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19 Sep, 2018 Blog

Astromitram: Bhavishya Janne Se Pehle Kya Karein / भविष्य जानने से पहले षोडश का अध्ययन जरूरी

https://youtu.be/jWv5rPhlLLg

भविष्य जानने से पहले षोडश का अध्ययन जरूरी

बिना षोडश वर्गीय कुंडली को अध्यन किए सही भविष्य जानना कदापि सम्भव नहीं है।।

 समझें षोडश वर्गीय कुंडली क्या है:-

 षोडश अर्थात 16 वर्ग का फलित ज्योतिष में विशेष महत्व है, क्योंकि कुंडली का सूक्ष्म अध्ययन करने में उनकी विशेष भूमिका है। आईये सबसे पहले जानते हैं षोडश वर्ग क्या है|

तो पहले गणितीय अर्थ समझ लीजिए :-  कुंडली का प्रथम भाव जन्म लग्न कहलाता है, यह भाव तथा सभी 12 भाव 360 अंश परिधि के होते हैं, 360 अंश के 12 भाग ही कुंडली के 12 भाव हैं। अत: कुंडली का कोई भी एक भाव 30 अंश परिधि का माना जाता है। इन 12 भावों में प्रथम भाव लग्न भाव कहलाता है। इस लग्न भाव के 30 अंशों को यदि 2 से भाग किया जाये तो प्रत्येक भाग 15-15 अंश का होगा इस डिवीजन की लग्न भाग को होरा लग्न कहते हैं, इसी प्रकार यदि इस 30 अंश के 3 भाग किये जायें तो प्रत्येक भाग 10 अंश का होगा, इसे द्रेष्कांण और इस के लग्न भाग को द्रेष्कांण लग्न कहते हैं। चार भाग किसे जायेंगे तो इसके लग्न को चतुर्थांश कहेंगे। इसी प्रकार 7 भाग करने पर ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌सप्तमांश लग्न, 9 भाग करने पर नवमांश लग्न, 10 भाग करने पर दशमांश लग्न, 12 भाग करने पर द्वादशांश लग्न, तथा 16, 20, 24, 30 और 60 भाग करने पर क्रमशः षोडशांश, विंशांश, चतुर्विंशांश तथा त्रिशांश लग्न आदि कहते हैं।

 

कह सकते हैं कि इन वर्गों के अध्ययन के बिना जन्म कुंडली का विश्लेषण सटीक होता ही नहीं है, क्योंकि जन्म कुंडली से केवल जातक के शरीर, उसकी संरचना एवं स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है, लेकिन षोडश वर्ग का प्रत्येक वर्ग जातक के जीवन के एक विशिष्ट कारकत्व या घटना के अध्ययन में सहायक होता है। जातक के जीवन के जिस पहलू के बारे में हम जानना चाहते हैं, उस पहलू के वर्ग का जब तक हम अध्ययन न करें तो, विश्लेषण अधूरा ही रहता है। जैसे यदि जातक की संपत्ति, संपन्नता आदि के विषय में जानना हो, तो जरूरी है कि होरा वर्ग का अध्ययन किया जाए। इसी प्रकार व्यवसाय के बारे में पूर्ण जानकारी के लिए दशमांश की सहायता ली जाती है। जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं को जानने के लिए किसी विशेष वर्ग का अध्ययन किए बिना फलित गणना में चूक हो सकती है। षोडश वर्ग में सोलह वर्ग होते हैं, जो जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं की जानकरी देते हैं।

जैसे :-

 

होरा से संपत्ति व समृद्धि।

 

द्रेष्काण से भाई-बहन व पराक्रम।

 

चतुर्थांश से भाग्य, चल एवं अचल संपत्ति।

 

सप्तांश से संतान।

 

नवमांश से वैवाहिक जीवन व जीवन साथी।

 

दशमांश से व्यवसाय व जीवन की उपलब्धियां।

 

द्वादशांश से माता-पिता।

 

षोडशांश से सवारी एवं सामान्य खुशियां।

 

विंशांश से पूजा-उपासना और आशीर्वाद।

 

चतुर्विंशांश से विद्या, शिक्षा, दीक्षा, ज्ञान आदि।

 

सप्तविंशांश से बल एवं दुर्बलता।

 

त्रिशांश से दुःख, तकलीफ, दुर्घटना, अनिष्ट।

 

खवेदांश से शुभ या अशुभ फल।

 

अक्षवेदांश से जातक का चरित्र।

 

षष्ट्यांश से जीवन के सामान्य शुभ-अशुभ फल आदि अनेक पहलुओं का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता है।

 

षोडश वर्ग में सोलह वर्ग ही होते हैं, लेकिन इनके अतिरिक्त और चार वर्ग पंचमांश, षष्ट्यांश, अष्टमांश, और एकादशांश भी होते हैं।

 

पंचमांश से जातक की आध्यात्मिक प्रवृत्ति, पूर्व जन्मों के पुण्य एवं संचित कर्मों की जानकारी प्राप्त होता है।

 

षष्ट्यांश से जातक के स्वास्थ्य, रोग के प्रति अवरोधक शक्ति, ऋण, झगड़े आदि का विवेचन किया जाता है।

 

एकादशांश जातक के बिना प्रयास के धन लाभ को दर्शाता है। यह वर्ग पैतृक संपत्ति, शेयर, सट्टे आदि के द्वारा स्थायी धन की प्राप्ति की जानकारी देता है।

 

अष्टमांश से जातक की आयु एवं आयुर्दाय के विषय में जानकारी मिलती है।

 

षोडश वर्ग में सभी वर्ग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आज के युग में जातक धन, पराक्रम, भाई-बहनों से विवाद, रोग, संतान वैवाहिक जीवन, साझेदारी, व्यवसाय, माता-पिता और जीवन में आने वाले संकटों के बारे में अधिक प्रश्न करता है। इन प्रश्नों के विश्लेषण के लिए सात वर्ग होरा, द्रेष्काण, सप्तांश, नवांश, दशमांश, द्वादशांश और त्रिशांश ही पर्याप्त हैं।

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