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25 Apr, 2018 Blog

Astromitram : Janiye Vyavsay aur Jyotish Yog / जानिए व्यवसाय और ज्योतिष योग

जानिए विभिन्न व्यवसाय और उनके ज्योतिषीय योग

हर व्यक्ति की नियति उसके जन्म पर तय हो जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  निश्चित जन्म समयए जन्म दिनांक और जन्म स्थान के आधार पर हर जातक की जन्मकुंडली में कुछ विशिष्ट योग निर्मित होते हैं जो व्यक्ति के जीवन का आधार बनते हैं। व्यक्ति जीवनकाल में कितना धनार्जन करता हैए  व्यक्ति के जीवन में धन क्षेत्र कितना प्रबल अथवा निर्बल है यह जातक की कुंडली में बनने वाले कुछ विशेष योगों पर निर्भर करता है। कुंडली मे बनने वाले योगों में से दरिद्र योग को ज्योतिष अनुसार अत्यधिक अशुभ माना जाता है। इस योग के बनने से जातक के व्यवसाय और रोजगार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। आज आपको बताते हैं कुंडली में छिपे वो योग जो आपको व्यवसाय की सही दिशा प्रदान कर सकते हैंण्ण्ण्

उद्योगपति व व्यवसायी बनने के योग

सूर्यए चंद्र व मंगल इस वर्ग के महत्वपूर्ण कारक ग्रह हैं। व्यापार का कारक बुध को माना गया है। कुंडली में प्रबल धन योगए जातक को कुशल व्यवसायी या उद्योगपति के रू प में प्रतिष्ठित कर उसे धनी बनाता है।

शारदा लक्ष्मी योग

इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर माँ शारदा एवं धन की अधिष्ठातृ देवी लक्ष्मी की भी बराबर कृपा रहती है ।ऐसा जातक उच्च कोटि का कविए संगीतज्ञ एलेखकए पत्रकारए सम्पादक एवं कलाकार होता है तथा उसकी यश.पताका देश .विदेश तक फहराती हैण्ण्ण्

सेना या पुलिस अधिकारी बनने के योग

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार   मंगल को बलए पराक्रम व साहस का प्रतीक माना है। कुंडली में मंगल बली होने पर जातक को सेना या पुलिस में करियर प्राप्त होता है।

सीए बनने के योग

बुध का संबंध व्यापारिक खातों से तथा गुरू का संबंध उच्च शिक्षाए परामर्श एवं मंत्रणा से है। बुध व गुरू का बली होकर दशम भाव से संबंध करना जातक को लेखाकर बनाता है। द्वितीय भाव का संबंध वित्त व वित्तीय प्रबंध से है। बुध का संबंध द्वितीयए पंचम अथवा दशम भाव से हो तो चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाता है।

बैंक अधिकारी 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  कुंडली में यदि बुधए गुरू और द्वितीयेश का दृष्टि.युति संबंध दशम भाव या दशमेश से होए तो जातक बैंक अधिकारीए वित्त प्रबंधक या लेखाकार बनता है। गुरू मंत्रणा का नैसर्गिक कारक ग्रह यदि दशम भावए पंचम भावए बुध या द्वितीय भाव से संबंध करेए तब भी जातक लेखाकार बनकर धन व मान.प्रतिष्ठा पाता है।

लेक्चरार या प्रोफेसर बनने के योग.

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  पंचमेश और चतुर्थेश का राशि परिवर्तनए दशमेश शुक्र का लाभस्थ होकर पंचम भाव को देखना तथा पंचमेश गुरू की दशम भाव पर दृष्टिए शिक्षा के क्षेत्र से आजीविका का योग बनाती है। दशमेश का संबंध बुध व गुरू से होने पर जातक लेक्चरर बनता है।

भारती योग 

परिभाषा रूजातक की नवमांश कुंडली का स्वामी दूसरे भाव में भाग्येश से युति किए हुए हो तथा दूसरा भाव में पंचमेश एवं एकादशेश से दृष्ट हो तो यह योग बनता है 

इस योग में उत्पन्न व्यक्ति भाग्यशाली होता है तथा उस पर माँ सरस्वती अर्थात भारती की वरद कृपा रहती है जिसके फलस्वरूप वह विद्वान होकर संगीत .गायन आदि सभी कलाओं में निपुण होता है ।ऐसा जातक देशभक्त भी होता है 

विज्ञान योग

परिभाषा रूअष्टमेश और तृतीयेश की युति हो तथा दोनों बलवान हों तो विज्ञान योग बनता है ।

ऐसा जातक विज्ञान को जानने वालाए अनुसंधान में रूचि रखने वालाए अविष्कारक तथा नित नई खोज में रूचि रखने वाला होता है|

उच्च वैज्ञानिक योग

परिभाषा रूज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  लग्न में बृहस्पति होए चंद्रमा केंद्र में होए राहु चंद्रमा से द्वितीय स्थान में हो तथा सूर्य एवं मंगल राहु से तृतीय स्थान में हो तो यह योग बनता है |

फलःऐसा जातक उच्चकोटि का वैज्ञानिक होता है ।उसे जीवन में सभी प्रकार की खुशियाँ विद्या ऐश्वर्य सहज में ही प्राप्त होते हैं ।वह राजातुल्य ऐश्वर्य को भोगता है ।

इंजीनियर बनने के योग

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  ज्योतिषशास्त्र में सूर्यए मंगलए शनि व राहु.केतु को पाप ग्रह माना हैए किंतु पंचम भाव या पंचमेश से संबंध करने पर ये ग्रह जातक की तकनीकी क्षमता बढ़ा देते हैं। दशम भाव या दशमेश से मंगलए शनिए राहु.केतु का संबंध होने पर जातक को तकनीकी क्षेत्र में आजीविका मिलती है।

डॉक्टर बनने के योग

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  सूर्य स्वास्थ्य का कारक माना गया है। मंगल भुजबलए उत्साह व कार्य शक्ति का कारक है। गुरू ज्ञान और सुख का। इसलिए सूर्यए मंगल व गुरू यदि जन्म कुंडली में बली होंए तो व्यक्ति कुशल चिकित्सक बनता है। वकील या न्यायाधीश बनने के योग... ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  नवम भाव द्वारा धर्मए नीति.नियम व न्याय प्रियता का तथा षष्ठ भाव से कोर्ट कचहरी संबंधी विवादों का विचार किया जाता है। दशमेश का नवम या षष्ठ भाव से संबंध होने पर व्यक्ति वकील बनता है।

ज्योतिषी बनने के लिए लग्न व लग्नेश का बली होना आवशयक है । लग्नेश स्वग्रही हो या केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो तो शुभ होता हैए इसी प्रकार द्वितीय भाव वाणी का कारक होने से शुभ होना चाहिए तथा बुध व शुक्र ग्रह भी शुभ व बली होने चाहिए ।

यदि किसी कुंडली में पंचम भाव या नवम भाव में गुरु व चन्द्रमा की युति हो तो ऐसा व्यक्ति ज्योतिषी बन सकता हैए इसी प्रकार द्वितीय भाव में उच्च का गुरु स्थित हो या उच्च का शुक्र हो तो व्यक्ति ज्योतिषी बनता है ।

यदि कुंडली में बुध स्वराशि में या मित्र राशि में स्थित हो या दूसरे भावए तीसरे भावए पंचम भाव या सातवे भाव में बुध और शुक्र की युति हो तो व्यक्ति की रूचि ज्योतिष विद्या में होती है ।

किसी कुंडली में पंचम भाव या दशम भाव में मंगलए गुरु और शनि की युति हो तथा उस भाव पर बुध की दृष्टि हो तो वह व्यक्ति ज्योतिष में उच्चाईंयो को छूता है ।

गन्धर्व योग

परिभाषा रूयदि दशमेश तृतीय या एकादश भाव में होए लग्नेश वा बृहस्पति युति किए हुए हों एसूर्य उच्च का हो तथा चंद्रमा नवम भाव में हो तो यह योग बनता है ।

फलःऐसा जातक कला का सूक्ष्म जानकार होता है तथा संगीतए नृत्यए चित्रकलाए सिनेमा इत्यादि में बहुत नाम कमाता है ।वह नित नई बेशभूषा एसुंदरए साजों के साथ जीवन यापन करते हुए दीर्घजीवी होता है ।ऐसा व्यक्ति पूर्ण सद्गुणी एसज्जन एवं विनम्र होता है।

संगीत .सिनेमा ; कलानिधिद्धयोग

परिभाषा रूज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  जिसकी कुंडली में द्वितीय या पंचम भाव में गुरु हो एगुरु बुधए शुक्र की राशि में हों या बुध शुक्र से किंवा दृष्ट हो तो यह योग बनता है ।

फलः ऐसा जातक संगीतए सिनेमा एवं कलाक्षेत्र का कुशल ज्ञाता होता है ।शुक्र संगीतए कलाए काव्यशास्त्र एवं सिनेमा का कारक ग्रह है।प्रस्तुत योग के द्वारा यदि इसका संबंध द्वितीयेश से जुड़ जाता है तो निश्चय ही व्यक्ति इन्हीं कलाओं के माध्यम से विपुल धन व कीर्ति अर्जित करता है ।

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