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08 May, 2018 Blog

Astromitram: राहु रत्न गोमेद ०१ / Rahu Ratn Gomed 01

https://youtu.be/GFkIHzb762w

राहु एक छाया ग्रह है। इसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है, यह जिस भाव, राशि, नक्षत्र या ग्रह के साथ से जुड़ जाता है, उसके अनुसार ही अपना फल देने लगता है। राहु जब नीच का या अशुभ होकर प्रतिकूल फल देने लगता है तो ज्योतिष के जानकार लोग गोमेद पहनने का सुझाव देते है। गोमेद राहु का रत्न है, इसे पहनने से लाभ और हानि दोनों हो सकते है। इसलिए गोमेद पहनने से पहले उसके बारें में अच्छे से जान लेना जरूरी होता है।

राहू का रत्‍न

गोमेद गारनेट रत्‍न समूह का रत्‍न है जिसे अंग्रेजी में हैसोनाइट कहते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र में इसे राहू का रत्‍न माना जाता है। यह लाल रंग लिए हुए पीला एकदम गोमूत्र के रंग जैसा होता है। यह भी एक प्रभावशाली रत्‍न है जो राहू के दोषों को दूर करता है। शुद्ध गोमेद चमकदार, चिकना होता है। पीलापन लिए हुए यह रत्‍न उल्‍लू की आंख के समान दिखाई देता है। यह सफेद रंग का भी होता है जो इतना चमकता है कि दूर से देखने पर ये हीरे जैसा दिखता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार गोमेद बहुत सस्‍ता रत्‍न है लेकिन यह आवश्‍यक नहीं है कि सभी को सही गोमेद जरूरत के समय पर ही प्राप्‍त हो जाए। इसलिए इसके दो उपरत्‍न हैं जिन्‍हें गोमेद के बदले धारण किया जा सकता है। पहला उपरत्‍न है तुरसा और दूसरा साफी। इसके अलावा गोमेद के रंग का अकीक भी गोमेद के स्‍थान पर पहना जा सकता है।

गोमेद के अलग अलग नाम है, गोमेद, गोमेदक, तपोमणि, पिग स्फटिक, जटकूनिया, जिरकान आदि। 

गोमेद आकर्षक पारदर्शक पारभासक तथा अपारदर्शक पत्थर है।  जो दूर से स्वच्छ गोमूत्र अथवा अंगार के समान रंग का हो, वजनी कड़कदार हो, जिसमें परत न हो, जो छूने पर कोमल और चमकदार हो, वह उत्तम जाति का गोमेद माना जाता है।

अब आपको बताते हैं किसे पहनना चाहिए गोमेद ,कुंडली में ग्रहों की दशा का आंकलन करने के बाद ही राहू का ये रत्‍न धारण करना चाहिए। राहू कुंडली में यदि केंद्र में विराजमान हो अर्थात 1,4,7, 10 भाव में तो गोमेद अवश्‍य धारण करना चाहिए।अगर राहू दूसरे, तीसरे, नौवे या ग्‍यारवें भाव में राहू हो तो भी गोमेद धारण करना बहुत लाभदायक होगा। राहू अगर अपनी राशि से छठे या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद पहनना हितकर होता है। जिन व्यक्तियों की राशि अथवा लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला या कुम्भ हो उन्हें गोमेद धारण करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार राजनीति में सफलता हासिल करने वाले लोगों को गोमेद धारण करने से विशेष लाभ होता है। यदि राहु द्वितीय, एकादश भाव में हो तो गोमेद पहनने से लाभ होगा किन्तु यदि राहु छठें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो गोमेद सोंच-समझकर पहने अन्यथा हानि हो सकती है।

 

कब देता है गोमेद फायदा---

यदि राहू शुभ भावों का स्‍वामी हो और स्‍वयं छठें या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद धारण करना लाभदायक होता है। राहू अगर अपनी नीच राशि अर्थात धनु में हो तो गोमेद पहनना चाहिए।जब व्यक्ति के बनते हुये काम में बाधायें आने लगे, भूत-प्रेत का भय हो, किसी ने काम को बॉध दिया हो या फिर अचनाक व्यवसाय में हानि हो रही हो तो गोमेद धारण करने से लाभ मिलता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  यदि किसी के पास धन रूकता न हो तो गोमेद धारण करने लाभ मिलता है। पति-पत्नी में आपसी तनाव रहता हो और तलाक तक की नौबत आ जाये तो गोमेद पहनने से रिश्ते फिर से मधुर हो जाते है। जिस व्यक्ति का मन परेशान रहता हो, घर में दिल न लगे, मन उखड़ा-उखड़ा रहे तो उसे गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए।

इस राशि का है रत्‍न--राहू मकर राशि का स्‍वामी है। अत: मकर राशि वाले लोगों के लिए भी गोमेद धारण करना लाभ फलों को बढ़ाता है। राहू अगर शुभ भाव का स्‍वामी है और सूर्य के साथ युति बनाए या दृष्‍ट हो अथवा सिंह राशि में स्थित हो तो गोमेद धारण करना चाहिए। एस्ट्रोमित्रम की अगली कड़ी में आपको बताएंगे कि ये रत्न किस तरह जातक को लाभ पहुंचाते हैं |

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