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02 Nov, 2018 Blog

Maa Lakshmi Ke Pujan Me Bhul Kar Bhi Na Kare Ye Galti / मां लक्ष्मी के पूजन में भूल कर भी न करें ये गलती

https://youtu.be/Lg87WoSQlLI

मां लक्ष्मी के पूजन में भूल कर भी न करें ये गलती

लक्ष्मी प्राप्ति की इच्छा हर किसी को होती है। लक्ष्मी कृपा के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाना अत्यन्त अवश्यक है क्योंकि लक्ष्मी उन्हीं के चरणों में रहती हैं। जो लोग केवल माता लक्ष्मी को पूजते हैं, वे भगवान नारायण से दूर हो जाते हैं। अगर हम नारायण की पूजा करें तो लक्ष्मी तो वैसे ही पीछे 2 आ जाएंगी, क्योंकि वो उनके बिना नहीं रह सकती ।
शास्त्रों में या भगवान विष्णु के किसी भी तस्वीर को देखें, आप पाएंगे कि मां लक्ष्मी सदैव उनके चरणों में बैठी ही दिखती हैं।
इस बारे में एक पौराणिक कहानी है  
एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगों में कितनी भक्ति बढ़ गई है । सब “नारायण नारायण” करते हैं ।”
तो लक्ष्मी ने उत्तर दिया, “आप को पाने के लिए नहीं। मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गई  है।”
लक्ष्मी के ये बोलते ही भगवान बोलते हैं कि “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जाप थोड़े ही करते हैं।”
मां लक्ष्मी नारायण की बात सुन कह देती हैं कि , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए।”
भगवान नारायण एक गांव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए।एक घर का दरवाजा खटखटाया।घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहां के है ?”
तो भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा-कीर्तन करना चाहते है…”
यजमान बोले, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में ही ठहरिए…”
गांव के कुछ लोग इकट्ठा हो गए और सब तैयारी कर दी।पहले दिन कुछ लोग आए। अब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी। दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गई। भगवान खुश हो गए, लोग कितनी भक्ति में लीन है ।
लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाए कि क्या चल रहा है। लक्ष्मी माता ने बुर्जुग माता का रूप लिया।और उस नगर में पहुंची। एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी कि माता उसके द्वार पर पहुंची । बोली, 'बेटी थोड़ा पानी पिला दे।'
तो वो महिला बोली, माताजी साढ़े 3 बजे है। मुझे प्रवचन में जाना है।'
लक्ष्मी माता बोलीं, 'पिला दे बेटी थोड़ा पानी, बहुत प्यास लगी है। 'ये सुनते ही वो महिला लौटा भर के पानी लाई। माता ने पानी पिया और लौटा वापस लौटाया तो सोने का हो गया था।

यह देख कर महिला अचंभित हो गई, कि लौटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का । कैसी चमत्कारिक माता जी हैं । अब तो वो महिला हाथ-जोड़ कर कहने लगी कि, 'माताजी आप को भूख भी लगी होगी, खाना खा लीजिए' ऐसा उसने ये सोचकर कहा कि अगर वो उसके घर खाना खाएंगी तो थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास भी सोने के हो जाएंगे।
माता लक्ष्मी बोली, 'तुम जाओ बेटी, तुम्हारा प्रवचन सुनने जाने का समय हो गया है ।'
मां लक्ष्मी की बात सुनकर वह महिला प्रवचन में चली गई, लेकिन वहां पहुंचते ही उसने सारी बातें आस-पास की महिलाओं को बता दी। 
अब महिलाएं यह बात सुनकर चलते सत्संग में से उठ कर चली गई ।अगले दिन से कथा में लोगों की संख्या कम हो गई।तो भगवान ने पूछा कि, “लोगो की संख्या कैसे कम हो गई ?”।
किसी ने कहा, ‘नगर में एक चमत्कारिक माताजी आई हैं।' जिस गिलास में दूध पीती हैं वो गिलास सोने का हो जाता है। जिस थाली में रोटी सब्जी खाती हैं तो थाली सोने की हो जाती है।  उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते।'
भगवान नारायण समझ गए कि लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है।
इतनी बात सुनते ही देखा कि जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए। और वहां से चले गए। और माता लक्ष्मी के पास पहुंच गए। । बोले, “ माता, मैं तो भगवान की कथा का आयोजन कर रहा था और आप ने मेरे घर को ही छोड़ दिया ।”
माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहले आनेवाली थी । लेकिन तुमने अपने घर में जिस कथा कार को ठहराया है ना , वो चला जाए तभी तो मैं आऊंगी ।”
सेठ जी बोले, 'बस इतनी सी बात । अभी उनको धर्मशाला में कमरा दिलवा देता हूं ।'
जैसे ही महाराज कथा कर के घर आए, तो सेठ जी बोले, 'महाराज आप अपना बिस्तर बांधों । आपकी व्यवस्था अब से धर्मशाला में कर दी है ।'
महाराज बोले, “ अभी तो 2/3 दिन बचे है कथा के मुझे यहीं रहने दो”
सेठ बोले, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ । मैं कुछ नहीं सुनने वाला । किसी और मेहमान को ठहराना है। ”
इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा कि, “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ।  मैं इनसे बात कर लूंगी।”
माता लक्ष्मी जी भगवान से बोली, “प्रभु , अब तो मान गए?”
भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी कि तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहां आया।।
संत जहां कथा करेंगे वहां लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा।”
यह कह कर नारायण भगवान ने वहां से बैकुंठ के लिए विदाई ली। अब प्रभु के जाने के बाद अगले दिन सेठ के घर सभी गांव वालों की भीड़ हो गई। सभी चाहते थे कि यह माता सभी के घरों में बारी 2 आए। लेकिन लक्ष्मी माता ने सेठ और बाकी सभी गांव वालों को कहा कि, अब मैं भी जा रही हूं। सभी कहने लगे कि, माता, ऐसा क्यों, क्या हमसे कोई भूल हुई है ? माता ने कहा, मैं वही रहती हूं, जहां नारायण का वास होता है। आपने नारायण को तो निकाल दिया, फिर मैं कैसे रह सकती हूं ?’ और वे चली गई।

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