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15 Nov, 2018 Blog

Kya Karein Daan Jis Se Banega Bhagya / दान से बनेगा भाग्य

https://youtu.be/gla6_G9NB3I

दान से बनेगा भाग्य

तपो धर्म: कृत युगे ज्ञानं त्रेता युगे स्मृतं। द्वापरे  चाध्वरा:

प्रोक्ता: कलौ दानं दया दम:।।-- बृहस्पति।

सतयुग का धर्म तप, त्रेता का ज्ञान, द्वापर का यज्ञ व कलियुग का धर्म दान दया व दम है।

धर्म, दान, यज्ञ, दान दया यह सभी मन से व हाथों से किये जाते हैं। इनको करने से भाग्य चमकता है, यही मनुष्य का कर्म है। इसका उत्तर ज्योतिष शास्त्र देता है।

तीसरा भाव हाथ है, तीसरे भाव से बारहवां भाव कर्म है। चौथा भाव से बारहवां भाव भाग्य है।

भाग्य से बारहवां भाव सुख है। बारहवां भाव से तीसरा भाव सुख है। जो मन से अपने हाथों से दान करता है, उसका भाग्य बनता है, उसे सुख मिलता है। दान अहंकार को त्याग कर, समस्त जीवों पर दया का भाव रखते हुए करना चाहिए। सुई के नोक के बराबर दान भी अगर मन से कर लिया तो भाग्य बनेगा ही।

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