिए विशेष उबटन का स्नान करना चाहिए।

*नरक चतुर्दशी  मुहूर्त:-
*नरक चतुर्दशी  6 नवंबर मंगलवार  2018
*अभ्यंग स्नान समय :- 04.59 बजे से 06.36 बजे तक
*अवधि : 1 घंटे 37 मिनट

*नरक चतुर्दशी के नियम:-
*कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन चंद्रोदय या सूर्योदय (सूर्योदय से सामान्यत: 1 घंटे 36 मिनट पहले का समय) होने पर नरक चतुर्दशी मनाई जाती
है।

*नरक चतुर्दशी पूजन विधि:-
*नरक चतुर्दशी के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले स्नान करने का महत्व है। इस दौरान तिल के तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए, उसके बाद
अपामार्ग यानि चिरचिरा को सिर के ऊपर से चारों ओर 3 बार घुमाना चाहिए।
*नरक चतुर्दशी से पहले कार्तिक कृष्ण पक्ष की अहोई अष्टमी के दिन एक लोटे में पानी भरकर रखा जाता है, जिसे नरक चतुर्दशी के दिन नहाने के पानी में
मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है।
*स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करने पर मनुष्य द्वारा वर्ष भर किए गए पापों का नाश हो जाता है।
*घर के मुख्य द्वार से बाहर यमराज के लिए तेल का दीपक जलाएं।
*नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय सभी देवताओं की पूजन के बाद तेल के दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों ओर, घर के बाहर व कार्य स्थल के
प्रवेश द्वार पर रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी सदैव घर में निवास करती हैं।
*रूप चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
*इस दिन अर्धरात्रि में घर के बेकार सामान फेंक देना चाहिए।
*मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के अगले दिन दीपावली को लक्ष्मी जी घर में प्रवेश करती है, इसलिए दरिद्रता यानि गंदगी को घर से निकाल देना चाहिए।

 

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