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13 Apr, 2018 Blog

Astromitram : Importance of Shree Yantra in Home / श्री यंत्र की स्थापना का महत्व

Astromitram की इस कड़ी में आपको बताएंगे घर में श्रीयंत्र स्थापित करने का महत्व क्या है... श्रीयंत्र एक सर्वाधिक लोकप्रिय प्राचीन यन्त्र है, इसकी अधिष्टात्री देवी स्वयं श्रीविद्या अर्थात त्रिपुर सुन्दरी हैं और उनके ही रूप में इस यन्त्र की मान्यता है। यह बेहद शक्तिशाली ललितादेवी का पूजा चक्र है, इसको त्रैलोक्य मोहन अर्थात तीनों लोकों का मोहन यन्त्र भी कहते है। 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया घर में इस यंत्र को स्थापित करना बेहद शुभ माना जाता है... क्योंकि ये सुख समृद्धि लेकर आता है... श्री यंत्र की स्थापना से पहले ये जानना भी जरूरी है कि श्रीयंत्र को घर में कब स्थापित किया जाए... श्रीयंत्र को स्थापित करने का सबसे श्रेष्ठ दिन है अक्षय तृतीया...
अक्षय तृतीया के दिरन घर में श्री यंत्र की स्था पना भी धन की परेशानी दूर करने के लिरए फायदेमंद है। पारद के लक्ष्मी नारायण की स्था.पना भी अक्षय तृतीया के दिीन कर सकते हैं। लक्ष्मी के हा‌थ में स्िंदात दक्षिरणवर्ती शंख भी धन दायक माना गया है। आप इसे इस दिन अपने घर ला सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की हमारे शास्त्रों मे भी कहा गया है कि यदि लक्ष्मी जी, विष्णु जी के साथ मनुष्य के घर में स्थायी रूप से निवास करें, तो व्यक्ति के जीवन में किसी भी वस्तु तथा भौतिक सुखों का अभाव हो ही नही सकता। हमारे शास्त्रों में इस लिये इस दिन विशेष रूप से ‘श्री यंत्र’ जो कि माँ लक्ष्मी जी का आधार एवं मनुष्य को जीवन में हर प्रकार का भौतिक सुख और ऐश्वर्य देने वाला है तथा दरिद्रता को जीवन से दूर करने वाला है, इस श्री यंत्र की घर में स्थापना विधान बतलाया गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार स्वयं गुरू गोरखनाथ जी ने भी एक स्थान पर कहा है भले ही अन्य सारे प्रयोग असफल हो जाएँ, भले ही साधक नया हो, भले ही उसे स्पष्ट मंत्रो के उच्चारण का ज्ञान न हो, परन्तु अक्षय तृतिया के अवसर पर इनको सफलता अवश्य मिलती है। इस पर्व की पूर्णता के बारे में स्पष्ट करते हुये यहाँ तक कहा गया है कि कोई अभागा ही होगा जो इस पावन अवसर को गवायेगा। जिसके भाग्य में दरिद्रता ही लिखी हुई हो, वही ऐसा अवसर चूकेगा। अतः इस मुहूर्त का उपयोग करके व्यक्ति अपने दरिद्रता, अभाव, परेशानियों को हमेशा के लिये अपने जीवन से कोसों दूर भगा सकता है और उसके स्थान पर सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य व उन्नति को प्राप्त करता है। अक्षय तृतीया वाले दिन स्वर्ण-मुद्रा व स्वर्ण आभूषण खरीदने की भी प्रथा है, यह मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य के जीवन व घर-परिवार में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्यता आती है।

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